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ठेके पर संचालित होंगे सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, चिकित्सकों की कमी के चलते लिया फैसला, तीन जिलों के 18 स्वास्थ्य केन्द्रों से शुरूआत

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भोपाल। मध्यप्रदेश के सरकारी स्वास्थ्य केन्द्र अब निजी हाथों में सौंपे जाएंगे। उचित सुविधाओं और कमतर दरों पर संचालन के लिए सरकार इन्हें निजी व्यक्तियों को ठेके पर सौंपेगी। हालांकि प्रायोगिक तौर पर इसकी शुरूआत तीन जिलों की 18 इकाईयों (स्वास्थ्य केन्द्र) से होने जा रही है। 

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चेतन्य कश्यप ने मंत्रि-परिषद के फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। राज्य में चिकित्सकों की कमी को देखते हुए स्वास्थ्य केन्द्रों को उचित प्रबंधन एवं बेहतर चिकित्सा सुविधाओं की शर्तों के आधार पर निजी व्यक्तियों (आउटसोर्स) द्वारा संचालित किया जाएगा। प्रायोगिक तौर पर रीवा, गुना और देवास जिले के 18 स्वास्थ्य केन्द्रों पर इस व्यवस्था को शुरू किया जाएगा। इस व्यवस्था में मुफ्त दवाएं सरकार की ओर से दी जाएंगी।  

सुपर स्पेशलिटी अस्पताल खोलने परोपकारी संस्थाओं को भूमि और अनुदान 

मंत्री श्री कश्यप ने बताया कि राज्य में गुणवत्तापूर्ण तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता कराने एवं परोपकारी निवेश को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से परोपकारी संस्थाओं के लिए मेगा स्वास्थ्य सेवा अधोसंरचना प्रोत्साहन नीति-2026 को लागू किए जाने के प्रस्ताव पर 5 सदस्यीय मंत्रि-मण्डल उप समिति गठित की है। उप समिति प्रदेश में विश्वस्तरीय तृतीयक एवं सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल स्थापित करना, चिकित्सा शिक्षा का विस्तार विशेषज्ञ व एमबीबीएस डॉक्टर तैयार करना, गरीब मरीजों को गुणवत्तापूर्ण उपचार की गारंटी, अन्य राज्यों में मरीजों के पलायन को कम करना, स्वास्थ्य संकेत कों एमएमआर और आइएमआर में सुधार करने एवं रोगियों को उन्नत सुपर स्पेशियलिटी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने आदि का अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट देगी।

24 घंटे के लिए ही बढ़ी स्थानांतरण अनुमति

मंत्रि-परिषद की बैठक में स्थानांतरण अनुमति और इसके लिए खोले गए विभागीय पोर्टल की तिथि आगे बढ़ाए जाने की संभावना थी। लेकिन सामान्य प्रशासन विभाग के प्रस्ताव पर इसकी अवधि सिर्फ 24 घंटे अर्थात 16 जून की रात 12 बजे तक ही बढाई गई। जो मंगलवार आधी रात के बाद से समाप्त हो चुकी है। 

7388.58  करोड़ बढ़ी इंदौर मेट्रो की लागत, राशि स्वीकृत 

मंत्रि-परिषद ने इंदौर मेट्रो रेल परियोजना की मूल लागत 7 हजार 500.80करोड़ रूपये में 5 हजार 388.58 करोड़ रूपये की अतिरिक्त लागत जोडक़र पुनरीक्षित लागत 12 हजार 889.38 करोड़ रूपये की स्वीकृति प्रदान की है। इसके अतिरिक्त उ?द्योग के स्वीकृत मानदंडों के अनुसार परियोजना के लिए अतिरिक्त वित्त पोषण पीपीपी घटक एवं आंतरिक ऋण के प्रभाव को सम्मिलित करते हुए 6582.91 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है। इस तरह कुल 19472.29 करोड़ की स्वीकृति मंत्रि-परिषद ने दी है। 

मंत्रि-परिषद में यह भी हुए फैसले

- जनजातीय विद्यार्थियों को शैक्षणिक सुविधाओं के लिए 687 करोड़ रुपये स्वीकृत

- रेशम उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 639.25 करोड़ स्वीकृत।

- स्थानीय निधि संपरीक्षा के संचालन और विभागीय परिसंपत्तियों के संधारण के लिए 492.45 करोड़ स्वीकृत। 

- श्रमिक कल्याण से संबंधित योजनाओं के लिए 531.78 करोड़ स्वीकृत।

- प्रोजेक्ट टाइगर एण्ड एलिफेंट और ग्रामों के पुनर्वास संबंधी मुआवजा के लिए 2381.15 करोड़ स्वीकृत।