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Gossip गुगली

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नेताजी को मिल ही गई जंगल की जड़ीबूटी ....नेता के छोटे की कमाई चौपट कर रहा ईरान - अमेरिका युद्ध

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नेताजी को मिल ही गई जंगल की जड़ीबूटी 

शाेपुर वारे नेताजी भौत टेम से जंगल की जड़ीबूटी की खोज में भटक रहे है। जंगल वाली कुर्सी के मोह में नेताजी ने तीन साल पहले मातृ दल पंजा को ठोकर मार दी थी। कमलदल ने नेताजी को इनाम भी दिए। कुर्सी के साथ उप चुनाव का टिकट भी दिया लेकिन नेताजी की किस्मत ने नहीं बल्कि उनके कर्मों ने ही उनका साथ नहीं दिया। सत्ता की आड़ में फॉरेस्ट की सफाई से कमाई करने वाले नेताजी को हर हाल में जंगल की जड़ीबूटी चाहिए सो पंजादल में लाने वाले माराज के महल का दरवाजा हर दिन खट-खटाया, सो अपात्र नेताजी को बड़ी कुर्सी तो नहीं मिल सकी, हां  छोटी कुर्सी जरूर मिल गई। खैर कोई बात नहीं खैर से खैरात बटोरने वाले नेताजी को जंगल से कामना बखूबी आता है। जंगल माफिया के चेहरे की खुशी भी देखते ही बन रही है, काहे से कि उनके नेता को जंगल की जिम्मेदारी जो मिल गई है। अब शायद संकेत की भी जरूरत नहीं कि नेताजी वही है, जिन्होंने चुनाव में खूब फर्जीवाड़ा किया लेकिन नैया पार नहीं लग पाई। चुनाव जीते सीधे साधे आदिवासी को विधायकी से हटवाने पूरा जोर लगा दिया फिर भी नेताजी की विधायकी और फिर फॉरेस्ट मंत्री बनने की ख्वाहिश पूरी नहीं हो सकी। खैर छोटी कुर्सी के लिए नेताजी को बधाई.....


नेता के छोटे की कमाई चौपट कर रहा ईरान - अमेरिका युद्ध 

अरे भाई हाईवे पर जहाज थोड़ी न चलते है। ऐसी बात क्यों करते हो? ईरान युद्ध से मप्र- राजस्थान हाईवे का क्या संबंध! तर्क संगत नहीं लगा, नेता के छोटे की मानें तो ये सच है। सुना है बड़े साहब के पास ऐसा बहाना परिवहन  राजस्व उर्फ कमाई वसूलने वाले नेता के छोटे ने परोसा है। नेता 'राम'के छोटे THC "भरत" का कहना है कि फैक्ट्रियों से निकलने वाले हाइवा और ट्राला से मिलने वाली मंथली भी नहीं मिल रही है। डेली वसूली ग्राफ भी साफ हो गया है। ये बेचारे एक मात्रा पॉइंट प्रभारी THC है जो बड़े साहब की नजरों में भोत परेशान दिखने नजर है रहे है। छोटे ने कमाई घटने के कारण बताया है कि LpG की कमी के कारण करेरा से राजस्थान की तरफ आने -जाने वाले कंपनियों के ट्रकों की संख्या बहुत घट गई है। सो भौत कमाई  नहीं हो पा रही है। अब सच तो ऊपरवाल ही बता सकता है, क्योंकि साहब स्पॉट पर जाएंगे नहीं और फर्जी डिग्री वाला THC तो सच बताएगा ही क्यों? यहां बता दें कि युद्ध के नाम पर सिर्फ राजस्व और नौछावर कम हुई है, छोटे ने खुद की कमाई में तनिक भी कमी नहीं आने दी है। खैर बड़े भैया ने कुरवानी दी है तो छोटे तेरा इतना तो बनता है। लगे रहो.....