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साढ़े आठ महीने में चालान पेश नहीं कर सकी लोकायुक्त टीम

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सौरभ के ठिकानों पर छापे की तैयारी में बैठी थी आयकर टीम, सुबह 6 बजे पहुंच गई लोकायुक्त टीम 

भोपाल। परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा के ठिकानों पर लोकायुक्त के छापे को करीब साढ़े आठ महीने हो चुके हैं, लेकिन अब तक चालान पेश नहीं हो सका है। चालान में देरी के चलते लोकायुक्त प्रकरण में सौरभ और उसके दोनों साथियों चेतन गौर और शरद जायसवाल को विशेष न्यायालय से जमानत मिल चुकी है। हालांकि प्रवर्तन निदेशालय के प्रकरण में सौरभ और शरद अभी जेल में हैं, जबकि तीसरा साथी चेतन 3 सितम्बर तक उच्च न्यायालय दी गई अस्थायी जमानत पर जेल से बाहर है।  

ईडी चार महीने में पेश कर चुकी चालान 

प्रवर्तन निदेशालय इस मामले में एक महीने बाद जुड़ा लेकिन ईडी 8 अप्रैल 2025 को न्यायालय में चालान पेश कर दिया है। ईडी ने चेतन की कार से मिले सोने और नकदी सहित कंपनियों में निवेश राशि को भी सौरभ की काली कमाई बताते हुए न्यायालय में इसकी कुर्की का आवेदन भी किया है। लेकिन सबसे पहले छापा मारने वाली आयकर विभाग की टीम द्वारा न्यायालय में चालान पेश नहीं किए जाने से लोकायुक्त की कार्यशैली पर फिर से सवाल खड़े हो रहे हैं। 

बिना कार्यवाही हर बार बढ़ रहीं तारीखें 

सौरभ और उसके साथियों के मामले में भोपाल जिला न्यायालय में बिना किसी ठोस कार्रवाई या निर्णय के लोकायुक्  और ईडी प्रकरणों में बार-बार न्यायालय में तारीखें बढ़ाई जा रही हैं। पिछली पेशी 30 अगस्त को थी जो बढक़र 13 सितम्बर हो गई थी। इस दिन शनिवार के साथ-साथ लोक अदालत रहेगी, न्यायालधीशों के लोक अदालत में व्यस्तता के चलते एक बार फिर से पेशी बढ़ सकती है। 

प्रकरण में अब तक क्या-क्या हुआ

18 दिसम्बर 2024 को सुबह 6 बजे लोकायुक्त टीम ने सौरभ शर्मा के अरेरा कॉलोनी स्थित दो ठिकानों (घर और कार्यालय) पर छापा मारा था। सौरभ के ठिकानों से मिली चल-अचल संपत्तियों को सार्वजनिक किए बिना दिनभर चली कार्रवाई संदेह के घेरे में भी रही। क्योंकि लोकायुक्त की कार्रवाई के बीच सौरभ के ठिकाने से उसके साथी चेतन के नाम पर पंजीकृत एक कार निकल भागी, जिसमें 11 करोड़ नकदी और 52 किलो सोना रखा था। चूंकि आयकर विभाग भी सौरभ के ठिकानों पर कार्रवाई के लिए तैयार बैठा था, लेकिन लोकायुक्त के छापे के बाद उसे पीछे हटना पड़ा था। नकदी और सोने से भरी कार के निकल भागने की सूचना मिलते ही आयकर विभाग की टीम इस कार के पीछे लगी और आखिर मेंडोरी के जंगल में इस कार से 11 करोड़ नकदी और 52 किलो सोना जब्त किया था। यह दोनों ही एजेंसियां की जांच सौरभ की भोपाल में जब्त संपत्तियों तक सिमटी रही। लेकिन एक महीने बाद प्रवर्तन निदेशालय इस प्रकरण में शामिल हुआ और ग्वालियर, जबलपुर और भोपाल में सौरभ, चेतन और शरद के ठिकानों के अलावा परिजनों व कुछ रिस्तेदारों के ठिकानों पर भी छापे मारे। इन छापों में सामने आया कि सौरभ ने उसके रिस्तेदारों, दोस्तों और परिजनों के नाम से फर्मों, कंपनियों और सोसायटी के नाम से बड़ी मात्रा में पैसा निवेश किया है। कंपनियों में डायरेक्टर, चेयरमैन जैसे पदों पर होने के कारण ईडी ने सौरभ, चेतन और शरद के अलावा सौरभ की माँ श्रीमती उमा शर्मा, पत्नी श्रीमती दिव्या तिवारी, साले रोहित तिवारी और मौसेरे जीजा विनय हासवानी को भी आरोपी बनाया। हालांकि सौरभ द्वारा इन संपत्तियों में निवेश राशि स्वयं की होने की बात स्वीकारी इस आधार पर न्यायालय ने ईडी प्रकरण में चारों को जमानत दे दी थी। ईडी प्रकरण में सौरभ, शरद, चेतन की जमानत उच्च न्यायालय से भी खारिज हो चुकी है। हालांकि चेतन को बीमार पत्नी और नवजात बच्चों की देखभाल के लिए पहले 14 दिन और फिर 7 दिन की अस्थायी जमानत मिली है।