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अधिकारियों के अधिपत्य में विकास प्राधिकरण, चल रही मर्जी की सरकार,घोटाले, भ्रष्टाचार और नियमित बैठकों के अभाव में थमा विकास

मध्यप्रदेश

भोपाल। मध्यप्रदेश के पांच महानगरों के विकास प्राधिकरणों को लम्बे समय से नियुक्त संचालक मंडल का इंतजार कर रहे हैं। प्राधिकरणों में लम्बे समय से राजनीतिक नियुक्तियां नहीं होने से यहां न केवल लंबित और नई परियोजनाएं ठप पड़ी हैं। बल्कि प्राधिकरण के कामों के प्रति अधिकारियों की लापरवाही और उदासीनता के चलते कई परियोजनाएं भी अटकी पड़ी हैं। हितग्राही परेशान है और प्राधिकरण भी घाटे में जा रहे हैं। प्राधिकरणों में भ्रष्टाचार और घोटालों की भी खबरें लगातार सामने आ रही हैं। 

संचालक मंडल बिना हाल-बेहाल हुए प्राधिकरण 

इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए): प्रदेश का सबसे धनवान प्राधिकरण है, जिसके पास एक हजार करोड़ रुपये की सावधि जमा (एफडी) है। इससे हर साल 60 करोड़ रुपये का ब्याज भी मिलता है। लेकिन सितम्बर 2025 से आईडीए के सभी काम अटके हुए हैं। प्रशासकों के भरोसे प्राधिकरण चल रहा है। प्राधिकरण ने तीन सप्ताह पहले 1020 करोड़ का बजट पास किया है, जिसमें कई परियोजनाओं को शामिल किया हैं। जबकि पहले से प्राधिकरण की 1150 करोड़ रुपए की स्टार्टअप पार्क, कुमेडी में अत्याधुनिक सुविधाओं के साथ बने आईएसबीटी बस स्टेशन का संचालन कार्य, बुजुर्गों के लिए 80 करोड़ के स्नेहधाम का अनुबंध तथा शहर की फ्लाई ओवर और ब्रिज सहित कई परियोजनाएं अटकी पड़ी हैं। इसके अलावा पिछले साल की रिवर साइड कॉरिडोर, मोरोद में अनाज मंडी का स्थानांतरण और स्कीम 97 में सिटी फॉरेस्ट पर भी काम नहीं हो सका है। संचालक मंडल की बैठक नहीं होने से हजारों प्लॉट धारक परेशान हैं। प्राधिकरण में फर्जी एनओसी का भी हाल में टीएनसीपी के माध्यम से खुलासा हुआ है। 

जबलपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) : छह सालों से शासन द्वारा नियुक्त अध्यक्ष एवं संचालक मंडल का इंतजार कर रहे जेडीए की शहर के विस्तार और नए क्षेत्रों के विकास के लिए तैयार की गई लगभग 400 करोड़ रुपये की विकास योजनाएं ठप पड़ी हैं। एक हजार एकड़ से अधिक भूमि पर टाउन डेवलपमेंट स्कीम के काम उलझे पड़े हैं। जेडीए की टीडीएस-2, टीडीएस-3 और टीडीएस-5 योजनाओं को वर्ष 2022 एवं 2023 में राज्य सरकार से मंजूरी मिल चुकी है। लेकिन तीन साल बाद भी जमीनों के नामांतरण की प्रक्रिया तक पूरी नहीं हो सकी है। इसी प्रकार 235 एकड़ क्षेत्र में शॉपिंग सेंटर, हेल्थ सेंटर, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, शैक्षणिक संस्थान, उद्यान और मल्टीलेवल पार्किंग जैसी सुविधाओं के साथ योजना क्रमांक 65, लगभग 298 एकड़ क्षेत्र में ग्रुप हाउसिंग, विद्यालय, कम्युनिटी हॉल, पुलिस चौकी, खेल मैदान और उद्यान विकास की योजना क्रमांक 62 और 225 एकड़ क्षेत्र में 48 मीटर चौड़ी सडक़, साइकिल ट्रैक, बस स्टॉप और आवासीय क्षेत्र विकसित किए जाएंगे। इसके साथ शॉपिंग सेंटर, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, स्कूल, हेल्थ सेंटर, फायर स्टेशन और औद्योगिक भूखंड जैसी योजना क्रमांक 64 भी लंबित हैं। डेढ़ साल पहले प्राधिकरण के वर्तमान सीईओ दीपक वैद्ध के विरुद्ध अधिग्रहित जमीन को फर्जी दस्तावेज से बेचकर शासन को 2.40 करोड़ की चपत लगाने के मामले में ईओडब्ल्यू में एफआईआर हो चुकी है। 

