मध्यप्रदेश

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मप्र में पिछड़ा वर्ग के दो आयोगों के एक ही अध्यक्ष

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-ओबीसी आंदोलन के बीच कुसमारिया को मिली जिम्मेदारी

भोपाल। प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) से जुड़े दो आयोग हैं। सरकार ने पूर्व मंत्री रामकृष्ण कुसमारिया को दोनों आयोग का अध्ययक्ष बनाया है। कुसमारिया अभी तक मप्र पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष का दायित्व संभाल रहे थे। सरकार ने उन्हें मप्र राज्य पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग का भी अध्यक्ष नियुक्त कर दिया है। इस नियुक्ति को ओबीसी आरक्षण से जोडक़र देखा जा रहा है। क्योंकि मप्र के ओबीसी संगठनों ने 28 जुलाई को भोपाल में आंदोलन, प्रदर्शन का ऐलान किया है।

मप्र में 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण की मंाग ने एक बार फिर जोर पकड़ा है। सर्वोच्च न्यायालय में आरक्षण को लेकर चल रही सुनवाई के बीच ओबीसी संगठनों ने आंदोलन का ऐलान किया है। इससे पहले सरकार ने मप्र पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग के अध्यक्ष रामकृष्ण कुसमारिया को मप्र राज्य पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग का भी अध्यक्ष नियुक्त कर दिया है। बताया गया कि ओबीसी आरक्षण से जुड़ा मामला हल होने के बाद सरकार एक आयोग को बंद करने का फैसला कर सकती है। 

इसलिए बनाना पड़ा था दूसरा आयोग

कमलनाथ सरकार ने मार्च 2020 में वरिष्ठ कांग्रेस नेता जेपी धनोपिया को मप्र राज्य पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया था, लेकिन तब कमलनाथ सरकार गिरने की वजह से नई सरकार के समय धनोपिया मप्र पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष पद पर काम नहीं कर पाए। बाद में यह मामला उच्च न्यायालय पहुंचा। इस बीच मप्र में नौकरियों के अलावा पंचायत एवं निकाय चुनावों में ओबीसी आरक्षण की मांग तेज हो गई थी। नगरीय निकाय एवं पंचायत चुनाव में ओबीसी को पर्याप्त आरक्षण नहीं मिलने पर मप्र का ओबीसी वर्ग सरकार के खिलाफ सडक़ पर उतर आया था। तब तत्कालीन शिवराज सरकार ने मप्र पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया और भाजपा विधायक रहे गौरीशंकर बिसेन को अध्यक्ष नियुक्त किया था। बताया गया कि मप्र पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग का कार्यकाल समाप्त हो चुका है। ऐसे में सरकार ने मप्र राज्य पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग के अध्यक्ष पद पर रामकृष्ण कुसमारिया की नियुक्ति कर दी है।