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अपराध

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फर्जीवाड़ा कर मप्र कोटे से चिकित्सक बने एक और आरोपी को जेल, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने की थी फर्जी मूल निवासी से मप्र कोटे की सीट हथियाने की शिकायत

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भोपाल। 17 साल पहले व्यापम के माध्यम से कराई जाने वाली पीएमटी की परीक्षा में शामिल होकर मप्र कोटे की मेडिकल सीट हथियाने के लिए फर्जीवाड़ा कर मप्र का फर्जी मूल निवासी प्रमाण पत्र बनवाने वाले उप्र के रहने वाले एक और डॉक्टर को भोपाल के अपर सत्र न्यायालय ने तीन वर्ष के कारावास एवं 2 हजार रुपये के अर्थदण्ड की सजा सुनाई है। विगत मंगलवार को भी न्यायालय ने एक आरोपी डॉक्टर को इतनी ही सजा सुनाई थी। इस मामले में शिकायत पूर्व मुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने भोपाल, एसटीएफ से की थी। 

भोपाल जिला न्यायालय के 23वें अपर सत्र न्यायाधीश अतुल सक्सेना ने आरोपी डॉ. सीतराम पुत्र नत्थीलाल शर्मा निवासी उप्र को दोष सिद्ध पाते हुए तीन अपराधिक अपराधों की धाराओं के तहत तीन-तीन वर्ष के सश्रम कारावास एवं 500-500 रुपये के अर्थदण्ड व एक अपराध में 2 वर्ष के कारावास एवं 500 रुपये के अर्थदण्ड की सजा सुनाई है। 

इस तरह खुला धोखाधड़ी का राज 

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने एसटीएफ भोपाल में शिकायत की गई थी कि व्यापाम वर्ष 2006 के बाद जो परीक्षाएं आयोजित हुई है, उनमें घोटाला हो रहा है। उत्तर प्रदेश के मूल निवासी मध्यप्रदेश का कूटरचित मूल निवासी प्रमाण पत्र बनवाकर कर मध्यप्रदेश कोटे की मेडिकल सीट पर प्रवेश ले रहे है।  पुलिस थाना एसटीएफ भोपाल ने आरोपी सीताराम शर्मा निवासी उप्र पर व्यावसायिक परीक्षा मण्डल भोपाल द्वारा आयोजित वर्ष 2009 की पीएमटी परीक्षा में शामिल होकर एवं परीक्षा उत्तीर्ण होने पर म.प्र. राज्य कोटा की मेडिकल सीट पर प्रवेश लिया। इसके लिए उसने कूटरचित मूल निवासी प्रमाण पत्र का उपयोग किया। एसटीएफ ने आरोपी के विरुद्ध धारा 420, 467, 468, 471 भादवि का अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना मे लिया था। 

डॉक्टर बनकर भिण्ड में बना चिकित्सा अधिकारी 

उप्र के इस मूल निवासी आरोपी सीतराम शर्मा ने माध्यिमक शिक्षा परिषद उत्तरप्रदेश से 1984 हाईस्कूल की परीक्षा एवं 2001 मे इंटरमीडियेट की परीक्षा उत्तीर्ण की थी। अभियुक्त वर्तमान मे जिला भिण्ड मे शासकीय चिकित्यालय मे चिकित्सा अधिकारी के शासकीय पद पर पदस्थ है। उसके मप्र के फर्जी मूल निवासी प्रमाण पत्र की जांच में पता चला कि वह तहसील अम्बाह जिला मुरैना से जारी नहीं हुआ था।