उज्जैन विकास प्राधिकरण (यूडीए): सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के बीच सरकार ने ढाई साल बाद अध्यक्ष पद पर रविन्द्र (रवि) सोलंकी, उपाध्यक्ष मुकेश यादव और रवि वर्मा तथा पांच सदस्यों विजय अग्रवाल, अमित श्रीवास्तव, रामचंद्र शर्मा (रामागुरु), सुशीला जाटवा और दुर्गा बिलोटिया की नियुक्ति कर दी हैं। प्राधिकरण के अंतर्गत सिंहस्थ से जुड़े अधोसंरचना के काम, नई कॉलोनियों और सडक़ों के विकास की अटकी परियोजनाएं और मास्टर प्लान को गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। सिंहस्थ क्षेत्र में श्रद्धालुओं की सुविधाओं और घाटों के विस्तारीकरण जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाएं भी प्राधिकरण के जिम्मे है। हालांकि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा व्यक्तिगत रूप से कामों की समीक्षा के चलते सिंहस्थ से जुड़े काम प्रभावित नहीं हो सके, लेकिन प्राधिकरण की आवासीय परियोजनाएं बैठकों में एजेंडे का हिस्सा नहीं बन सकीं। 

ग्वालियर विकास प्राधिकरण (जीडीए): राज्य शासन ने अध्यक्ष के पद पर मधुसूदन भदौरिया और उपाध्यक्ष पद पर सुधीर गुप्ता और वेदप्रकाश शिवहरे की नियुक्ति की है। इससे पहले 2015 में अभय चौधरी को जीडीए का अध्यक्ष बनाया गया था, वे लगभग 4 साल तक इस पद पर रहे। इसके बाद से संभागीय आयुक्त प्रशासक के रूप में अध्यक्ष पद संभाले हैं। अधिकारियों की लापरवाही का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि प्राधिकरण के विधान के अनुसार संचालक मंडल (बोर्ड) की बैठक हर तीन माह में होना अनिवार्य है। लेकिन 30 जून 2025 के बाद जीडीए बोर्ड की अगली बैठक 17 मार्च 2026 को हो सकी। वह भी राजनीतिक दबाव में प्रतिमा लगाए जाने के एक मात्र एजेंडे के साथ। जीडीए की पुरानी लगभग परियोजनाओं के काम लंबित हैं, नई परियोजनाओं के विकास कार्य शुरू नहीं हो सके हैं। खास बात यह है कि जीडीए की अधिकारियों की लापरवाही से काम लंबित होने पर भी हितग्राहियों से 16 प्रतिशत की ब्याजदर से अर्थदण्ड वसूला जा रहा है। 

भोपाल विकास प्राधिकरण (बीडीए): फरवरी 2023 में कृष्ण मोहन सोनी को अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। हालांकि वे कुछ महीने ही इस पद पर रह सके। नई नियुक्तियां होनी है। प्राधिकरण की सिर्फ पूर्व से संचालित योजनाओं पर ही काम जारी है। नई परियोजनाओं पर काम शुरू नहीं हो सका है। विगत वर्षों में जीडीए में रिश्वतखोरी, भ्रष्टाचार के कई मामले सामने आए हैं। अगस्त 2024 में लिपिक तारकचंद दास और जून 2025 में बाबू शाहबुद्दीन सिद्धकी रिश्वत लेते पकड़े गए थे। प्राधिकरण के कामों के लिए रिश्वतखोरी की शिकायत अभी भी अधिकारियों के पास पहुंच रही हैं।