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18 साल के राजनीतिक वनवास के बाद यदुवंशी की जै जै ....

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Gossip गुगली। ठाकुर साहब की टेढ़ी दृष्टि और अपने निजी समर्थक के लिए टिकट की जिद ने ग्वालियर के कमलदल वाले यदुवंशी को 18 साल तक न केवल टिकट से वंचित रखा बल्कि राजनीतिक वनवास भी कटवाया। अब दिल्ली ने ठाकुर साहब के पर कतरकर एम पी के सदन की कोठरी में बैठा दिया तो यदुवंशी का भाग्य चमक उठा। संयोग कहे या भाग्य का लेखा दो अलग अलग समीकरण भी बन गए। ठाकुर साहब के लूप में लगते ही उनका चेला 23 का चुनाव हार गया और यदुवंशी का रिश्तेदार सूबे का मुखिया बन गया। यही से भैया की चमक पड़ी। ढाई साल सीएम हाउस से सीधे जुड़कर मजे हुए अब प्रदेश मुखिया ने सरकार की सबसे बड़ी किसान बैंक का सर्वेसर्वा बना दिया। भाई को ढाई साल पहले संघटन ने राजधानी वाले जिले के मार्गदर्शन की कमान सौंपी थी, लेकिन जिले का संघटन मुखिया ही घास नहीं डालता था । भैया के पावर में आते ही न केवल जिला मुखिया का पद चला गया बल्कि राजधानी की राजनीतिक फिल्म से ही गायब हो गया। कल ही की बात है, बड़ी जिम्मेदारी ओढ़कर भाई अपने शहर पहुंचा तो वो बड़े बड़े आगे पीछे मंडराते नजर आए, ये वही थे जिनके आगे भाई ढाई साल पहले तक सिफारिश की गुहार लगाते घूमता था। अब भाई को पूरी उम्मीद है कि ग्वालियर की हारी सीट का टिकट तो उसे ही मिलेगा क्योंकि सबसे ऊंची अप्रोच जो हाथ लगी है। और फिर ठाकुर साहब का चेला भी दिल्ली जा चुका है। लोग कह रहे हैं, ऐसी किस्मत हर किसी की नहीं चमकती। भैया यदुवंशी है इसीलिए जय जय हो रही है।


रोटेशन की खबर ने बढ़ाई धड़कन 

ट्रांसपोर्ट विभाग के मैदानी अमले का बीते एक साल से प्रॉपर रोटेशन पेंडिंग है। कोर्ट का ऑर्डर नहीं आता तो बीती 20 तारीख तक अदला बदली हो जाती।  दो दिन पहले जोर की खबर आई कि सूची जारी हो गई है। टीएसआई से आरक्षक तक के फोन घनघनाने लगे। लेकिन न्यूज फेक निकली। सबसे ज्यादा टेंशन उन पॉइंट प्रभारियों को हुई जो सालभर से दुकान जमाकर ऊपर वालों को बेवकूफ बना रहे है। चेक पॉइंट की कमाई का आधा हिस्सा भी ऊपर नहीं भेज रहे हैं। खैर सूची तो इसी महीने आनी है और काउंट डाउन भी शुरू हो चुका है। विभाग के बेगाने में चर्चा है, जो कमाएगा वो चलेगा, रोटेशन हो या ट्रांसफर कमाऊ पूत तो चलेगा!