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मध्यप्रदेश

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पदोन्नति के पदों पर नहीं कर सकते सीधी भर्ती

मध्यप्रदेश

-मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने निरस्त किया भर्ती विज्ञापन
भोपाल। पदोन्नति के पद सीधी भर्ती से नहीं भरे जा सकते हैं। पदोन्नति में आरक्षण विवाद के बीच यह निर्देश मप्र हाईकोर्ट ने दिये हैं। इसके साथ ही गांधी मेडिकल कॉलेज द्वारा डॉक्टरों की भर्ती के लिये विज्ञापन भी अवैध बताते हुए निरस्त कर दिया है। जबकि प्रबंधन ने तर्क दिया था कि सर्वोच्च न्यायालय के स्थगन के कारण पदोन्नति नहीं दी जा सकती है। इसलिये पदों को सीधे भरने का फैसला किया गया।
       दरअसल भोपाल निवासी डॉ. रजनी ठाकुर ने दायर याचिका में बताया था कि एनेस्थीसिया विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर का पद पदोन्नति द्वारा भरा जाना चाहिए था। वह कॉलेज के एनेस्थीसिया विभाग में 12 वर्षों से अधिक समय से सहायक प्रोफेसर के रूप में कार्यरत थीं। इसलिए उन्हें इस पद पर पदोन्नति मिलनी चाहिए थी। कॉलेज प्रबंधन द्वारा पदोन्नति प्रदान करने की बजाय सीधी भर्ती से इसे भरने का निर्णय ले लिया। जस्टिस विवेक जैन की एकलपीठ ने इसकी सुनवाई करते हुए पाया कि स्वायत्तशासी कॉलेज की कार्यकारिणी ने सीधी भर्ती के पदों का विज्ञापन देने से पहले आंतरिक उम्मीदवारों की पदोन्नति की प्रक्रिया पर निर्णय नहीं लिया था।  
अदालत ने यह भी कहा
एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है पदोन्नति द्वारा पद भरने में कानूनी बाधा है, इसलिए उन्होंने सीधी भर्ती को आगे बढ़ाया है और इसे आंतरिक उम्मीदवारों तक सीमित कर दिया है। स्वायत्तशासी कॉलेज की कार्यकारिणी ने सीधी भर्ती के पदों का विज्ञापन देने से पहले आंतरिक उम्मीदवारों की पदोन्नति की प्रक्रिया पर निर्णय नहीं लिया।
ऐसे समझे मामला
याचिका में कहा गया था नियम अनुसार फीडर लाइन से पदोन्नति द्वारा भरा जाने वाला पद सीधी भर्ती से नहीं भरा जा सकता है। अस्पताल प्रबंधन ने इसके जबाव में बताया कि सर्वोच्च न्यायालय के स्थगन के कारण पदोन्नति नहीं दी जा सकती है। इसलिये राज्य सरकार ने सीधी भर्ती के माध्यम से पदोन्नति के पदों को भरने की अनुमति प्रदान की है।