राजनीति

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अपने ही विधायकों को छुपाने में जुटी कांग्रेस, राज्यसभा के लिए भाजपा का तीसरा प्रत्याशी उतरते ही बढ़ी कांग्रेस की धडक़न

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- मसूद और कुणाल दिल्ली रवाना, कांग्रेस शासित राज्य में छुपाने की तैयारी

भोपाल। मध्यप्रदेश की तीसरी राज्यसभा सीट के लिए भारतीय जनता पार्टी द्वारा अपना तीसरा प्रत्याशी उतारे जाने के साथ कांग्रेस नेतृत्व की धडक़नें बढ़ गई हैं। विधायक टूटने और क्रॉस मतदान की आशंका के चलते कांग्रेस ने अपने विधायकों को छुपाने की तैयारी शुरू कर दी है। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के सबसे विश्वास पात्र पूर्व विधायक एवं पार्टी के राष्ट्रीय सचिव कुणाल चौधरी और विधायक आरिफ मसूद सोमवार को दिल्ली रवाना हुए। माना जा रहा है कि इन्हें विधायकों के व्यवस्थापन और प्रबंधन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। टूट से बचाने के लिए विधायकों को तेलंगाना भेजे जाने की भी चर्चा है। 


सिंघार के बंगले पर सहभोज में बनी रणनीति

कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन के समर्थन में पार्टी के सभी विधायकों को एकजुट रखने के लिए रणनीति सोमवार, रात उमंग सिंघार के बंगले पर बनी। सिंघार ने मीनाक्षी के नामांकन के बाद अपने शासकीय बंगले बी-12, 74 बंगले पर कांग्रेस विधायक दल के सभी सदस्यों और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को सहभोज के बहाने बुलाया। यहां दिग्विजय सिंह अपने पुत्र विधायक जयर्वधन सिंह के पास पहुंचे। इसके अलावा अजय सिंह ‘राहुल’, राज्यसभा सांसद अशोक सिंह, पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा के अलावा पार्टी के कई विधायक भी पहुंचे। हालांकि एक दर्जन से अधिक विधायक सिंघार के बंगले पर नजर नहीं आए। 


निगरानी में रहेंगे विधायक और उनके मोबाइल

विधायकों को टूटने से बचाने के लिए कांग्रेस नेतृत्व सभी विधायकों को एकजुट कर निगरानी में लेने की तैयारी में हैं। वरिष्ठ विधायकों को छोडक़र कुछ विधायकों के मोबाइलों पर कांग्रेस नजर रखने की तैयारी कर चुकी है। सूत्रों का कहना है कि पार्टी अभी इस बात पर मंथन कर रही है कि विधायकों को भोपाल और मप्र से बाहर भेजा जाए अथवा स्थानीय स्तर पर किसी गुप्त स्थान पर एक साथ निगरानी में रखा जाए। 


अंदर सिर्फ विधायकों को प्रवेश 

सहभोज के दौरान सिंघार के बंगले पर पार्टी के विधायकों और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को ही प्रवेश मिल सका। पार्टी कार्यकर्ता और मीडिया बंगले में प्रवेश नहीं कर सके, इसलिए द्वार पर ‘केवल माननीय विधायक गण’ लिखे पर्चे भी चिपका दिए गए। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और विधायकों ने सिंघार के बंगले के अंदर बैठकर मंथन किया, जिसमें बाहरी किसी व्यक्ति को प्रवेश नहीं मिल सका।