राजनीति

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राज्यसभा नामांकन मामले में ठंडी पड़ी कांग्रेस, दिल्ली में आंदोलन, भोपाल में बयानबाजी तक सीमित रहे नेता

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भोपाल। मध्यप्रदेश से राज्यसभा की तीसरी सीट गवांने के बाद मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी और प्रदेश के वरिष्ठ नेता अब पूरी तरह मौन और ठंडे नजर आ रहे हैं। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार इस मुद्दे को एक बार फिर से विधानसभा में उठाने की तैयारी में हैं, वहीं प्रदेश कांग्रेस कमेटी इस मुद्दे पर आगे बढऩे के मूड़ में नजर नहीं आ रही है। 

उल्लेखनीय है कि कांग्रेस की राज्यसभा प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन द्वारा अपराधिक प्रकरण की जानकारी छुपाने के संबंध में भाजपा प्रत्याशी की ओर से की गई शिकायत के बाद भारत निर्वाचन आयोग द्वारा नियुक्त रिटर्निंग अधिकारी, मप्र विधानसभा के प्रमुख सचिव ने सुश्री नटराजन का नामांकन निरस्त कर दिया था। कांग्रेस पार्टी का राष्ट्रीय नेतृत्व इसके विरोध में निर्वाचन आयोग और सर्वोच्च न्यायालय तक गया, लेकिन राहत नहीं मिल सकी। इसके बाद नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में मप्र के सभी कांग्रेसी विधायक और पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेता राष्ट्रपति से मिलने पहुंचे थे। लेकिन अनुमति नहीं मिल सकी थी। लेकिन मप्र में अब तक इस मुद्दे पर कांग्रेस का कोई बड़ा आंदोलन नजर नहीं आया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और दोनों पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और कमलनाथ ने भी स्वयं को सिर्फ भाजपा और संवैधानिक संस्थाओं के विरुद्ध बयानवाजी और ‘एक्स’ पर प्रतिक्रिया तक सीमित रखा। सप्ताहभर पहले कांग्रेस के तीनों प्रत्याशियों को जीत का प्रमाण पत्र मिल चुका है। इस मामले में भाजपा अपने प्रत्याशियों के साथ एकजुट दिखी, लेकिन कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन के समर्थन में पार्टी के नेता सिर्फ बयानबाजी तक ही सीमित नजर आए। कांगे्रसी नेताओं की इस उदासीनता ने भाजपा के उन दावों को मजबूती दी, जिसमें कहा गया था कि मीनाक्षी को राज्यसभा नहीं जाने देने के  पीछे कांग्रेस के ही कुछ वरिष्ठ नेताओं का हाथ रहा। 

औपचारिक नजर आ रहे संगठनों के प्रदर्शन 

मीनाक्षी नटराजन के नामांकन मामले में प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने पार्टी के बैनर पर कोई भी बड़ा आंदोलन नहीं किया है। लेकिन भाराछासं, युवा कांग्रेस और महिला कांग्रेस को प्रदर्शन के निर्देश दिए हैं। विगत दिनों युवा कांग्रेस का प्रदर्शन पूरी तरह औपचारिक नजर आया। गुरूवार 18 जून को महिला कांग्रेस ने राजधानी भोपाल में कांग्रेस कार्यालय से रैली के रूप में पहुंचकर कलेक्टर कार्यालय के घेराव की घोषणा की है। हालांकि जारी सूचना में उन्होंने इस आंदोलन की जानकारी तो दी है, लेकिन इस प्रदर्शन के उद्देश्य का उल्लेख नहीं किया। इस तरह कांग्रेस के युवा, महिला और छात्र संगठनों के आंदोलन कहीं से भी राज्यसभा प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन के समर्थन में नजर नहीं आ रहे हैं। 

मीनाक्षी के लिए दिखी अकेले नेता प्रतिपक्ष की ताकत 

मीनाक्षी नटराजन मामले में भी कांग्रेस पूरी तरह बिखरी-बिखरी ही नजर आई। दिग्विजय सिंह और कमलनाथ सहित दूसरे वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी प्रत्याशी सुश्री नटराजन के समर्थन के दावे तो किए। लेकिन नटराजन के समर्थन में हुई विधायकों या वरिष्ठ नेताओं की किसी भी बैठक में कमलनाथ नहीं पहुंचे। नामांकन से पहले हुई कांग्रेस विधायक दल की बैठक में भी कमलनाथ सहित पांच विधायक नहीं पहुंचे थे। हालांकि मीनाक्षी को राज्यसभा पहुंचाने के लिए नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने अपनी पूरी ताकत झोंकी। पार्टी में कट्टर विरोधी गुट माने जाने वाले जीतू और दिग्विजय ङ्क्षसह जैसे नेताओं के साथ वे न केवल मंच पर गपशप करते नजर आए, बल्कि इन विरोधी नेताओं को भोज का निमंत्रण देकर घर भी बुलाया। सूत्र बताते हैं कि विधायकों को कर्नाटक भेजने की तैयारी का पूरा खर्च भी उमंग के खाते में गया। सर्वोच्च न्यायालय से मिली निराशा के बाद कांग्रेस मौन नजर आ रही है, लेकिन सिंघार विधानसभा से लेकर फिर से सर्वोच्च न्यायालय जाने की बात कह रहे हैं।