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परिवहन आरक्षक सौरभ शर्मा का ईडी प्रकरण में संवेदनाओं के आधार पर जमानत का प्रयास, डेढ़ साल में चालान पेश नहीं कर सकी लोकायुक्त
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- पहले दिन से ही संदेह के घेरे में रही है लोकायुक्त की कार्रवाई
भोपाल। सौ करोड़ से अधिक की संपत्ति के मालिक परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा के भोपाल स्थित ठिकानों पर लोकायुक्त के छापों को डेढ़ साल से ज्यादा समय हो चुका है। प्रकरण में महीने भर बाद संज्ञान लेने वाले प्रवर्तन निदेशालय ने तीन महीने में चालान पेश कर दिया था। लेकिन नकदी, सोना-चांदी सहित कई संपत्तियों के दस्तावेज जब्त करने वाली भोपाल लोकायुक्त की टीम इस मामले में अब तक न्यायालय में आरोप पत्र पेश नहीं कर सकी है।
उल्लेखनीय है कि लोकायुक्त की कार्रवाई के दौरान करोड़ों की संपत्ति मिलने और इसी दिन लोकायुक्त की कार्रवाई के बीच से 52 किलो सोना और 11 करोड़ नकदी लेकर निकली कार को आयकर विभाग की टीम द्वारा जब्त किए जाने के एक महीने बाद प्रवर्तन निदेशालय, भोपाल की टीम ने इस मामले में भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर स्थित ठिकानों पर कार्रवाई की थी तथा धनशोधन निवारण अधिनियम की धाराओं में प्रकरण दर्ज किया था।
ईडी की एफआईआर में परिजन-रिस्तेदार भी आरोपी
लोकायुक्त की कार्रवाई शुरू से ही संदेह के घेरे में रही। जिन ठिकानों पर लोकायुक्त की टीमें कार्रवाई कर रही थीं। उन्हीं ठिकानों से करोड़ों रुपये नकदी और सोना निकल जाने पर कार्रवाई पर सवाल खड़े हुए। दो दिन की कार्रवाई के बाद भी लोकायुक्त टीम आरोपी सौरभ और चेतन के ठिकानों से मिलीं अचल संपत्तियों की संख्या तक छुपाए रही। खास बात यह है कि लोकायुक्त टीम ने इस प्र्रकरण में केवल सौरभ, उसके दोस्त चेतन गौर और शरद जायसवाल को ही आरोपी बनाकर गिरफ्तार किया था। जबकि प्रवर्तन निदेशालय ने प्रकरण में सौरभ की माँ श्रीमती उमा शर्मा, पत्नी श्रीमती दिव्या तिवारी और मौसेरे जीजा विनय हासवानी सहित सौरभ व परिजनों से जुड़ी कंपनी व पदाधिकारियों को भी आरोपी बनाया।
लोकायुक्त प्रकरण में जमानत, ईडी में नहीं
सौरभ के ठिकानों पर लोकायुक्त की कार्रवाई को डेढ़ साल पूरे हो चुके हैं। लोकायुक्त टीम अब तक न्यायालय में आरोप पत्र पेश नहीं कर सकी है। जबकि महीनेभर बाद कार्रवाई करने वाली प्रवर्तन निदेशालय की टीम 8 अप्रैल 2025 को न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल कर चुकी है। खास बात यह है कि लोकायुक्त प्रकरण में तीनों ही आरोपी सौरभ, चेतन और शरद को आरोप पत्र में देरी के चलते भोपाल जिला न्यायालय से जमानत मिल चुकी है। लेकिन प्रवर्तन निदेशालय प्रकरण में तीनों आरोपियों की जमानत उच्च न्यायालय से भी निरस्त हो चुकी है। हालांकि परिजनों और कंपनियों को भोपाल जिला न्यायालय ने 50-50 लाख के मुचलके पर जमानत दे दी है।
चेतन की तरह सौरभ की जमानत के प्रयास
सौरभ के साथी चेतन गौर को उसकी पत्नी के जुड़वां नवजात बच्चों और पत्नी की देखभाल को आधार पर सालभर पहले दो बार 7-7 दिन का पैरोल मिल चुका है। इसी आधार पर सौरभ के परिजन भी उसकी पत्नी दिव्या तिवारी की बीमारी को आधार बनाकर ईडी प्रकरण में उसकी अस्थायी जमानत के लिए प्रयासरत हैं। करीब दो सप्ताह पूर्व जबलपुर उच्च न्यायालय में सुनवाई के बाद न्यायालय ने फैसला सुरक्षित रखा है।
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