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अपराध

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2306 के स्थान पर 418 वर्गमीटर का बताया वेयरहाउस, ईओडब्ल्यू ने दर्ज की एफआईआर, 24.19 लाख की स्टाम्प शुल्क चोरी पर ईओडब्ल्यू ने दर्ज की एफआईआर

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भोपाल। सीहोर जिले के ग्राम उदयपुरा में खरीदी गई 1.320 हेक्टेयर भूमि और उस भूमि पर बनाए गए 2768.38 वर्गमीटर के वेयरहाउस के पंजीयन के दौरान भूमि और निर्माण क्षेत्र को साढ़े पांच गुना कम बताकर 24.19 लाख रुपये का स्टाम्प शुल्क एवं पंजीयन शुल्क चोरी करने के मामले में मप्र आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ भोपाल ने प्रकरण पंजीबद्ध किया है।

ईओडब्ल्यू द्वारा दर्ज एफआईआर के अनुसार वर्ष 2019 में ग्राम उदयपुरा जिला सीहोर की 1.320 हेक्टेयर भूमि तथा उस पर निर्मित वेयरहाउस को यूको बैंक, भोपाल से 1.80 करोड़ रुपये में खरीदे जाने एवं उस भूमि पर 2768.38 वर्गमीटर का वेयरहाउस, जिसकी कीमत 4.98 करोड़ रुपये दर्शाई गई, जो वास्तविक कीमत से बहुत कम थी। ईओडब्ल्यू ने पाया कि इस प्रकरण में डॉ. रमन गोवर्धन अरोरा, प्रोपराइटर/डायरेक्टर मेसर्स कॉमकाक्स कमोडिटी एण्ड इंस्पेक्शंस प्राइवेट लिमिटेड, सुरेश प्रसाद कौशल, प्रोपराइटर मेसर्स दर्पण रायपुर सहित अन्य संबंधित व्यक्तियों ने मिलकर स्टाम्प ड्यूटी और पंजीयन शुल्क की चोरी की है। इस भूमि एवं वेयरहाउस के क्रय-विक्रय में अनियमितताओं को लेकर आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ने जांच के बाद प्रकरण दर्ज किया है। 

दो साल पहले मिली थी स्टाम्प कर चोरी की शिकायत

इस मामले में स्टाम्प ड्यूटी एवं पंजीयन शुल्क चोरी कर शासन को आर्थिक क्षति पहुंचाने को लेकर आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ को वर्ष 2023 में एक शिकायत मिली थी। शिकायत में वेयरहाउस एवं उससे संबंधित भूमि के क्रय-विक्रय में गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए थे। शिकायतकर्ता ने बताया गया कि एक ही संपत्ति को गलत तथ्यों के आधार पर दो अलग-अलग विक्रय पत्रों के माध्यम से बेचा गया है एवं वेयरहाउस के वास्तविक क्षेत्रफल को जानबूझकर कम दर्शाया गया। संपत्ति का बाजार मूल्य अत्यंत कम दिखाकर शासन को स्टाम्प ड्यूटी एवं पंजीयन शुल्क में भारी नुकसान पहुंचाया गया है। शिकायत की गंभीरता को देखते हुए इसे आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ने सत्यापन एवं जांच में लिया। 

जांच में सिद्ध हुए शिकायत में लगे आरोप 

ईओडब्ल्यू की जांच में पता चला कि वर्ष 2019 में उक्त संपत्ति यूको बैंक, शाखा मालवीय नगर भोपाल द्वारा सरफेसी अधिनियम के अंतर्गत नीलामी के माध्यम से खरीदी गई थी। उस समय संपत्ति में कुल 1.320 हेक्टेयर भूमि के साथ लगभग 2768.38 वर्ग मीटर क्षेत्रफल का निर्मित वेयरहाउस स्पष्ट रूप से दर्ज था। संबंधित विक्रय पत्र में संपत्ति का बाजार मूल्य लगभग पांच करोड़ रुपये दर्शाया गया था तथा नियमानुसार स्टाम्प शुल्क एवं पंजीयन शुल्क भी जमा किया गया। वर्ष 2021 में उसी संपत्ति को दो अलग-अलग विक्रय पत्रों के माध्यम से एक ही क्रेता को बेचा गया। इन विक्रय पत्रों में संपत्ति का स्वरूप बदलकर प्रस्तुत किया गया। एक विक्रय पत्र में भूमि को सिंचित कृषि भूमि बताया गया, जबकि दूसरे विक्रय पत्र में वेयरहाउस का क्षेत्रफल मात्र 418 वर्ग मीटर दर्शाया गया। दोनों विक्रय पत्रों में संपत्ति का कुल बाजार मूल्य लगभग 96 लाख रुपये दिखाया गया, जो वर्ष 2019 में दर्शाए गए बाजार मूल्य की तुलना में अत्यंत कम था।

अभिलेखों के परीक्षण में पता चला कि विक्रय पत्रों के पंजीयन के समय पूर्व में पंजीकृत विक्रय पत्र का उल्लेख जानबूझकर नहीं किया गया। बाद में पंजीयन विभाग द्वारा की गई कार्यवाही में यह आधिकारिक रूप से प्रमाणित हुआ कि दोनों विक्रय पत्रों में स्टाम्प ड्यूटी एवं पंजीयन शुल्क की कमी की गई थी, जिसके कारण शासन को लाखों रुपये की राजस्व हानि हुई। इन तथ्यों के आधार पर ईओडब्ल्यू ने भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 120-बी (आपराधिक षड्यंत्र), 467, 468 (जालसाजी) एवं 471 (जाली दस्तावेज का उपयोग) के अंतर्गत प्रकरण पंजीबद्ध किया गया है। 

इन्हें बनाया आरोपी 

डॉ. रमन गोवर्धन अरोरा, मेसर्स कॉमकाक्स कमोडिटी एण्ड इंस्पेक्शंस प्राइवेट लिमिटेड से संबंधित व्यक्ति, सुरेश प्रसाद कौशल, प्रोपराइटर मेसर्स दर्पण रायपुर तथा अन्य संबंधित व्यक्ति।