राजधानी

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विधानसभा सत्र में नीट और राज्यसभा निर्वाचन मुददे पर भिड़ेगा विपक्ष, समान नागरिक संहिता पर होगा सरकार का फोकस

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भोपाल। आगामी 20 जुलाई से शुरू होने जा रहे मप्र विधानसभा के पांच दिवसीय मानसून सत्र में विपक्षी कांग्रेस विधायक दल सरकार को घेरने के लिए नीट परीक्षा और राज्यसभा निर्वाचन में गड़बड़ी का मुद्दा विशेष रूप से उठाने वाला है। जबकि राज्य सरकार का पूरा फोकस ‘समान नागरिक संहिता’ (यूसीसी) विधेयक और अनुपूरक बजट पर होगा। सदन में विपक्ष द्वारा यूसीसी के खुले और जोरदार विरोध की संभावना कम ही है, हालांकि अल्पसंख्यक समुदाय के दोनों विधायक इसे जोरशोर से उठाने का प्रयास कर सकते हैं। 

उल्लेखनीय है कि हाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया कि आगामी मानसून सत्र में ‘समान नागरिक संहिता’ विधेयक लाने वाली है और महाकाल की कृपा से इसे पास भी करा लिया जाएगा। संकेत साफ हैं कि हर साल में 25 जुलाई तक मप्र विधानसभा से यूसीसी विधेयक पास हो जाएगा। कांग्रेस पार्टी में राष्ट्रीय स्तर से इस कानून के विरोध के बावजूद मप्र में विपक्षी कांग्रेस विधायक इसका जोरदार विरोध करेंगे, इसकी संभावना कम ही है। हालांकि अल्पसंख्यक पक्ष के दोनों विधायक जरूर इस मुद्दे पर विधानसभा में जोरशोर से अपनी बात रखेंगे। 

क्यों बदल रही कांग्रेस के विरोध की दिशा

‘समान नागरिक संहिता’ का राष्ट्रीय स्तर पर विरोध कर रही कांग्रेस, मप्र विधानसभा में भी इसके विरोध में ही दिखाई देगी। हालांकि विरोध का स्वर मजबूत होगा इसकी संभावना कम ही है। सत्र के लिए कांग्रेस की तैयारियां बताती हैं कि नीट परीक्षा, राज्यसभा प्रत्याशी का नामांकन निरस्त किए जाने के विरोध, प्रदेश में युवा, किसान, बेरोजगार सहित अन्य मुद्दों को जोरशोर से उठाया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि संप्रदाय विशेष के पक्ष में खुले समर्थन से पार्टी को हो रहे नुकसान के चलते कांग्रेस ने विधानसभा सत्र के लिए यूसीसी के स्थान पर अपने प्रमुख मुद्दा नीट परीक्षा को बनाया है। 

विधेयक का प्रारूप तैयार, जनता से ली जा रही राय 

मध्यप्रदेश में ‘समान नागरिक संहिता’ से संबंधित विधेयक को लेकर सर्वोच्च न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली समिति ने इसका प्रारंभिक ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। इस प्रारूप को लेकर प्रदेश की जनता से राय जानने और जनसमर्थन जुटाने के लिए ऑनलाइन फार्म के माध्यम से सुझाव मांगे जा रहे हैं।  इस प्रस्तावित कानून में विवाह, तलाक, भरण-पोषण, संपत्ति के अधिकार और लिव-इन संबांधों से जुड़े नियमों को कानूनी परिधि में लाने की तैयारी है। इसका मुख्य उद्देश्य भारत में रहने वाले हर नागरिक के लिए धर्म, जाति या लिंग से हटकर विवाह, तलाक, बच्चा गोद लेने और संपत्ति के बंटवारे जैसे मामलों में एक समान कानून लागू करना। इससे अलग-अलग पर्सनल लॉ के कारण पैदा होने वाली न्यायालयीन और कानूनी जटिलताओं को भी समाप्त किया जा सकेगा। उत्तराखंड, गुजरात और असम के बाद मप्र इसे लागू करने वाला चौथा राज्य होगा। 

जनजातियों को छूट से कमजोर होगा कांग्रेस का विरोध 

समान नागरिक संहिता के प्रारूप में प्रदेश की अनुसूचित जनजातीयों को छूट दी गई है। जनजातीय समाज अपनी संस्कृति, परांपराओं और मान्यताओं के आधार पर यूसीसी कानून की परिधि से बाहर रहेगा। जनजातियों को यूसीसी में यही छूट कांगे्रस के गले की हड्डी बनी है, क्योंकि यही कांग्रेस के विरोध का सबसे बड़ा मुद्दा भी हो सकता था। 

कानून लागू होने पर क्या होगा

हर जाति, वर्ग, धर्म-संप्रदाय के व्यक्ति के लिए विवाह और तलाक का पंजीयन जरूरी होगा और बहुविवाह पर रोक रहेगी। लिव इन संबंध कानूनी परिधि में आ जाएंगे और लिव-इन संबंधों से पैदा हुए बच्चों को पूरी कानूनी मान्यता मिलेगी। महिलाओं को संपत्ति में बराबरी का अधिकार होगा तथा जबरदस्ती विवाह नहीं किया जा सकेगा।  राज्य की अनुसूचित जनजातियां इस कानून की परिधि से बाहर रहेंगी, ताकि उनकी परंपराओं और संस्कृति पर असर न पड़े।