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अधिकारियों-कर्मचारियों की भारी कमी से जूझ रहा राज्य सूचना आयोग

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उप सचिव, अवर सचिव, लेखाधिकारी, शीघ्र लेखक जैसे सभी महत्वपूर्ण पद खाली 

भोपाल। मप्र राज्य सूचना आयोग इन दिनों अधिकारियों और कर्मचारियों की भारी कमी से जूझ रहा है। उप सचिव और अपर सचिव जैसे शीर्ष पदों के अलावा विधि अधिकारी, लेखाधिकारी और अनुविभाग अधिकारी जैसे सभी पद तो रिक्त हैं ही, मुख्य सूचना आयुक्त के लिए निज सचिव तक उपलब्ध नहीं कराया गया है। 

उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष करीब साढ़े 5 साल से अधिक समय तक आयुक्तों के सभी पद रिक्त रहने के बाद 10 सितम्बर 2024 को मुख्य सूचना आयुक्त के पद पर विजय यादव सहित तीन सूचना अयुक्तों उमाशंकर पचौरी, ओंकारनाथ और श्रीमती वंदना गांधी की नियुक्ति हुई और 18 सितम्बर को चारों ने पदभर ग्रहण किया था। आयुक्तों की पदस्थाना को करीब एक साल डेढ़ महीना हो चुका है। हर दिन तेजी से प्रकरणों के निराकरण भी हो रहे हैं, लेकिन स्टाफ की कमी के चलते कार्यालयीन  और प्रकरण संबंधी कामकाज अटक रहे हैं। 

शासन को लिखे कई पत्र, मिले सिर्फ आश्वासन 

आयोग में अधिकारियों और कर्मचारियों के रिक्त पदों पर नियुक्ति और पदस्थापना के लिए मुख्य सूचना आयुक्त श्री यादव और सचिव राजेश ओंगरे ने लगातार शासन (सामान्य प्रशासन विभाग) को पत्र लिखे हैं। सचिव श्री ओंगरे की अतिरिक्त मुख्य सचिव (जीएडी) के साथ बैठक भी हुई है। लेकिन जीएडी अधिकारियों की ओर से आउटसोर्स से पद भरने का आश्वासन भर मिला है।  

आउटसोर्स के भरोसे आयोग, फिर भी 33 पद खाली 

राज्य सूचना आयोग में अधिकारियों-कर्मचारियों के कुल 96 स्वीकृत पद हैं। वर्तमान में 65 पदों पर पदस्थाना और 31 पद रिक्त हैं। आयोग में पदस्थ 65 में से भी 8 प्रतिनियुक्ति और 19 आउटसोर्स कर्मचारी हैं। इसके अलावा 11 नियमित और 27 स्थायीकर्मी पदस्थ हैं।  चार निज सहायक में दो प्रतिनियुक्ति पर और दो आउटसोर्स पर सेवाएं दे रहे हैं। इसी प्रकार शीघ्र लेखक दो नियमित और एक आउटसोर्स से हैं। 


‘राज्य सूचना आयोग में अधिकारी-कर्मचारी स्तर के कई पद रिक्त हैं। निश्चित तौर पर इससे काम करने में परेशानी हो रही है। शासन को अवगत कराकर नियुक्तियों के लिए पत्र लिखे गए हैं।

विजय यादव, मुख्य सूचना आयुक्त

मप्र राज्य सूचना आयोग