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अपराध

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एसबीआई ऋण मुख्यालय के पूर्व एजीएम की 300 करोड़ की संपत्तियां जब्त, सीए और हवाला संचालकों से सांठगांठ कर काली कमाई को वैध करने का प्रयास, कागजी कंपनी भी बनाई

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भोपाल। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), भोपाल के क्षेत्रीय कार्यालय ने धनशोधन निवाण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई)ऋण मुख्यालय भोपाल के पूर्व सहायक महाप्रबंधक अनिल कुमार जैन की लगभग 3.01 करोड़ रुपये की चल संपत्ति को अस्थायी रूप से जब्त (अटैच) किया है। प्रवर्तन निदेशालय ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) एसीबी भोपाल द्वारा अनिल कुमार जैन के खिलाफ ‘भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम’ की धारा 13(2) और धारा 13(1)(बी) के तहत दर्ज एफआईआर के आधार पर इस मामले की जांच शुरू की थी। जिसमें उन पर आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति रखने का आरोप था।

18 महीने में जुटाई 3.01 करोड़ की काली कमाई 

प्रवर्तन निदेशालय की जांच से पता चला कि एक अप्रैल 2017 से 31 दिसम्बर 2018 की अवधि में अनिल कुमार जैन ने 3.01 करोड़ रुपये की संपत्ति जमा की। जो उनकी ज्ञात वैध आय से लगभग 481 प्रतिशत अधिक और उनकी आय के ज्ञात स्रोतों के अनुपात में बहुत ज्यादा थी।

परिजनों के खातों में जमा कराए 2.35 करोड़

जांच में सामने आया कि अनिल कुमार जैन ने अचल संपत्ति बेचने के बहाने अपने और अपने परिवार के सदस्यों के बैंक खातों में 2.35 करोड़ रुपये नकद जमा किए थे, जिसके लिए उन्होंने कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया। धनशोधन की जांच में यह भी पता चला कि इस अवैध कमाई को और अधिक बढ़ाने के लिए इस नकद जमा राशि को फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) में बदल दिया गया। जांच के दौरान जैन ने इस नकद जमा को लेकर कोई ठोस प्रमाण या सहायक दस्तावेजी सबूत नहीं दिए। इस नकद जमा के अलावा अवैध कमाई से 66 लाख रुपये की एफडीआर भी कराई थी। 

काली कमाई को वैध बनाने हवाला का सहारा 

धनशोधन के तहत जांच में पता चला कि अनिल कुमार जैन ने चार्टर्ड अकाउंटेंट सहित हवाला ऑपरेटरों की मिलीभगत से अपनी अवैध आय को वैध आय के रूप में दिखाने की कोशिश की। यह काम एक कागजी कंपनी (शेल कंपनी) मेसर्स एक्सीलेंट इंफ्राबिल्ड प्राइवेट लिमिटेड को अचल संपत्ति बेचने के बहाने किया। अनिल कुमार जैन ने दावा किया कि ऐसे कथित लेन-देन के लिए रकम नकद में उस कंपनी के डायरेक्टरों से मिली थी, जिसमें डमी डायरेक्टर अखिलेश चौधरी भी शामिल थे।