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जुलाई अंत तक खिंच सकता है विधानसभा का मानसून सत्र

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सदन और गर्व गृह में जारी हैं ई-विधान के भौतिक काम

भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के अवसान के साथ ही विधानसभा परिसर में ई-विधान के काम शुरू हो गए थे। सबसे पहले सदन और गर्भगृह में अध्यक्ष, नेता सत्तापक्ष, नेता विपक्ष सहित सत्ता और विपक्ष के सदस्यों की टेबिलों पर टैबलेट लगाए जाने का काम होना है।   मानसून सत्र से पहले भौतिक काम निपटाने के प्रयास जारी हैं, हालांकि ई-विधान के भौतिक कामों में देरी के चलते मानसून सत्र जुलाई के अंतिम सप्ताह तक भी खिंच सकता है।

उल्लेखनीय है कि संसदीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा देश के सभी राज्य और केंद्र-शासित प्रदेशों के विधानमंडलों को राष्ट्रीय ई-विधान एप्लीकेशन (नेवा) प्लेटफार्म से जोडऩे का प्रयास किया जा रहा है। इस प्रौद्योगिकी के उपयोग से सदनों की कार्यवाही के संचालन में पारदर्शिता, संवेदनशीलता और जवाबदेही लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। देशभर में इसके लिए कार्यशालाएं, प्रशिक्षण सहित अन्य कार्यक्रम भी किए जा रहे हैं। हालांकि अब तक कई राज्यों की विधानसभाओं में ई-विधान लागू हो चुका है। मप्र में भी अध्यक्ष नरेन्द्र ङ्क्षसह तोमर के निर्देश पर ई-विधान का काम शुरू हो चुका है। लेकिन सदन में ई-विधान की प्रक्रिया शीतकालीन सत्र तक ही शुरू हो पाने की संभावना है।   

अभी पीडब्ल्यूडी की टीम कर रही भौतिक काम 

मप्र विधानसभा में अभी लोक निर्माण विभाग द्वारा ई-विधान के भौतिक काम किए जा रहे हैं। इसके तहत अध्यक्ष की आसंदी, सदन और गर्भगृह की टेबिल-कुर्सियां हटाकर इंटरनेट, बिजली आदि के तार बिछाए जा रहे हैं। इसके बाद टेबिल कुर्सियां और मेटिंग बिछाकर सदन की बैठक व्यवस्था को पहले की तरह ठीक किया जाएगा। इसके बाद एनआईसी की टीम अध्यक्ष सहित प्रत्येक सदस्य की टेबिल पर टैबलेट, माईक सहित अन्य उपकरणों को व्यवस्थित करेंगी। 

पहला निरस्त, दूसरी बार होगा टैबलेट के टेंडर 

ई-विधान अंतर्गत सदन में अध्यक्ष सहित सभी 230 सदस्यों और गर्भग्रह में मौजूद अधिकारियों की टेबिल पर लगाए जाने वाले टैबलेट सहित अन्य उपकरणों की खरीदी ‘गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस’ (जेम) के माध्यम से एनआईसी द्वारा की जा रही है।  जानकारी के अनुसार तकनीकी कारणों से एक बार इसके टेंडर निरस्त हो चुके हैं, अब दूसरी बार फिर से निविदा बुलाई जाएंगी। खरीदी के बाद एनआईसी के माध्यम से ही इन टैबलेट को व्यवस्थित लगाया जाएगा। 

तो जून अंत में जारी होगी सत्र अधिसूचना 

सामान्यत: जुलाई के पहले-दूसरे सप्ताह में आयोजित होने वाला विधानसभा का मानसून सत्र जुलाई के अंतिम सप्ताह तक खिंचता है तो इसकी अधिसूचना भी जून माह के अंतिम सप्ताह तक ही जारी होगी। इस सत्र में ई-विधान भलें लागू न हो सके, लेकिन सदन में ई-विधान का पूरा मॉडल जरूर नजर आएगा। 

सत्र के दौरान प्रशिक्षित होंगे सदस्य

मप्र विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान ई-विधान भलें लागू न हो सके, लेकिन विधानसभा के सभी 230 विधायकों और उनके अधीनस्थ स्टाफ को ई-विधान का प्रशिक्षण जुलाई में आयोजित मानसून सत्र के दौरान ही दिया जाएगा। इसके लिए विधान परिषद सभागार में प्रशिक्षण की व्यवस्था की जा रही है। यहां प्रशिक्षण टेबिल आदि का काम हो चुका है। टैबलेट खरीदी के बाद सबसे पहले यहीं लगाए जाएंगे। इसका फायदा यह होगा कि शीतकालीन सत्र में ई-विधान को सीधे ही लागू किया जा सकेगा। 

पारदर्शी, सरल और खर्च कम करेगा ई-विधान

मप्र में ई-विधान लागू होने के बाद स्टेशनरी और भौतिक दस्तावेजों पर बड़ा खर्च रुक जाएगा। सभी विधायकों को दिए जाने वाले उत्तर, प्रतिवेदन सहित अन्य सामग्री उनके टैब पर डिजीटल स्वरूप में भेजी जा सकेगी। इससे शासन और विधानसभा दोनों के ही समय और पैसा की बजत हो सकेगी। साथ ही स्टेशनरी और दस्तावेजी बड़ा खर्च रोका जा सकेगा।   

‘ई-विधान के भौतिक काम तेजी से जारी हैं। एक माह में एनआईसी टैबलेट सहित अन्य आवश्यक सामग्री के टेंडर कर इन्हें व्यवस्थित रूप से लगाएगी। हालांकि ई-विधान के साथ मानसून सत्र हो पाना संभव नहीं लगता।’

अवधेश प्रताप सिंह

प्रमुख सचिव, मप्र विधानसभा