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मुख्यमंत्री ने 900 सूक्ष्म, लघु एवं माध्यम उद्यम इकाईयों को दिए 360 करोड़, लघु उद्यमी बोले उद्योगों के लिए मध्यप्रदेश सबसे अधिक अनुकूल

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भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मुख्य आतिथ्य में  सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग द्वारा रविवार को राजधानी के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में ‘समृद्ध एमएसएमई-विकसित मध्यप्रदेश’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने सिंगल क्लिक से 900 एमएसएमई यूनिट्स को 360 करोड़ की राशि प्रदान की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने उद्यमियों को भूमि आवंटन के लिए आशय पत्र, सहायता राशि के चेक और मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना के हितग्राहियों को ऋण राशि के चेक भी दिए। कार्यक्रम में कई उद्यमियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए भारत और विशेषकर मध्यप्रदेश राज्य को उद्योगों के लिए सबसे अनुकूल बताया। 

2047 तक एक करोड़ एमएसएमई इकाई का लक्ष्य:मुख्यमंत्री  

कार्यक्रम को संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित भारत को ध्यान में रखते हुए मध्यप्रदेश सरकार ने वर्ष 2047 तक एक करोड़ पंजीकृत एमएसएमई इकाइयों का लक्ष्य निर्धारित किया है। इससे प्रदेश में 2 करोड़ से अधिक लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। मीडिया से चर्चा में मुख्यमंत्री ने कहा कि मप्र सरकार अपने युवा उद्यमियों को लगातार प्रोत्साहित कर रही है। एमएसएमई इकाई के माध्यम से राज्य में लगभग सवा करोड़ से ज्यादा लोगों को रोजगार मिल रहा है। हमारी सरकार द्वारा एमएसएमई इकाइयों को मार्च 2026 तक करीब पौने चार करोड़ रुपये का देयक दिया जा चुका है। यह सरकार की ढाई साल की सबसे बड़ी उपलब्धि है। हमारा राज्य औद्योगिक क्षेत्र में सबसे तेजी से आगे बढ़ रहा है। कृषि कल्याण वर्ष में हमने खाद्य प्रसंस्करण इकाई के लिए भी कई योजनाएं बनाई हैं। मैं उम्मीद करता हूं कि सभी इसका भी लाभ लेंगे।

युवाओं के सपनों को पंख लगा रहा दूरदर्शी नेतृत्व:कश्यप 

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग के मंत्री चेतन्य कश्यप ने कहा कि उद्योगों को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. यादव की विशेष रुचि रही है और यह रुचि लोकप्रियता के लिए नहीं, बल्कि मप्र के आंकड़ों के अध्ययन के साथ और धरातली रही। विकसित भारत हो या मप्र या दुनिया के किसी भी विकसित देश के आंकड़ों का आधार कृषि है। रोजगार के लिए इसका विशेष महत्व है। लेकिन हमारे युवओं को, उनके सपनों को नए पंख लगाने की आवश्यकता है, तो उद्यम की भी आवश्यकता है। उसी उद्यम को लक्ष्य बनाकर उद्योग वर्ष मनाया। रीजनल कॉन्क्लेव आयोजित कर क्षेत्र में उद्यम के लिए माहौल बनाया। उन्होंने कहा कि उद्यमियों के अनुभव बताते हैं कि जब दूरदर्शी नेतृत्व होता है तो दुनिया बदली-बदली नजर आती है। और आज मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मप्र बदला-बदला नजर आ रहा है। देश में प्रधानमंत्री मोदी के 12 साल हुए हैं। 75 सालों में जो देश में नहीं हुआ, 12 सालों में हुआ। नेतृत्व की दृष्टि और दृढ इच्छा शक्ति क्या हो, यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बताया। 

मप्र में 5.26 लाख इकाईयों में 42700 करोड़ का निवेश 

विभाग के प्रमुख सचिव राघवेन्द्र सिंह ने एमएसएमई विभाग के कामों की जानकारी देते हुए बताया कि प्रदेश में 5 लाख 26 हजार निर्माण इकाईयां हैं, जिनमें 42 हजार 700 करोड़ का निवेश है। इनसे करीब 44 लाख लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर रोजगार मिल रहा है।प्रदेश में पिछले ढाई वर्षों में निवेश सहायता के रूप में 6 हजार 136 एसएसएमई उद्यमियों को 3 हजार 723 करोड़ राशि दी गई है।  राज्य सरकार ने 31 मार्च 2026 तक के सभी देयकों का भुगतान कर चुकी है। प्रदेश में अभी 181 औद्योगिक क्षेत्र संचालित हैं। पिछले एक वर्ष में उद्यमियों को 1000 से अधिक भूखंड आवंटित किए गए हैं। प्रदेश में 44 नए औद्योगिक क्षेत्र और क्लस्टर प्रस्तावित हैं। 

मप्र सरकार की नीतियां उद्यम के अनुकूल 

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के समक्ष एमएसएमई उद्यमियों ने अपने अनुभव साझा किए। सभी ने उद्यमियों के अनुकूल मप्र ओर देश की सरकार की नीतियों की प्रशंसा की। साथ ही कहा कि नया उद्यम शुरू करने के लिए आज देश में सबसे अनुकूल माहौल मध्यप्रदेश में है। 

पारदर्शिता के साथ सहायता कर रही सरकार: मिश्रा 

कार्यक्रम में लघु उद्योग भारती के प्रदेशाध्यक्ष राजेश मिश्रा ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में पिछले ढाई साल में औद्योगिक विकास को तेज गति प्रदान की है। भारत कृषि प्रधान देश से पहले उद्योग प्रधान देश भी रहा है। 1750 ईस्वी के आसपास विश्व की मैन्यूफैक्चरिंग में भारत की हिस्सेदारी 35 प्रतिशत थी, जो अब केवल 2 प्रतिशत के आसपास है। लघु उद्योग भारती देश के विभिन्न राज्यों से मध्यप्रदेश में निवेश लाने के लिए प्रयास कर रही है। राज्य सरकार पूरी पारदर्शिता के साथ उद्यमियों की सहायता कर रही है। सरकार की दूरदृष्टि उद्यमियों के लिए वरदान सिद्ध हो रहे हैं। 

मप्र से शुरूआत, आज देश-विदेश में पहुंच रहे उत्पाद: राशि मेहरा 

अलाना कंपनी की संस्थापक राशि मेहरा ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश से हुए अलाना लिप केयर ब्रांड की शुरुआत आसान नहीं थी। आज हमारा ग्रुप देश-विदेश में अपने उत्पाद बेच कर रहा है। 

मप्र में उद्योग संचालन लागत सबसे कम: कुनाल

सर्वा फॉम के संचालक उद्यमी कुनाल ज्ञानी ने बताया कि उन्होंने 1500 वर्गफीट में एक छोटी एमएसएमई यूनिट मध्यप्रदेश से शुरू की थी। आज देश के 5 राज्यों में हमारी ईकाइयां हैं और अब यूके में भी खुलने जा रही है। मेरी सफलता में मप्र की उद्योग नीतियों का बड़ा हाथ है। 5 राज्यों में काम रहा रहा हँू। लेकिन मप्र वो राज्य है, जहां उद्योग स्थापित करते हैं तो न केवल केपिटल लागत कम है, बल्कि बाजार में लाने का समय भी सबसे कम है। मध्यप्रदेश को भारत का दिल कहते हैं, जिसमें उद्योग संचालन की लागत सबसे कम है। उन्होंने कहा कि उद्योगों की दृष्टि से आज दुनिया भारत की ओर देख रही है। चीन के बाद कंपनियां भारत का रुख कर रही हैं।