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यूसीसी की राज्य स्तरीय समिति ने बुलाई सर्वदलीय बैठक, कांग्रेस, बसपा, आप से नहीं पहुंचे प्रतिनिधि, सपा को आमंत्रण नहीं

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भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान लाए जा रहे समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक से पहले यूसीसी प्रारूप तैयार करने के लिए बनी राज्य स्तरीय समिति ने अंतिम सुझावों के लिए सोमवार को प्रशासन अकादमी में सर्वदलीय बैठक बुलाई। बैठक में आमंत्रित भाजपा और सीपीएम के पदाधिकारी ही पहुंचे। जबकि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, बहुजन समाज पार्टी, आम आदमी पार्टी के प्रतिनिधि पहुंचे नहीं और सपा की ओर से कहा गया कि उन्हें बैठक की सूचना नहीं दी गई। 

बैठक में भाजपा की ओर से पहुंचे प्रदेश महामंत्री राहुल कोठारी और पार्टी के निर्वाचन आयोग समन्वय विभाग के प्रदेश संयोजक एस.एस. उप्पल ने लिखित में समिति को कई महत्वपूर्ण सुझाव सौंपे। इनमें समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के मुख्य उद्देश्य अर्थात सभी नागरिकों के व्यक्तिगत कानूनों (विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेना आदि) में एकरूपता लाने से संबंधित थे। 

सीपीआई ने किया मप्र में यूसीसी का विरोध 

कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया के राज्य प्रतिनिधि सदस्य पीवी रामचंद्रन ने बैठक में मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू किए जाने के फैसले का विरोध किया। उन्होंने कहा कि जिस समय देश और प्रदेश में बेरोजगारी, भुखमरी और महंगाई जैसी गंभीर समस्याएं आम लोगों को परेशान कर रही हैं। ऐसे समय में समान नागरिक संहिता लागू करने की तैयारी की जा रही है। रामचंद्रन ने आरोप लगाया कि यह व्यवस्था जनजातीय वर्ग और अन्य वर्गों को परेशान करने वाली है, इसलिए इसे किसी भी कीमत पर लागू नहीं किया जाना चाहिए।

समिति ने आयोगों और विभागों से भी लिए सुझाव 

समान नागरिक संहिता (यूसीसी) की राज्य स्तरीय प्रारूप समिति ने सोमवार को प्रशासन अकादमी में राजनीतिक दलों के अलावा अन्य बैठकें भी की। दिल्ली में आवश्यक बैठक में उपस्थिति के चलते समिति की अध्यक्ष और सर्वोच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई बैठक में उपस्थित नहीं रह सकीं। उनकी अनुपस्थिति में समिति के अन्य सदस्य शत्रुघ्न सिंह, सेवानिवृत्त आईएएस और पूर्व मुख्य सचिव, बुद्ध सिंह, गोपाल शर्मा, अनूप नायर, और शोभा पैठणकर ने समिति के सदस्य सचिव अजय कटेसरिया के साथ मिलकर अलग-अलग चार सत्रों में विभिन्न पक्षों से महत्वपूर्ण सुझाव लिए। बैठक के पहले सत्र में मध्य प्रदेश के विभिन्न आयोगों, जिनमें महिला आयोग, मानव अधिकार आयोग, बाल संरक्षण अधिकार आयोग और पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्षों, सदस्यों और सचिवों से सुझाव लिए। इसके बाद मध्य प्रदेश के अलग-अलग सरकारी विभागों ने भी प्रेजेंटेशन के माध्यम से अपने-अपने प्रस्ताव समिति के सामने रखे।

‘हमारे दल के प्रतिनिधिमंडल बैठक में शामिल हुआ और यूसीसी को लेकर दल की सोच के बारे में विस्तार से पक्ष रखा। कांग्रेस क्यों नहीं पहुंची, यह तो उन्हीं के नेता बता सकते हैं। लेकिन मेरा मानना है कि किसी विषय को लेकर पक्ष में है अथवा विरोध में हैं, हर दल की नीति स्पष्ट होनी चाहिए।’

हेमंत खण्डेलवाल

प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा, मप्र 

‘यूसीसी के नीति निर्धारकों के सिद्यांतों पर हमें विश्वास नहीं है। इसलिए कांग्रेस पार्टी की ओर से कोई प्रतिनिधि यूसीसी कमेटी द्वारा बुलाई गई राजनीतिक दलों की बैठक में नहीं पहुंचा।’

मुकेश नायक

अध्यक्ष-मीडिया विभाग, मप्र कांग्रेस कमेटी