राजधानी

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न्याय मांगने कलेक्टर दरबार पहुंची 81 वर्षीय पीडि़ता, भरण-पोषण को तरसा रहे बहु-बेटा, मानसिक और शारीरिक रूप से भी कर रहे परेशान

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 जन सुनवाई में पहुंचे कई आवेदक बोले, उनके आवेदन महीनों से लंबित 

भोपाल। उम्र के आखिरी पड़ाव में जब सहारे की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, तब 81 वर्षीय त्रिवेणी बाई गुप्ता न्याय की आस लेकर कलेक्टर जनसुनवाई में पहुंचीं। कांपते हाथों और नम आंखों के साथ उन्होंने अपनी व्यथा कलेक्टर को सुनाई। बुजुर्ग महिला ने कहा कि पति के निधन के बाद उनका जीवन संघर्षों से घिर गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुत्र और पुत्रवधू न केवल उनका भरण-पोषण नहीं कर रहे, बल्कि उन्हें मानसिक और शारीरिक प्रताडऩा का भी सामना करना पड़ रहा है।

पीडि़ता त्रिवेणी बाई ने कलेक्टर को बताया कि बहु-बेटा उन्हें गाली देते हैं और खाना नहीं देते। इस कारण उन्हें अपने ही घर से दूर रहने को मजबूर होना पड़ा है। पीडि़ता ने बताया कि वह अपनी बेटी पर निर्भर हैं। अब उन्हें इस बात का भी डर सता रहा है कि कहीं उनकी जीवनभर की कमाई और घर पर अवैध कब्जा न हो जाए। उन्होंने प्रशासन से सुरक्षा और न्याय की गुहार लगाई।

जनसुनवाई में ऐसे कई लोग पहुंचे जिनकी उम्मीदें प्रशासन के दरवाजे पर टिकी हुई हैं। कोलार रोड क्षेत्र के कजलियाखेड़ा-कालापानी के रहवासियों ने अपने घरों को बचाने की फरियाद लगाई। ग्रामीणों का कहना है कि प्रस्तावित सडक़ निर्माण के कारण उनके सिर से छत छिनने का खतरा मंडरा रहा है। वर्षों से बसे परिवारों को विस्थापन का डर सता रहा है और वे अपने आशियाने बचाने के लिए प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं।

बैरसिया तहसील के ग्राम विजावन कला की तारा बाई भी अपनी पीड़ा लेकर जनसुनवाई में पहुंचीं। उनका आरोप है कि उनके दिवंगत पति के नाम दर्ज कृषि भूमि को बिना वैधानिक प्रक्रिया के अन्य लोगों के नाम दर्ज कर दिया गया। उनका कहना है कि जमीन ही उनके परिवार की आजीविका का आधार है और रिकॉर्ड में बदलाव से उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

एक अन्य शिकायतकर्ता ने भूमि सीमांकन प्रकरण में फर्जी दस्तावेज तैयार कर जमीन पर कब्जा करने के प्रयास का आरोप लगाया। उनका कहना है कि वे तीन बार जनसुनवाई में आवेदन दे चुके हैं, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई। जनसुनवाई में पहुंचे कई लोगों की शिकायत एक जैसी थी। बार-बार आवेदन देने के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा। कोई अपनी जमीन बचाने की लड़ाई लड़ रहा है, तो कोई अपने घर और सम्मान के लिए संघर्ष कर रहा है। प्रशासन से लोगों को उम्मीद है कि उनकी फरियाद सिर्फ फाइलों तक सीमित न रह जाए, बल्कि उन्हें समय पर न्याय भी मिले।