अपराध

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लुभावनी योजनाओं का लालच देकर निवेशकों से करोड़ों की धोखाधड़ी और गबन, भोपाल की सहकारी संस्था के पदाधिकारियों पर ईओडब्ल्यू ने की एफआईआर

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भोपाल। फिक्स डिपॉजिट एवं बचत योजनाओं के नाम पर आम-जनता से निवेश के नाम पर धोखाधड़ी करने वाली सहकारी संस्था वीएसीएल जन सहयोग क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी लिमिटेड के अध्यक्ष सहित अन्य पदाधिकारियों के विरुद्ध आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने गबन, धोखाधड़ी एवं अपराधिक षड्यंत्र की धाराओं में अपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध किया है। 

सहकारी संस्था द्वारा निवेशकों के साथ धोखाधड़ी और गबन की शिकातय भ्रष्टाचार निवारण युवा मंच के संयोजक अशोक कुमार टाटा ने ईओडब्ल्यू से की थी। प्राथमिक जांच में संस्था द्वारा आम जनता को लुभावनी योजनाओं का लालच देकर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी और गबन की बात पता चली। साथ ही संस्था के पदाधिकारियों एवं सहयोगियों द्वारा अधिक ब्याज, कम समय में राशि दुगुनी-तिगुनी होने तथा रोजगार उपलब्ध कराने का प्रलोभन देकर बड़ी संख्या में लोगों से राशि जमा कराए जाने और परिपक्वता अवधि पूर्ण होने के बाद निवेशकों को राशि वापस नहीं किए जाने की बात सामने आई। इसी को आधार बनाकर आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) थाना, भोपाल में संस्था के तत्कालीन अध्यक्ष राकेश कुमार शर्मा, उपाध्यक्ष बी.एस. चौहान, उपाध्यक्ष अभिषेक शर्मा, संचालक इंद्रेश सिंह, धीरज पवार, जितेन्द्र सिंह, राकेश मालवीय, विकास गजभिए, चिरौंजी लाल मीणा, श्वेता शर्मा, संध्या सिंह एवं इनके सहयोगी अभिषेक खरे, विजय इंगले तथा योगिता शर्मा व अन्य के विरुद्ध धारा 420, 409, 120-बी भा.द.वि. एवं म.प्र. निक्षेपकों के हितों का संरक्षण अधिनियम 2000 की धारा 6(1) के अंतर्गत अपराध पंजीबद्ध किया गया है। 

13 साल पहले अरेरा कॉलोनी के पते पर पंजीकृत

वीएसीएल जन सहयोग क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी लिमिटेड का पंजीयन म.प्र. सहकारी सोसायटी अधिनियम, 1960 के अंतर्गत 3 सितम्बर 2013 को पंजीयन किया गया था। संस्था का कार्यालय ई-6/76, हाल ए, 11 नंबर बस स्टॉप, अरेरा कॉलोनी, भोपाल में संचालित पाया गया। संस्था के गठन के समय राकेश कुमार शर्मा अध्यक्ष, बी.एस. चौहान एवं अभिषेक शर्मा उपाध्यक्ष तथा अन्य आरोपी संचालक मंडल के सदस्य नियुक्त किए गए थे। जांच में पता चला कि कि संस्था द्वारा दैनिक जमा, मासिक बचत, फिक्स डिपॉजिट, रिकरिंग डिपॉजिट, मासिक आय योजना एवं विभिन्न बचत योजनाओं के माध्यम से जनता से निवेश कराया गया। निवेशकों को ‘जन सहयोग कैश क्रैडिट सर्टिफिकेट’ जारी किए जाते थे, जिनमें जमा राशि, ब्याज दर, परिपक्वता तिथि एवं भुगतान राशि का उल्लेख किया जाता था। निवेशकों को 12 प्रतिशत या उससे अधिक ब्याज, साढ़े पांच वर्ष में राशि दुगुनी अथवा तिगुनी होने तथा आकर्षक लाभ दिए जाने का आश्वासन दिया गया।

खाते में जमा हुई 1.64 करोड़ से ज्यादा राशि

संस्था के बैंक ऑफ बड़ौदा, हबीबगंज शाखा, भोपाल के खाते की पड़ताल में पता चला कि खाते में निरंतर बड़ी मात्रा में राशि जमा हुई और निकाली गई। बैंक रिकॉर्ड के अनुसार 1,64,64,504 रुपये की राशि संस्था के खाते में जमा कराई गई। इस खाते का संचालन मुख्य रूप से संस्था के अध्यक्ष राकेश शर्मा द्वारा किया जा रहा था। जांच में पता चला कि संस्था ने 13 सालों में लगभग 3000 निवेशकों से विभिन्न योजनाओं के माध्यम से निवेश कराया। 

निवेशकों को आश्वासन, फिर बदला संस्था का पता 

लगभग 40 निवेशकों एवं संस्था से जुड़े व्यक्तियों के कथन में यह बात सामने आई कि संस्था द्वारा जमा राशि की समयावधि पूरी होने के बाद निवेशकों द्वारा राशि वापस मांगने पर पहले उन्हें जल्द राशि लौटाने का आश्वासन दिया गया। बाद में संस्था का कार्यालय मानसरोवर कॉम्पलेक्स, एम.पी. नगर में स्थानांतरित कर लिया गया। अधिकांश समय कार्यालय बंद मिला और आरोपियों ने मोबाइल फोन बंद कर लिए और निवेशकों से संपर्क समाप्त कर दिया। संस्था के कर्मचारियों ने बताया कि उनका वेतन भुगतान भी नहीं किया गया। एजेंटों ने बताया कि उनके माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों से नकद एवं चेक के माध्यम से राशि जमा कराई गई थी। कुछ निवेशकों के चेक बाउंस भी हुए। पीडि़तों ने कई जगह इसकी शिकायत की थी। 

निवेशकों के पैसे से अध्यक्ष ने खरीदी संपत्ति 

जांच में संस्था के अध्यक्ष राकेश शर्मा द्वारा संपत्ति खरीदे जाने की बात भी पता चली। कुछ भूमि संस्था संचालन के समय भी खरीदी गई। शर्मा ने सोसायटी निर्माण के बाद 17 फरवरी 2014 को ग्राम दीवानगंज में अपने नाम पर 25 लाख रुपये और 9 अक्टूबर 2014 को एक करोड़ रुपये कीमत की भूमि खरीदी। इसके अलावा नगर तथा ग्राम निवेश (जिला विदिशा) से जुड़े आवासीय भूखंडीय के दस्तावेज भी मिले हैं।