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मध्यप्रदेश

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महेश सहित भाजपा के तीनों प्रत्याशी विजयी घोषित,रिटर्निंग अधिकारी ने सौपे निर्विरोध जीत के प्रमाण पत्र, मीनाक्षी की याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई आज

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भोपाल। मध्यप्रदेश की तीनों राज्यसभा सीटों पर भाजपा के तीनों प्रत्याशियों तरुण चुग, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट को निर्वाचन आयोग ने गुरूवार को निर्विरोध विजयी घोषित कर,जीत का प्रमाण पत्र भी दे दिया। उधर रिटर्निंग अधिकारी द्वारा नामांकन निरस्त किए जाने के विरोध में कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन की याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई शुक्रवार को होगी। भारत निर्वाचन आयोग में की गई अपील पर निर्णय गुरूवार को भी नहीं लिया जा सका। 

उल्लेखनीय है राज्यसभा निर्वाचन प्रक्रिया में नामवापसी की अंतिम तारीख  11 जून तय थी। तीसरी राज्यसभा सीट के लिए कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन फार्म अपराधिक प्रकरण की जानकारी छुपाने के चलते रिटर्निंग अधिकारी द्वारा 9 जून को निरस्त कर दिया गया था। इसके बाद कांग्रेस पार्टी के प्रतिनिधिमंडल की ओर से 10 जून को निर्वाचन आयोग में अपील और सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई। आयेाग ने 11 जून तक निर्णय नहीं लिया। जबकि सर्वोच्च न्यायालय ने याचिका की सुनवाई शुक्रवार, 12 जून तक के लिए टाल दी थी। आयोग और उच्चतम न्यायालय से निर्णय नहीं होने की स्थिति में और तीनों ही सीटों पर कोई दूसरा प्रत्याशी नहीं होने के कारण निर्वाचन आयोग ने भाजपा के तीनों ही प्रत्याशियों को जीता घोषित कर दिया तथा मप्र विधानसभा में रिटर्निंग अधिकारी ने तीनों ही प्रत्याशियों को जीत का प्रमाण पत्र सौंप दिया। इस प्रकरण पर आगे की रणनीति को लेकर कांग्रेस के दिल्ली मुख्यालय में गुरूवार को बैठक भी हुई। मप्र के कांग्रेस विधायक दल ने राष्ट्रपति से भी मिलने का समय मांगा। 

दरअसल, तीसरी सीट के लिए कांग्रेस ने मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बनाया था। कांग्रेस के पास संख्या बल भी था, लेकिन 9 जून को नटराजन का नामांकन फॉर्म निरस्त कर दिया गया था। इसके खिलाफ बुधवार दोपहर करीब 12 बजे कांग्रेस के 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने दिल्ली में निर्वाचन आयोग से मुलाकात की थी। कांग्रेस की शिकायत पर आयोग की तरफ से कोई बयान नहीं आया था।

कांग्रेस ने न्यायालय से की परिणामों पर रोक की मांग 

सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान कांग्रेस के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने नाप वापसी की अंतिम तारीख का हवाला देते हुए गुरूवार को ही सुनवाई की मांग की। लेकिन निर्वाचन आयोग ने न्यायालय में याचिका की कॉपी नहीं मिलने की बात कहते हुए जवाब देने के लिए अधिक समय की मांग की। सिंघवी ने कहा कि अगर सुनवाई अगले दिन भी हो, तो सुनवाई होने तक चुनाव परिणाम घोषित नहीं किया जाए। न्यायालय ने कहा कि ऐसे मामलों में कानून पहले से स्पष्ट है और याचिका को अगले दिन सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया। सुनवाई टलने के बाद कांग्रेस ने फिर मांग की कि न्यायालय के फैसले तक चुनाव परिणाम घोषित न किए जाएं। कांग्रेस ने यह याचिका बुधवार और गुरुवार की रात 1.48 बजे ऑनलाइन दाखिल की थी। याचिका में आरोप लगाया गया है कि रिटर्निंग अधिकारी ने नामांकन रद्द करने का फैसला गैरकानूनी, मनमाने और पक्षपातपूर्ण तरीके से लिया है।  कांग्रेस ने न्यायालय से इस फैसले को रद्द करने की मांग की थी। 

कल ही निर्णय दे सकते थे चुनाव आयुक्त: सिंघार 

सर्वोच्च न्यायालय में याचिका पर सुनवाई टलने के बाद मप्र विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि कांग्रेस को सर्वोच्च न्यायालय जाना पड़ा। चुनाव आयुक्त चाहते तो बुधवार को ही इस बारे में निर्णय दे सकते थे। खारिज करना या स्वीकार करना, यह विशेष अधिकार चुनाव आयोग को है। हरियाणा में चुनाव आयोग ने हस्तक्षेप किया था, गुजरात में हस्तक्षेप किया था तो मप्र में क्यों नहीं किया? ट्वीट कर लिखा, ‘सर्वोच्च न्यायालय ने कल का समय दिया है। मैं समझता हूं कि इसमें न्याय होगा लेकिन न्याय में इतनी देरी क्यों हो रही है? सर्वोच्च न्यायालय इस पर निर्णय आज करता तो बेहतर होता क्योंकि आज नामांकन वापसी की आखिरी तारीख है।’

अब न्यायालय के फैसले पर टिकी निगाहें 

भाजपा के तीनों प्रत्याशी राज्यसभा के लिए विजयी घोषित हो चुके हैं। लेकिन फिर भी सभी की निगाहें तीसरी सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन के नामांकन को लेकर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले पर टिकी हैं। सर्वोच्च न्यायालय याचिका निरस्त करता है तो भाजपा के तीनों प्रत्याशी निर्विरोध विजयी माने जाएंगे। लेकिन यदि फैसला मीनाक्षी नटराजन के पक्ष में आता है तो भाजपा प्रत्याशी महेश केवट का निर्वाचन निरस्त होकर इस सीट पर निर्वाचन हो सकता है।