मध्यप्रदेश

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ठेकेदार गटक रहे मासूमों का पोषण आहार, ग्वालियर में मासूमों को गर्म भोजन और महिला सशक्तिकरण की सरकार की योजना फेल

मध्यप्रदेश

भोपाल/ग्वालियर। आंगनबाडिय़ों में 3 से 6 वर्ष तक के मासूमों को सुबह पोषक नाश्ता और दोपहर में ताजा व गर्म भोजन मिल सके एवं प्रदेश की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाया जा सके। इस उद्देश्य से राज्य सरकार ने आंगनबाडिय़ों पर पूरक पोषण आहार प्रदाय की व्यवस्था ठेकेदारों से छीनकर ‘महिला स्व-सहायता समूहों’ को सौंपी थी। लेकिन मासूमों के पोषण आहार के नाम पर करोड़ों रुपये कमाने वाले पुराने ठेकेदारों ने सरकार की इस नर्ई व्यवस्था में सेंध लगाकर यह काम अपने कब्जे में कर लिया है। जिले की अधिकांश आंगनबाडिय़ों पर पोषण आहार व्यवस्था का कागजों में संचालन तो स्व सहायता समूहों के माध्यम से ही हो रहा है, लेकिन धरातल पर यह ठेकेदारों के हाथ में है। 

बच्चों को न मिल पा रहा पोषण, न ही महिलाओं का सशक्तिकरण

अरबों रुपये खर्च करने के बाद भी मप्र में कुपोषण के आंकड़ों से चिंतित राज्य सरकार ने आंगनबाडिय़ों पर पोषण आहार व्यवस्था में बदलाव किया था। निर्धन बस्तियों में निवासरत महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर भी बन सकें और आंगनबाड़ी में बच्चों को ताजा व गर्म भोजन भी मिल सके। इसलिए सरकार ने बस्तियों में निवासरत महिलाओं के स्व-सहायता समूह बनवाए। समूहों को दलिया व खिचड़ी के पैकेट (टेक हॉम राशन) के अलावा अधिकतम 10 आंगनबाडिय़ों में बच्चों की संख्या के अनुपात में सुबह का नास्ता और गर्म भोजन पहुंचाने की जिम्मेदारी सौंपी गई। यह नाश्ता-भोजन समूह की महिलाओं को ही तैयार कर पहुंचाना था। इसके लिए सरकार समूहों को कम ब्याजदार पर ऋण, अनुदान के अलावा पोषण आहार सामग्री, पकाने का खर्च एवं परिवहन तक के खर्च की राशि जोडक़र भुगतान करती है। 

ठेेकेदार इस तरह कर रहे चालाकी 

करीब एक दशक पहले तक पूरक पोषण आहार की जिम्मेदारी संभालते रहे आधा दर्जन ठेकेदारों ने ग्वालियर शहरी क्षेत्र में अलग-अलग नामों से समूह तैयार किए। जबकि कुछ समूहों को इन्हीं ठेकेदारों को मासिक कमीशन के आधार पर ठेके पर संचालित किया जा रहा है। ग्वालियर शहरी क्षेत्र की 5 परियोजनाओं में कुल 598 आंगनबाडिय़ां, जिनमें 6 माह से 3 वर्ष एवं 3 से 6 वर्ष उम्र के बच्चों की संख्या लगभग एक लाख दर्ज है। ठेकेदार अपने पुराने ठिकानों पर एक साथ भोजन तैयार कर ऑटो या ई-रिक्शा से आंगनबाडिय़ों पर भेज रहे हैं। इस पोषण आहार का भुगतान तो स्व-सहायता समूहों के खातों में ही होता है, लेकिन राशि ठेकेदार द्वारा निकाली जाती है। सूत्रों का कहना है कि इसके बदले में ठेेकेदार समूह से जुड़ी महिलाओं को 15-20 हजार रुपये हर माह देता है।   

भोजन से 50 गुना अधिक भुगतान क्यों? 

आंगनबाडिय़ों पर गर्म नाश्ता और भोजन के नाम पर खिचड़ी और दलिया दिए जा रहे हैं। प्रतिदिन मीनू के हिसाब से एक भी दिन भोजन नहीं दिया जा रहा हैै। इसकी गुणवत्ता भी पोषण और स्वाद रहित होती है। आंगनबाडिय़ों पर पहुंचने वाले बच्चों की संख्या भी कई पर शून्य तो कुछ पर अधिकतम 10 तक ही होती है, लेकिन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के दबाव और ठेकेदार के प्रभाव में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता उपस्थित बच्चों की संख्या सौ से दो सौ तक दर्ज कर रही हैं। उपस्थिति के अनुसार समूहों के खातों में राशि का भुगतान भोजन की मात्रा के अनुपात में 50 गुना तक अधिक किया जा रहा है। 

दाल-मटर की सब्जी की जगह दलिया

विभागीय मीनू के अनुसार शनिवार को आंगनबाडिय़ों में नाश्ते में पौष्टिक खिचड़ी एवं भोजन में रोटी, मूंगदाल, हरे अथवा सूखे मटर की सब्जी पहुंचनी थी। लेकिन अधिकांश आंगनबाडिय़ों पर नाश्ता-भोजन पहुंचा ही नहीं, जबकि कुछ पर एक साथ सिर्फ खिचड़ी और दलिया ही पहुंचा।