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राजधानी

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दलहन, तिहलन उत्पादन में दूसरे, मक्का-सोयाबीन में शीर्ष पर मध्यप्रदेश, कृषि मंत्री कंषाना ने बताई विभाग की दो साल की उपलब्धियां

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भोपाल। मध्यप्रदेश में कृषि उत्पादन एवं किसान कल्याण के कई नवाचार हुए हैं। कई किसान हितैषी निर्णय लिए गए हैं। यही कारण है कि मप्र मक्का एवं सोयाबीन उत्पादन में देश में पहले स्थान पर एवं गेहँू, उड़द, मसूर, चना, सरसों, कुल तिलहन, कुल दलहन, कुल खाद्यान्न एवं कुल मोटा अनाज उत्पादन में दूसरे स्थान पर है। मध्यप्रदेश की डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली सरकार के दो वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में मीडिया से विभागीय उपलब्ध्यिां साझा करते हुए यह जानकारी मप्र के किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री एदल सिंह कंषाना ने दी। 

समर्थन मूल्य में खरीदा 2.41 करोड़ मी.टन अनाज 

मंत्री कंषाना ने बताया कि सरकार ने विगत 2 वर्षों में 48 लाख 51 हजार किसानों से 2 करोड़ 41 लाख 31 हजार मेट्रिक टन अनाज खरीदा है। इसके लिए किसानों को 81 हजार सात सौ अड़सठ करोड़ रुपये का भुगतान उनके खातों में किया गया है। सोयाबीन की फसल के लिए भावांतर भुगतान योजना लागू कर 9.36 लाख कृषकों का पंजीयन हुआ। अब तक छह लाख किसानों ने मंडियों में 13.89 लाख मी.टन सोयाबीन का किया। मुख्यमंत्री ने दो बार में 2.67 लाख किसानों के खाते में 482 करोड़ रुपये अंतरित किए। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में 70 लाख किसानों के आवेदनों पर 1233 करोड़ 54 लाख रुपये का दावा भुगतान किया गया। प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री  किसान सम्मान निधि योजना में अप्रैल, 2025 से अब तक 1.68 करोड़ किसानों को 6756 करोड़ का भुगतान हुआ। इसके अलावा सरकार की विभिन्न योजनाओं में किसानों को लाभ पहुंचाया गया है। 

केन्द्र से खाद पर हर साल दो लाख करोड़ की सब्सिडी 

मंत्री कंषाना ने कहा कि भारत सरकार हर साल खाद पर दो लाख करोड़ की सब्सिडी किसानों को देती है। राज्य सरकार ने दो साल में अब तक 72 लाख मेट्रिक टन यूनिया एवं 42 लाख मी.टन डीएपी, एनपीके वितरित किया गया। पिछले साल इसी अवधि में यूरिया तीन लाख दस हजार मेट्रिक टन अधिक विक्रय किया जा चुका है एवं वर्तमान में ढाई लाख मेट्रिक टन यूरिया भण्डारित है। मंत्री ने बताया कि किसानों को लंबी कतारों और अनियमित वितरण को समाप्त करने ई-विकास (वितरण एवं कृषि उर्वरक आपूर्ति समाधान)लागू की है। परंपरागत कृषि विकास योजना से प्रमाणित जैविक खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है। कृषकों को राशि रूपये पांच हजार प्रति हैक्टेयर प्रति वर्ष अनुदान दिया जाता है। नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित एवं बढावा देने के लिये योजना संचालित है। प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना और  दलहनों में आत्मनिर्भरता मिशन से भी किसानों को लाभान्वित किया जा रहा है। 

किसानों के लिए आगे यह करेगी सरकार 

- ई-विकास प्रणाली अंतर्गत किसानो को उर्वरक की होम डिलीवरी सेवा।

- प्रदेश में मौसम आधारित बीमा योजना शीघ्र ही प्रारंभ की जाएगी।

- भावांतर योजनांतर्गत कृषकों को मूंगफली एवं सरसों का लाभ दिया जायेगा।

- नमो ड्रोन दीदी योजनांतर्गत आगामी वर्ष में एक हजार छियासठ किसान ड्रोन, महिला  स्व-सहायता समूह को प्रदान कर उन्हें स्वावलंबी बनाया जाएगा। 

- नरवाई प्रबंधन अंतर्गत सीबीजी प्लांट के साथ पराली को वैकल्पिक ऊर्जा स्त्रोत के रूप में व्यवसायिक मॉडल विकसित किया जा रहा है।

आगले साल कृषि वर्ष मनाएगी सरकार 

वर्ष 2026 को सरकार कृषि वर्ष के रूप में मनाएगी। इसके तहत समन्वित रूप से कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में कृषकों की आय में वृद्धि के प्रयास होंगे। कृषि को प्राकृतिक खेती के माध्यम से जलवायु अनुकूल बनाया जाएगा। किसानों की उपज के लिए उचित मूल्य तय किया जाएगा। तकनीकी सुधार एवं यंत्रीकरण होगा। डिजीटल एग्री के माध्यम से क्षेत्र का आधुनिकीकरण करना एवं कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में विविधीकरणको बढ़ावा दिया जाएगा। एवं मूल्य संवर्धन के माध्यम से नये रोजगार सृजन किए जाएंगे। वर्ष 2026 में पराली जलाने की समस्या को चालीस प्रतिशत कम किए जाने का लक्ष्य है। उन्नत तकनीकी का उपयोग कर सरकार पराली प्रबंधन करेगी। प्रदेश की 259 मंडियों में ई-मण्डी योजना लागू है। आगामी तीन सालों में सभी मंडियों को आधुनिक बनाया जाएगा। 

सवालों के जवाब नहीं दे सके मंत्री, पढक़र सुनाई  उपलब्धियां

कृषि मंत्री कंषाना पत्रकारों के सवालों के जवाब नहीं दे सके। सवालों में उलझे मंत्री के स्थान पर सचिव निशांत बरबड़े और मंडी बोर्ड के डायरेक्टर कुमार पुरुषोत्तम ने दिए। क्या किसान कर्जमाफी योजना सरकार ने बंद कर दी है? उत्तर में मंत्री कंषाना ने कहा, यह योजना कमलनाथ सरकार की थी, भाजपा के संकल्प पत्र में ऐसी कोई घोषणा भी नहीं थी, न ही इस सरकार में ऐसी कोई योजना है। विभाग की दो साल की उपलब्धियां और भावी कार्योजना भी मंत्री कंषाना ने अक्षरश: पढक़र बताईं।