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मंत्रि-परिषद: 48 करोड़ से होगी छह वन विज्ञान केन्द्रों की स्थापना

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तीन सिंचाई परियोजनाओं में डूब प्रभावितों के लिए 1782 करोड़ का विशेष पैकेज मंत्रि-परिषद से स्वीकृत 

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक मंगलवार को मंत्रालय में हुई। मंत्रि-परिषद ने अनूपपुर, मंडला और डिंडोरी जिलों में अपर नर्मदा परियोजना, राघवपुर बहुउद्देशीय परियोजना और बसानिया बहुउद्देशीय परियोजना के डूब प्रभावितों के लिए 1,782 करोड़ रुपये का विशेष पैकेज स्वीकृत किया गया। यह पैकेज डीपीआर में प्रावधानित 1656 करोड़ 2 लाख रुपये के अतिरिक्त अतिरिक्त होगा। इसके अलावा सरकार ने राज्य में 6 वन विज्ञान केंद्र की स्थापना के लिए 48 करोड़ रूपये की स्वीकृति प्रदान की है। 

उल्लेखनीय है कि अपर नर्मदा परियोजना, राघवपुर बहुउद्देशीय परियोजना और बसानिया बहुउद्देशीय परियोजना 5,512 करोड़ 11 लाख रूपये की है। इससे 71 हजार 967 हेक्टेयर की सिंचाई सुविधा और 125 मेगावाट विदयुत उत्पादन प्रावधानित है। इन तीनों परियोजनाओं से कुल 13 हजार 873 परिवार प्रभावित होंगे। 

वन विज्ञान केंद्रों की स्थापना के लिए राशि स्वीकृत

मंत्रि-परिषद ने वित्तीय वर्ष 2025-26 से 2029-30 तक राज्य में 6 वन विज्ञान केंद्र की स्थापना के लिए 48 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी है। स्वीकृति अनुसार प्रदेश में वन क्षेत्र के बाहर वानिकी विस्तार गतिविधियों को बढ़ाने, वन भूमि की उत्पादकता बढ़ाने, काष्ठ के विदोहन से अतिरिक्त आय के साधन के लिए जागरूकता बढ़ाने, वृक्ष खेती को बढ़ावा देने और कृषि वानिकी को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से वन विज्ञान केंद्र की स्थापना की जा रही है। अशासकीय संस्था द्वारा भी वन विज्ञान केंद्र की स्थापना, वन विभाग की अनुमति से की जा सकेगी।

कर्मचारियों की सात श्रेणियां होंगी समाप्त 

सरकार ने शासकीय विभागों में कामकाज के लिए भर्ती की सात श्रेणियों को समाप्त करेन का निर्णय लिया है। इनमें दैनिक वेतन भोगी, अंशकालीन, कार्यभारित, स्थायीकर्मी सहित तीन अन्य को समाप्त किया गया है। अब सिर्फ तीन श्रेणियां नियमित, संविदा, आउटसोर्स कर्मचारी रहेंगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि अब कर्मचारियों की स्थायी और अस्थायी श्रेणियां नहीं रहेगी। क्योंकि इनकी सेवा शर्तें, वेतन और पेंशन समान हैं। समाप्त की गई श्रेणियों में कार्यरत कर्मचारी अपने सेवाकाल तक कार्य करते रहेंगे। उनकी सेवानिवृत्ति के बाद यह पद स्वत: समाप्त हो जाएगा। विभाग से कर्मचारी की मांग आने पर उस पद के विरुद्ध नियमित पद का सृजन कर भर्ती की जाएगी। इसके अलावा वर्तमान में कार्यरत कार्यभारित कर्मचारी की सेवाकाल में मृत्यु होने पर उसके आश्रित को नियमित पद पर अनुकंपा नियुक्ति देने का भी निर्णय लिया है।

स्थायी में परिवर्तित होंगे कर्मचारियों के स्वीकृत अस्थायी पद 

मंत्रि-परिषद ने राज्य शासन के विभिन्न विभागों में स्वीकृत स्थायी और अस्थायी पदों के विभेदीकरण को समाप्त करने के लिए स्वीकृति प्रदान की गई है। वर्तमान स्वीकृत अस्थायी पदों को स्थायी पदों में परिवर्तित करने के लिए सेवा भर्ती नियम में आवश्यक प्रावधान करने की स्वीकृति दी गई। कार्यभारित और आकस्मिक स्थापना के सभी पदों को सांख्येतर घोषित कर इन पदों पर नवीन नियुक्ति न करने की भी अनुमति दी गई।

यह भी हुए निर्णय 

- मंत्रि-परिषद ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए मुख्यमंत्री ग्राम सडक़ एवं अवसंरचना योजना में विभाग में 10 लाख या उससे अधिक लागत राशि के कार्य स्वीकृत किए जाने की अनुमति प्रदान की गई। 693.76 करोड़ से 3810 कार्य पूरे किए जा सकेंगे। 

- मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना को वर्ष 2030-31 तक निरंतर रखने की स्वीकृति दी गई है साथ ही योजना के तहत 905 करोड़ 25 लाख रुपये के व्यय की स्वीकृति प्रदान की है। 

90.67 करोड़ से होगी मेट्रो संचालन में नुकसान की भरपाई 

मंत्रि-परिषद ने भोपाल एवं इंदौर मेट्रो रेल परियोजना के संचालन और रखरखाव के लिए वर्ष 2025-26 के लिए राजस्व मद में 90 करोड़ 67 लाख रुपये के बजट की स्वीकृति प्रदान की है। मेट्रो संचालन में पर्याप्त यात्री नहीं मिलने की स्थिति में संचालनकर्ता कंपनी को होने वाले नुकसान की भरपाई सरकार करेगी।