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कुपोषण खत्म करने बनाएं ‘फुल प्रूफ’ कार्योजना, मुख्यमंत्री ने ली महिला एवं बाल विकास विभाग की उच्च स्तरीय बैठक

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भोपाल। कुपोषण की समस्या को प्रदेश से पूरी तरह खत्म करने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी ‘फुल प्रूफ’ कार्योजना तैयार करें। महिलाओं और बच्चों के कल्याण, पोषण और सशक्तिकरण से जुड़ी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन हो। आंगनवाड़ी स्तर पर पोषण ट्रैकर ऐप में दैनिक, साप्ताहिक और मासिक प्रविष्टियां समय पर पूरी की जाएं, ताकि कोई भी पात्र हितग्राही लाभ से वंचित न रहे। इस तरह के निर्देश मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को महिला एवं बाल विकास विभाग की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में दिए। बैठक में विभागीय मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया, मुख्य सचिव अनुराग जैन सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। 

योजनाओं में तय हो जनभागीदारी और जवाबदारी 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं के क्रियान्वयन में अधिक से अधिक जन भागीदारी और जवाबदेही तय की जाए। महिलाओं और बच्चों के कल्याण से संबंधित योजनाओं का अधिक से अधिक प्रचारित किया जाए। बच्चों और महिलाओं में पोषण स्तर को बेहतर करने के लिए संचालित गतिविधियों में स्वास्थ्य, स्कूल शिक्षा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास सहित निजी अस्पतालों और संस्थाओं को भी जोड़ा जाए। 

लापरवाहों पर करें कड़ी कार्रवाई 

महिलाओं और बच्चों से जुड़ी शासन योजनाओं को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि अन्य राज्यों और प्रदेश के जिलों में हो रहे सफल नवाचारों को अपनाने के लिए भी कार्ययोजना बनाई जाए। मैदानी स्तर पर बेहतर कार्य करने वालों को प्रोत्साहित करें और लापरवाही बरतने वालों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए। 

कामकाजी महिलाओं के लिए पीपीपी मोड पर बनाएं आवास

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जिन औद्योगिक इकाइयों में महिला कर्मियों की संख्या अधिक है, उन इकाइयों में कामकाजी महिलाओं के लिए पीपीपी मोड पर आवास (हॉस्टल) निर्माण की कार्ययोजना बनाई जाए। बैठक में बताया गया कि देवास, नर्मदापुरम, झाबुआ और सिंगरौली में कामकाजी महिला आवासों का निर्माण शुरू हो गया है। प्रताडि़त महिलाओं को सहायता उपलब्ध कराने के लिए पांढुर्णा, मऊगंज, मैहर, पेटलावद-झाबुआ, इंदौर के लसूडिय़ा और सांवेर एवं धार के मनावर और पीथमपुर में वन स्टॉप सेन्टर स्वीकृत किए गए हैं। चाइल्ड हेल्पलाइन अंतर्गत 51 जिला स्तरीय और एक राज्य स्तरीय हेल्प सेंटर के माध्यम से 66 हजार से अधिक बच्चों को सहायता उपलब्ध कराई गई। जोखिम ग्रस्त बच्चों की मैपिंग के लिए 13 जिलों में प्रक्रिया जारी है।

बैठक में यह भी दी गई जानकारी 

- 5 से 6 वर्ष के आयु वर्ग के 9.288 लाख बच्चों के लिए विद्यारंभ समारोह आयोजित कर प्रमाण पत्र भी दिए गए। 

- सक्षम आंगनवाड़ी उन्नयन के अंतर्गत प्रदेश में एक साथ 12 हजार 670 मिनी केंद्रों को मुख्य आंगनवाड़ी के रूप में उन्नत कर मप्र  देश में अग्रणी बना है। 

- प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना में दर्ज 15.51 लाख गर्भवती महिलाओं को 798 करोड़ 68 लाख रुपये से अधिक का भुगतान किया गया। इस योजना के क्रियान्वयन में पिछले ढाई साल से मध्यप्रदेश देश में अग्रणी है।

- प्रदेश की सभी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, मिनी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका को बीमा योजना का लाभ दिया गया है।