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अपराध

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ठीक एक साल पहले 19 दिसंबर को पड़े थे सौरभ शर्मा के ठिकानों पर छापे, सोने - चांदी की सिल्लियों के साथ मिली थी 11 करोड़ नकदी

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भोपाल। परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा के भोपाल स्थित ठिकानों पर ठीक एक साल पहले आज के ही दिन 19 नवंबर 2024 को पहले सुबह 6 बजे लोकायुक्त ने छापा मारकर कीमती गहने, करोड़ों की कई संपत्तियों के दस्तावेज और 235 किलो चांदी की सिल्लियां बरामद की थीं। वहीं उसी रात आयकर टीम ने मेंडोरा गांव के जंगल के बीच मौसेरे जीजा और उनके पार्टनर पूर्व उपपंजीयक के के अरोरा के फार्म हाउस के बाहर खड़ी चेतन गौर के नाम की सौरभ की कार से 52 सोने की सिल्लियां और 11 करोड़ नकदी बरामद की थी। बाद में इस मामले पर प्रवर्तन निदेशालय (ed) ने लोकायुक्त कार्रवाई में मिली बेहिसाब संपत्ति के चलते स्वतः संज्ञान लेकर प्रकरण दर्ज किया था। खास बात यह है कि लोकायुक्त प्रकरण में सौरभ और उसके दोनों आरोपी साथी चेतन गौर और शरद जायसवाल को जमानत मिल चुकी है, लेकिन ed प्रकरण में उच्च न्यायालय जबलपुर से भी तीनों की जमानत खारिज हो चुकी है। परिजन अब सर्वोच्च न्यायालय से जमानत के प्रयास में है, लेकिन यहां से भी जमानत मिल पाने की संभावना कम ही है।

लोकायुक्त की कार्रवाई संदेह के घेरे में, ed के भी थामे पैर

सौरभ शर्मा मामले में लोकायुक्त की कार्रवाई पहले दिन से ही संदेह के घेरे में रही है। छापे के बीच से सोना और नकदी से भरी कार का निकल भागना। इसके बाद लंबे समय तक सौरभ के ठिकानों से मिली संपत्तियों और उसकी कुल कीमत को सार्वजनिक नहीं। करना लोकायुक्त की कार्रवाई को संदेह के घेरे से कहीं अधिक मिलीभगत तक इशारा करती है। इनकम टैक्स की कार्रवाई में   50 करोड़ से ज्यादा की नकदी - सोना मिलने के बाद भी दूसरे ठिकानों पर पड़ताल नहीं करना, दबाव और प्रभाव की ओर इशारा कर गया। लेकिन जिस ed टीम से भरपूर आशाएं थीं, वह भी सिर्फ सौरभ, चेतन, शरद, उनके परिजनों और सौरभ के कुछ रिश्तेदारों से आगे नहीं बढ़ सकी। खास बात यह है कि विभाग में सौरभ के सहयोगी बनकर वसूली कलेक्शन और वितरण व्यवस्था से जुड़े कुछ rti, tsi और साथी आरक्षकों को नोटिस और पूछताछ हो चुकी है। लेकिन  कार्रवाई एक इंच भी आगे नहीं खिसक सकी है।