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ईडी खोलेगी परिवहन में अवैध वसूली की परतें

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चार महीने सौरभ की संपत्तियों तक सिमटी रहीं तीन एजेंसियों की जांच 

भोपाल। परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा की संपत्तियों की पड़ताल के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) अब सौरभ की आय के मुख्य स्रोत अर्थात परिवहन विभाग की अवैध वसूली की परतें खोलेगा। ईडी अब छापे में मिले 52 किलो सोना, 235 किलो चांदी के विक्रेता और सौरभ की कमाई के मूल स्रोत तलाश रही है। 

उल्लेखनीय है कि परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा पर लोकायुक्त और आयकर विभाग की कार्यवाही के एक महीने बाद इस प्रकरण में शामिल हुए ईडी ने अब तक की जांच और पूछताछ में सौरभ के परिजनों, रिस्तेदारों, चेतन गौर, शरद जायसवाल सहित कंपनी और फर्मों के दूसरे भागीदारों के नाम मिली बेनामी संपत्तियों को सौरभ की काली कमाई माना है। ईडी के बाद लोकायुक्त टीम ने भी चेतन और शरद सहित अन्य लोगों के पास मिले सोना, चांदी, नकदी सहित अन्य संपत्तियों को सौरभ का बताया है। 


साथियों के बयानों के सत्यापन में जुटी ईडी 

ईडी अब तक सौरभ एवं उसके दोनों कारोबारी सहयोगियों शरद और चेतन से भी पूछताछ कर चुकी है। दोनों ने संपत्तियों को सौरभ का बताया है। दोनों ने ईडी को यह भी बताया है कि नौकरी छोडऩे के बाद भी परिवहन विभाग में सौरभ की अवैध कमाई करोड़ों में होती रही। उसी पैसे को सौरभ ने उनके और कंपनियों के नाम से अलग-अलग कारोबार में लगाया। चंूकि यह अवैध कमाई सार्वजनिक थी, इसलिए सौरभ ने अपने नाम से किसी भी कारोबार या संपत्ति में पैसा नहीं लगाया। अब ईडी इन दोनों के बयानों के आधार पर परिवहन चेक पोस्टों से अवैध कमाई की पड़ताल भी कर रही है। 


सौरभ के संरक्षकों तक पहुंचेगी ईडी! 

परिवहन चेक पोस्टों से करोड़ों कमाने वाला सौरभ शर्मा की कमाई का जरिया तलाशते हुए ईडी पता कर रही है कि चेक पोस्टों पर अवैध वसूली किसके आदेश पर और किसके द्वारा की जाती थी? सौरभ को अवैध वसूली व्यवस्था से जोडऩे वाला कौन था? किसके आदेश पर चेक पोस्टों से उसे अवैध वसूली के करोड़ों रुपये सौंपे जाते थे? इस अवैध वसूली में सौरभ और उसके संरक्षकों के बीच बंटवारा किस तरह होता था? ईडी की जांच इन सभी बिन्दुओं की ओर बढ़ रही है। उधर लोकायुक्त की पूछताछ में भी सौरभ के साथी कई राज उगल सकते हैं।