राजनीति

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दिग्विजय-पटवारी विवाद में प्रदेश प्रभारी मौन, कांग्रेस में भारी गुटबाजी के बीच कौन बैठाए समन्वय

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भोपाल। मप्र में सत्ता के लिए 23 सालों से संघर्ष कर रही कांग्रेस में हर स्तर पर गुटबाजी प्रभावी है। जिलों में कार्यकारिणी घोषित होते ही बगावत और इस्तीफे नजर आए तो वहीं प्रदेश में प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी के लिए टांग-खिचाई चल रही है। पार्टी के केन्द्रीय और प्रदेश नेतृत्व के बीच सेतु एवं स्थानीय नेता-पदाधिकारियों के बीच समन्वय के लिए केन्द्रीय नेतृत्व द्वारा नियुक्त प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी इस गुटबाजी पर पूरी तरह मौन नजर आ रहे हैं। 

उल्लेखनीय है कि सप्ताहभर पहले कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी द्वारा मुख्यमंत्री पर लगाए गए आरोपों का दिग्विजय सिंह ने मीडिया के सामने खंडन किया और पटवारी को अप्रत्यक्ष रूप से दलाल और ब्लैकमेलर भी कहा। दिग्विजय द्वारा पटवारी के आरोपों के खंडन से मप्र सहित देशभर की राजनीति में कांग्रेस की गुटबाजी की चर्चा तेज हो गई। लेकिन इस मामले में अब तक कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी का न तो एक भी बयान ही सामने आया है और न ही दोनों नेताओं के बीच सुलह और समन्वय के प्रयास ही नजर आए हैं। खास बात यह है कि श्री चौधरी न केवल भोपाल में उपस्थित हैं, बल्कि वे लगातार पार्टी की बैठकें भी ले रहे हैं। आगामी निकाय चुनाव को लेकर भी तीन दिन पहले उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक की थी। लेकिन वे दिग्विजय ङ्क्षसह और जीतू पटवारी की संयुक्त पत्रकारवार्ता में उपस्थित नहीं रहे। 

दिग्विजय से बंगले पर मिले उमंग 

प्रदेश अध्यक्ष जीतू से विवाद के बीच बुधवार को पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह से मिलने नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार उनके बंगले पर पहुंचे। बाहर खड़े उमंग सिंघार को लेने दिग्विजय सिंह स्वयं बाहर आए। इसके बाद बंद कमरे में दोनों नेताओं ने चर्चा की। हालांकि दोनों ही नेताओं ने यह साफ नहीं किया कि उनकी क्या चर्चा हुई। लेकिन दोनों नेताओं की मुलाकात ने राजनीतिक कयासों पर चर्चा तेज कर दी।   

दिग्विजय को कुर्सी से उठा चुके जीतू

विगत 9 जून को राज्यसभा प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने के बाद कांग्रेस द्वारा बुलाई गई पत्रकारवार्ता में भी प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी द्वारा दिग्विजय सिंह को कुर्सी से उठाने का वीडियो वायरल हुआ था। वीडियो में नजर आ रहा है कि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी दिग्विजय ङ्क्षसह से कुर्सी बदलने की बात कहते सुनाई दिए हैं। उन्होंने दिग्विजय से कहा कि ऐसा कर लो तो हरीश चौधरी भी आ जाएंगे। इसके बाद दिग्विजय सिंह दूसरी कुर्सी पर चले जाते हैं। वीडियो सामने आने के बाद भाजपा ने इसे कांग्रेस में वर्चस्व और कुर्सी की लड़ाई बताया था। 

दिग्विजय को ‘स्लीपर सेल’ कहना कांग्रेस का आंतरिक कलह

जीतू-दिग्विजय विवाद के बीच बैठक में पार्टी के दो नेताओं द्वारा दिग्विजय सिंह को स्लीपर सेल कहे जाने पर प्रतिक्रिया में मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि यह कांग्रेस पार्टी की आंतरिक कलह का प्रत्यक्ष प्रमाण है। कांग्रेस की गुटबाजी अब उनके कार्यालयों से निकलकर सडक़ों पर दिखने लगी है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ही पार्टी की आंतरिक कलह और गुटबाजी पर खुलकर बोलने लगे हैं। धड़ों  और गुटों में बंटी कांग्रेस का जनता के मुद्दों से कोई सरोकार नहीं है। कांग्रेस अपनी पार्टी की आंतरिक कलह को छिपाने और जनता का ध्यान भटकाने के लिए मीडिया की सुर्खियों में बने रहना चाहते हैं।