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दुष्कर्मी फूफा इमरान को 20 साल का कारावास
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12 वर्षीय नाबालिग को बहला-फुसलाकर ले गया था अजमेर शरीफ
भोपाल। 12 वर्षीय बालिका को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले जाकर दुष्कर्म करने वाले आरोपी फूफा इमरान को भोपाल जिला न्यायालय ने 20 वर्ष के कारावास और एक लाख रुपये अर्थदण्ड की सजा सुनाई है। सजा का यह आदेश पंद्रद्रहवें अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश श्रीमती कुमुदिनी पटेल ने सुनाया। मामले में शासन की ओर से पैरवी विशेष लोक अभियोजक सुश्री दिव्या शुक्ला और श्रीमती ज्योति कुजूर ने की।
इन अलग-अलग धाराओं में सुनाई सजा
आरोपी इमरान बहला-फुसलाकर अपहरण एवं दुष्कर्म की धारा 376(3), 363, 366, 354 भादवि एवं 3/4, 9एन/10 पॉक्सो एक्ट में दोषी पाया गया। उसे धारा 376(3) भादवि 3/4 पाक्सो एक्ट में 20 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 95,000 रुपये अर्थदण्ड, धारा 9 (एन)/10 पॉक्सो एक्ट में 5 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 2 हजार रुपये, धारा 363 भादवि में 3 वर्ष का सश्रम कारावास एवं एक हजार रुपये, धारा 366 भादवि में 3 वर्ष का सश्रम कारावास एवं एक हजार रुपये, धारा 354 भादवि में एक वर्ष का सश्रम कारावास एवं एक हजार रुपय के अर्थदण्ड से दण्डित किए जाने का आदेश हुआ।
आरोपी के पास से पुलिस ने खोजी थी पीडि़ता
11 जुलाई 2023 को पीडि़ता की माँ ने थाना निशातपुरा पहुंचकर गुमशुदगी दर्ज कराई थी। उसने बताया था कि 12 वर्षीय बेटी सहेली के जन्मदिन कार्यक्रम में जाने की बात कहकर निकली है और वापस नहीं लौटी। पुलिस ने गुमशुदगी की कायमी कर पीडि़ता को 14 जुलाई 2023 को उसके फूफा के घर से बरामद किया था। पीडि़ता ने बताया कि उसके फूफा ने उससे कहा कि वह उसकी फूफी से परेशान हो चुका है और उससे मोहब्बत करता है शादी करना चाहता है। दोनों में फोन पर बातचीत होने लगी तो उसकी अम्मी ने भी सुन ली तो उसे समझाया भी। लेकिन 11 जुलाई 2023 को वह सहेली के घर जाने की बात कहकर घर से निकली और स्टेशन पहुंचकर फूफा के साथ अजमेर शरीफ दरगाह पहुंची। वहां किराए पर लिए कमरे में फूफा ने जबरदस्ती दुष्कर्म किया। इस बीच इमरान की बहनों ने उसे फोन कर एफआईआर होने की बात बताई तो वह भोपाल वापस लौट आया। उसने पीडि़ताको धमकी दी कि अगर दुष्कर्म की घटना किसी को बताई तो वह घरवालों को जान से मार देगा। इसी आधार पर पुलिस ने अलग-अलग धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर न्यायालय में चालान पेश किया। न्यायालय ने पीडि़त पक्ष के तर्कों, साक्ष्य और दस्तावेजों से सहमत होकर आरोपी को सजा सुनाई।
16 साल की होती पीडि़ता तो 10 साल होती सजा
अभियोजन पक्ष के अनुसार वापस लौटने के बाद भी पीडि़ता घटना के बारे में नहीं बता रही थी, क्योंकि वह फूफा को पसंद करने लगी थी। लेकिन उसकी उम्र 18 से कम होने के कारण उसकी सहमति जरूरी नहीं थी। पोक्सो एक्ट में यदि पीडि़त बालिका 10 साल की होती तो आरोपी को अधिकतम 10 साल तक का ही कारावास हो सकता था। लेकिन वह 16 से कम उम्र की है, इसलिए अधिनियम के अंतर्गत न्यूनतम सजा 20 साल दी जा सकी।
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