Breaking News:

• देर रात मप्र के आईपीएस की बड़ी तबादला सूची जारी, स्पेशल डीजी से लेकर सीएसपी स्तर के 62 अधिकारी स्थानांतरित देखें सूची • 18 साल के राजनीतिक वनवास के बाद यदुवंशी की जै जै .... • किसी को खराब प्रदर्शन की सजा तो किसी को मिला उत्कृष्ट प्रदर्शन का इनाम, आधी रात के बाद जारी की 62 आईपीएस अधिकारियों की स्थानांतरण सूची • पूर्व विधायक रेखा यादव अध्यक्ष, साधना सदस्य नियुक्त,6 साल बाद राज्य महिला आयोग में हुई नियुक्तियां • अर्थियां सजाकर मंत्री निवास को निकले, पुलिस ने रोका तो की धक्कामुक्की, जबलपुर की क्रूज दुर्घटना को लेकर युवा कांग्रेस का भोपाल में प्रदर्शन • भोपाल जिले के भाजपा कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षण वर्ग 15-17 मई को, पार्टी नेताओं ने देखा प्रशिक्षण स्थल, कामकाजी बैठक में की समीक्षा
आध्यात्म

Image Alt Text

‘एकात्म पर्व’ में अति सॉलिसिटर जनरल एन. वेंकटरामन का उद्बोधन, बोले-शंकराचार्य ने भारत को अखंड धारा के रूप में प्रवाहित किया

आध्यात्म

भोपाल। शंकराचार्य ने भारत की आध्यात्मिक और धार्मिक परंपराओं को न केवल व्यवस्थित किया, बल्कि उन्हें एक अखंड धारा के रूप में प्रवाहित भी किया। आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास द्वारा आदि गुरु शंकराचार्य के प्रकटोत्सव वैशाख शुक्ल पंचमी के उपलक्ष्य में ‘एकात्म पर्व’ में आयोजित संवाद सत्र में संबोधित करते हुए यह बात भारत सरकार के अति सॉलिसिटर जनरल एन. वेंकटरामन ने जगद्गुरु आदि शंकराचार्य के अद्वितीय योगदान को रेखांकित करते हुए कही। 

एन. वेंकटरामन ने मंदिर परंपरा पर प्रकाश डालते हुए बताया कि शंकराचार्य ने दिशाओं के आधार पर नहीं, बल्कि स्थानों की उपयोगिता के अनुसार मंदिर व्यवस्था विकसित की। उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर की प्रात:कालीन भस्म आरती और तिरुपति बालाजी की सुप्रभात सेवा का उदाहरण देते हुए कहा कि शंकराचार्य ने ऐसी पूजा-पद्धतियां स्थापित कीं, जो आज भी पूरे देश में समान रूप से प्रचलित हैं।  

अद्वैत: वाद नहीं, निर्विवाद सत्य: स्वामिनी विमलानंद

 ‘चिन्मय मिशन की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक यात्रा’ सत्र में  स्वामिनी विमलानंद सरस्वती,कोयम्बटूर ने कहा कि आदि शंकराचार्य ने अद्वैत की समृद्ध परंपरा स्थापित की, जबकि स्वामी चिन्मयानंद ने उसे जन-जन तक पहुँचाने का सशक्त कार्य किया। उन्होंने कहा कि आज देश में जब भी वेदांत की चर्चा होती है, तो उसका केंद्र अद्वैत ही होता है, और इसकी व्यापक स्वीकृति में चिन्मयानंद के प्रयासों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अद्वैत कोई वाद नहीं है, क्योंकि वाद का प्रतिवाद होता है, जबकि अद्वैत एक निर्विवाद सत्य है। स्वामी अद्वैतानंद ने चिन्मय मिशन के जनकल्याण कार्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत को केवल कृषि प्रधान देश कहना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह ‘ऋषि प्रधान देश’ है। स्वामी वेदतत्त्वानंद ने नचिकेता और यमराज के संवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि नचिकेता की प्रश्नशील बुद्धि हमें चिन्मयानंद में भी दिखाई देती है। कार्यक्रम में अद्वैत वेदांत के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले ‘शंकरदूतों’ को सम्मानित किया गया। यह सम्मान जूना पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज द्वारा प्रदान किया गया। इस अवसर पर चयनित श्रेष्ठ प्रस्तावों का प्रस्तुतीकरण भी किया गया।

समापन आज, मंत्री एवं जूना पीठाधीश्वर होंगे शामिल 

‘एकात्म पर्व’ का समापन कार्यक्रम मंगलवार, 21 अप्रैल को प्रात: 10 बजे से आयोजित अलंकरण समारोह से होगा, जिसमें प्रदेश सरकार के संस्कृति मंत्री धर्मेंद्र लोधी एवं जूना पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरि विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे इस अवसर पर देश-विदेश के 700 से अधिक युवा अभय घाट पर नर्मदा तट पर शंकरदूत के रूप में दीक्षा लेंगे।