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ट्रांसफर के नाम पर हो रही वसूली
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तीसरे दिन विधानसभा में पेश हुए चार विधेयक, विपक्ष का आरोप
भोपाल। मप्र विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन बुधवार को विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर की अनुमति से सदन में चार विधेयक पेश किए गए। इसमें उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने एक और वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने तीन विधेयक पटल पर रखे।
अनूपूरक बजट पर चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायक ओमकार सिंह मरकाम ने आरोप लगाया कि मप्र में ट्रांसफर के नाम पर वसूली की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि सत्ताधारी दल के विधायकों को 15-15 करोड़ रुपए की राशि दी जा रही, जबकि विपक्षी विधायकों को विकास के लिए राशि नहीं दे रहे हैं।
इससे पहले कांग्रेस विधायक लखन घनघोरिया ने कहा कि पहले सडक़ें बनती थीं तो कम से कम एक बारिश में कोई दिक्कत नहीं होती थी। अब 40 दिन में सडक़ें उखड़ रही हैं। जबलपुर की सडक़ों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि 56 करोड़ की सडक़ इसी बारिश में बह गई। अधिकारी दिखावे की कार्रवाई करते हैं।
संस्कृत में पढ़ा संस्कृत भाषा के संरक्षण का ध्यानाकर्षण
भाजपा विधायक डॉ. अभिलाष पांडे ने मध्य प्रदेश में संस्कृत भाषा के संरक्षण और संवर्धन के लिए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पेश किया। उन्होंने अध्यक्ष की अनुमति से प्रस्ताव संस्कृत में पढ़ा। हालांकि मंत्री उदयप्रताप ने इस प्रस्ताव के लिए उनका आभार संस्कृत में लिखे शब्दों को पढक़र जताया। बाद में उन्होंने हिन्दी में ही उत्तर दिया। मंत्री ने बताया कि संस्कृत भाषा के विद्यालयों के नियमन एवं संस्कृत संवर्धन हेतु महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान प्रदेश में क्रियाशील हैं। संस्थान के माध्यम से संस्कृत भाषा के विकास के लिए 271 संस्कृत माध्यम के विद्यालय संचालित हैं। जिसमें पूर्व मध्यमा तथा उत्तर मध्यमा (कक्षा 10वीं और 12वीं के समकक्ष) स्तर की परीक्षाएं आयोजित की जाती हैं। राज्य स्तरीय शासकीय आवासीय संस्कृत कन्या विद्यालय भोपाल में संचालित हैं। इसके अतिरिक्त संस्थान द्वारा चार आदर्श आवासीय संस्कृत विद्यालय दतिया, सिरोंज, डिण्डोरी और रतलाम में संचालित किए जा रहे हैं। सामान्य विद्यालयों में त्रिभाषा फार्मूले के तहत कक्षा 10वीं तक संस्कृत भाषा की उपादेयता सर्वविदित है।वर्तमान में हिन्दी, अंग्रेजी एवं संस्कृत तीनों भाषाओं को समअंकीय रखा गया है अर्थात उनके लिए परीक्षा में पूर्णांक समान रूप से निर्धारित हैं।
सचिन यादव ने उठाया महेश्वर जल विद्युत परियोजना का मुद्दा
विधायक सचिन यादव ने ध्यानाकर्षण के माध्यम से खरगौन जिले की महेश्वर जल विद्युत परियोजना का काम ठप होने से निर्माण को लेकर व्यय की गई लाखों-करोड़ों रुपये की धनराशि का सदुपयोग नहीं होने की बात उठाई। मंत्री प्रद्युम्न तोमर ने उत्तर में कहा कि 10 वाय 4 मेगावॉट महेश्वर जल विद्युत परियोजना की परिकल्पना नर्मदाघाटी विकास प्राधिकरण द्वारा की गई थी तािा परियोजना को वर्ष 1992 में निजी क्षेत्र की कंपनी मेसर्स श्री महेश्वर हायडल पावर कार्पोरेशन लिमिटेड द्वारा उपलब्ध कराई गई थी। तथा मप्र विद्युत मंडल द्वारा पुनर्वास गतिविधियों में समन्वयक का काम कार्य किया जाना था। उन्होंने बताया कि विद्युत परियोजना का क्रियान्वयन स्थगित होने एवं वैधानिक कार्यवाही प्रक्रियाधीन होने के परिप्रेक्ष्य में प्रश्नाधीन क्षेत्र में किसी प्रकार की पुनर्वास/विकास की गतिविधि नहीं की जा रही है।
प्रश्रकाल में विधायकों के आरोप
- सतीश सिकरवार और सोहनलाल बाल्मीक द्वारा प्रश्नकाल में उठाए गए शासकीय भूमि पर गरीबों को पट्टे के मुद्दे पर पूर्व मुख्मयंत्री कमलनाथ ने प्रस्ताव दिया कि डब्ल्यूसीएल और एसईसीएल जैसी खनन कंपनियों की जिस लीज भूमि पर खनन बंद हो चुका है, उनकी लीज समाप्त कर उस भूमि पर गरीबों को पट्टे देना चाहिए। मंत्री वर्मा ने बताया कि लीज आवंटन केन्द्र सरकार से हुआ है। वहीं मंत्री प्रहलाद पटेल ने कहा कि जब लीज राज्य सरकार को ट्रांसफर होती है या वापस होती है तो वह वृक्षारोपण के लिए या फिलिंग के लिए होती है। अध्यक्ष श्री तोमर ने बताया कि राजस्व विभाग ने केन्द्र सरकार को पत्र लिखकर लीज समाप्ति का आग्रह किया है। वहीं श्री सिकरवार की मांग का भी निराकरण कारने की बात उन्होंने कही।
- कांग्रेस विधायक बाबू जंडेल ने कहा कि उन्होंने विधानसभा में प्रश्न के माध्यम से अनुसूचित जाति की शासकीय पट्टों की 15 सालों की जानकारी मांगी, उन्हें 5 साल की ही दी गई।
-विधायक विक्रम सिंह ने सतना जिले के जिन ग्रामों में राजस्व नक्शा नहीं हैं, उनकी जानकारी मांगी। उत्तर में मंत्री विक्रम वर्मा ने कहा कि 90 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है, सत्यापन होना शेष है। इसी प्रश्न के उत्तर में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा-सरकार गरीबों को पट्टे नहीं दे रही। छह सालों से क्या सिर्फ ड्रोन सर्वे ही हो रहा है।
- विधायक सुरेश राजे ने हरसी, ककेटो, पहसारी नहरों और बांधों के रख-रखाव पर खर्च राशि और कमों की जानकारी मांगी।
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