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मध्यप्रदेश

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इकबाल सिंह बैंस ने ‘पद का दुरुपयोग’ करके बेलवाल को बनवाया था सीईओ

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-पूर्व मुख्यमंत्री को भी गुमराह किया, पूर्व मंत्री और एसीएस की आपत्ति को भी दरकिनार किया
-सरकार ने विधानसभा में दी आजीविका मिशन में नियुक्ति से जुड़ी नस्तियां
भोपाल। प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस ने आजीविकास मिशन के ओएसडी ललित मोहन बेलवाल को मिशन के सीईओ प्रभार देने में ‘पद का दुरुपयोग’ किया था। साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को भी गुमराह किया। इतना ही नहीें पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के तत्कालीन अपर मुख्य सचिव मनोज श्रीवास्तव और पंचायत मंत्री महेन्द्र सिंह सिसौदिया की टीप को भी दरकिनार किया गया था। श्रीवास्तव ने अपनी टीप  में लिखा था कि यह ‘कलर्ड एक्सरसाइस ऑफ पॉवर’ (पद का दुरुपयोग) है। जिसका पूर्व मंत्री सिसौदिया ने भी समर्थन किया और बेलवाल को सीईओ का प्रभार देने का विरोध किया था। कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल के सवाल के जवाब में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल ने जो जानकारी विधानसभा में दी है।
इकबाल सिंह बैंस ने नोटशीट पर लिखा था कि अन्य विभागों में संविदा पद पदस्थ अधिकारियों को प्रमुख दायित्व सौंपे जाते रहे हैं। आजीविका मिशन में संविदा पर ओएसडी बनाए गए बेलवाल को इस शर्त पर मिशन के सीईओ का प्रभार दिया गया था कि यह नियुक्ति अस्थाई है। आईएएस की पदस्थापना होने तक हैं। इसके बाद 3 साल तक किसी आईएएस को आजीविका मिशन का सीईओ नहीं बनाया गया। 3 बाद संविदा नियुक्ति दी गई। कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल का आरोप है कि इस दौरान 3 हजार हजार करोड़ का पोषण आहार घोटाला हुआ है। साथ ही करोड़ों की खरीदी की गई। इस संबंध में विभाग की प्रमुख सचिव दीपाली रस्तोगी ने प्रतिक्रया देने से इंकार किया।
 बैंस ने ऐसे किया था ‘पॉवर’ का उपयोग
ललित मोहन बेलवाल को आजीविका मिशन सीईओ बनाने के लिए सबसे पहले 17 जुलाई 2020 को प्रभारी सीईओ शिल्पा गुप्ता (आईएएस) को हटाया गया।  29.7.2020 को बेलवाल को सीईओ बना दिया. विधानसभा में मिली जानकारी के अनुसार ललित मोहन बेलवाल दिसंबर 2018 मेंं सेवानिवृत्त हुए। 2020 में इकबाल सिंह के मुख्य सचिव बनने के बाद 18 जुलाई 2020 को संविदा आधार पर बेलवाल को ओएसडी बनाया गया। इससे एक दिन पहले 17 जुलाई को मिशन की प्रभारी सीईओ शिल्पा गुप्ता (आईएएस) को हटाया गया। 22 जुलाई को सीएस बैंस ने निर्देश दिए कि बेलवाल को सीईओ का प्रभार दिया जाए। सीएस की नोटशीट पर एसीएस मनोज श्रीवास्तव ने लिखा की सीईओ का पद आईएएस कैडर का है। संविदा कर्मी को वित्तीय कार्य वाला सीईओ नहीं बनाया जा सकता। मंत्री महेन्द्र सिसौदिया ने भी श्रीवास्तव का समर्थन किया। तब मुख्य सचिव बैंस ने लिखा कि बेलवाल को आईएएस की नियुक्ति होने तक सीईओ प्रभार दिया जाए। तब श्रीवास्तव ने नोटशीट पर फिर लिखा कि ‘यदि कोई कार्य किसी तय विशेष तरीके से किया जा सकता है तो उसे उसी मार्ग से किया जाय, किसी अन्य तरीके से नहीं किया जाए।’ इसके बाद बैस ने फिर पंचायत मंत्री के पास फाइल भेजी कि मुख्यमंत्री से बात हो गई है। बेलवाल की नियुक्ति अस्थाई है। आईएएस नियुक्त करेंगे। उसके बाद मुख्यमंत्री की टीप को कागज लगाकर दबा दिया गया। इसके बाद मुख्य सचिव ने अंतिम आदेश दिया कि ‘मा मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया है कि उपरोक्त अनुसार आदेश जारी करें।’ एसीएस श्रीवास्तव ने मुख्य सचिव की इस टीप पर आदेश जारी के निर्देश देते हुए लिखा कि इस आदेश की प्रति जीएडी कार्मिक, मुख्य सचिव एवं मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजा जाय ताकि किसी को इस पर आपत्ति हो तो तुरंत ‘करेक्टिव एक्शन’ लिया जा सके। इसके बाद 29 जुलाई 2020 को पंचायत विभाग के प्रमुख सचिव सचिन सिन्हा ने बेलवाल को आजीविका मिशन के सीईओ प्रभार देने के आदेश दिए। साथ ही नोटशीट पर लिखा था कि ‘कीप इट सेफ।’

बैंस पर दर्ज हैं लोकायुक्त में प्रकरण
इकबाल सिंह बैंस और ललित मोहन बेलवाल पर पूर्व विधाक पारस सकलेचा की शिकायत पर पोषण आहार घोटाला और पद के दुरुपयोग के मामले में लोकायुक्त में जांच प्रकरण क्रमांक 598/2024 दर्ज है। जबकि 2017 में आजीविका मिशन का सीईओ रहते प्रदेश प्रबंधक के पद पर सुषमा रानी शुक्ला की फर्जी नियुक्ति करने के मामले में बेलवाल पर ईओडब्ल्यू में मामला दर्ज है। हालांकि ईओब्डल्यू ने बेलवाल की गिरफ्तारी अभी तक नहीं की है।