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मध्यप्रदेश

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11 को आरोप पत्र के लिए और समय मांगेगी ईडी!

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लोकायुक्त मामले में आसानी से जमानत ले चुके सौरभ शर्मा के लिए ईडी मामले में राह आसान नहीं 

भोपाल। आय से अधिक संपत्ति मामले में लोकायुक्त द्वारा दर्ज प्रकरण में परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा को आसानी से जमानत मिल गई। गिरफ्तारी के 62 दिनों में चालान पेश नहीं किया जाना जमानत का आधार बना। अब प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दर्ज प्रकरण में भी सौरभ के परिजनों ने जमानत आवेदन लगाया है, जिस पर 11 अप्रैल को सुनवाई होनी है। लेकिन यहां सौरभ को इतनी आसानी से जमानत मिल पाना आसान नजर नहीं आ रहा है, क्योंकि चालान पेश किए जाने को लेकर ईडी न्यायालय में न तो चालान में देरी का आधार काम करेगा और न ही लोकायुक्त मामले में मिली जमानत ही इसका आधार बनेगी। इस जमानत आवेदन पर बहस के बीच ईडी चालान पेश करने के लिए न्यायालय से और अधिक समय की मांग कर सकती है। 

उल्लेखनीय है कि लोकायुक्त द्वारा दर्ज प्रकरण में 62 दिनों बाद भी चालान पेश नहीं किए जाने के आधार पर विशेष न्यायालय (लोकायुक्त) ने सौरभ शर्मा और उसके साथियों शरद जायसवाल और चेतन गौर को एक अप्रैल को जमानत दे दी थी। सौरभ के परिजनों ने वकील के माध्यम से विशेष न्यायालय (धन शोधन निवारण अधिनियम) में भी जमानत आवेदन लगाया है, जिस पर 11 अप्रैल को सुनवाई होनी है। सौरभ के वकील यहां भी चालान में देरी और विशेष न्यायालय (लोकायुक्त) से मिली जमानत को आधार बना सकते हैं। चालान में देरी को इस आधार पर ईडी प्रकरण में मान्य नहीं होगा, क्योंकि सौरभ और उसके साथियों की ईडी द्वारा गिरफ्तारी करीब एक माह देरी से हुई। 5 फरवरी को ईडी ने न्यायालय की अनुमति से जेल में पहली बार तीनों आरापियों से पूछताछ शुरू की थी। 

आरोप पत्र के लिए ईडी बढ़वा सकती है समय 

आगामी 11 अप्रैल को विशेष न्यायालय (पीएमएलए) में पेशी के दौरान सौरभ सहित तीनों आरोपियों के वकील जमानत की मांग करेंगे। वहीं प्रवर्तन निदेशालय संभवत: इस तरीख तक आरोप पत्र पेश नहीं कर सके। इसके लिए ईडी न्यायालय से और अधिक समय की मांग कर सकता है। हालांकि ईडी ने सौरभ की कार में मिले 52 किलो सोना, 11 करोड़ नकदी सहित सौरभ के परिजनों, परिचितों के नाम मिली संपत्तियों को भी सौरभ की मानकर जब्त कर लिया है। इसका फायदा चेतन और शरद को जमानत के लिए जरूर मिल सकता है। 

उच्च न्यायालय भी जा सकते हैं परिजन

आगामी 11 अप्रैल को विशेष न्यायालय (पीएमएलए) से जमानत नहीं मिल पाने की स्थिति में सौरभ के परिजन उच्च न्यायालय में भी जमानत आवेदन लगा सकते हैं। सूत्र बताते हैं कि वकीलों ने इसकी तैयारी भी कर ली है। परिजन किसी भी तरह सबसे पहले सौरभ को जेल से बाहर निकालना चाहते हैं।