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मध्यप्रदेश

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एफआईआर छुपाने बंद की ईओडब्ल्यू की वेबसाइट!, सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर 8 साल से वेबसाइट पर अपलोड हो रही थी एफआईआर, एक साल से बंद

मध्यप्रदेश

- विधानसभा प्रश्र के उत्तर में अधिकारियों ने कहा हो रही अपलोड 

भोपाल। मप्र आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर आठ साल पहले शुरू की गई पारदर्शी व्यवस्था पर एक बार फिर से पर्दा डाल दिया है। करीब एक साल से बंद पड़ी प्रकोष्ठ की वेबसाइट पर दैनिक रूप से की जाने वाली एफआईआर एवं अन्य जानकारियां सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित नहीं हो पा रही हैं। 

मप्र विधानसभा में विधायक महेश परमार ने इस संबंध में प्रश्न लगाया था। उत्तर में विभाग की ओर से बताया गया कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा रिट पिटीशन (क्रिमिनल) क्र. 68/2016 में पारित आदेश दिनांक 7 सितम्बर 2016 (विभाग ने वर्ष 2026 बताया) के पालन में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ द्वारा 4 अप्रैल 2018 को प्रथम सूचना रिपोर्ट अपलोड किए जाने के संबंध में ओदश जारी किया था। उत्तर के साथ तत्कालीन अति. महानिदेशक डी.श्रीनिवास राव के हस्ताक्षर से जारी आदेश की प्रति संलग्न की गई है। साथ ही कहा गया है कि ईओडब्ल्यू मप्र द्वारा उच्च न्यायालय के आदेश का पूर्ण अनुपालन किया जा रहा है। इस अनियमितता के लिए किसी भी अधिकारी को दोषी नहीं माना गया है। 

इस तरह छुपाई जा रही जानकारी 

सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जारी आदेश के पालन में 4 अप्रैल 2018 को जारी आदेश में प्रथम सूचना रिपोर्ट को पुलिस वेबसाइट अथवा शासकीय वेबसाइट पर 24 घंटे में अपलोड किए जाने का उल्लेख किया गया है। हालांकि करीब सालभर पहले तक यह जानकारी प्रकोष्ठ की वेबसाइट पर ही अपलोड होकर सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित भी  होती थी।अब एफआईआर पुलिस वेबसाइट (सीसीपीएनएस) पर अपलोड की जा रही है। जहां हर एफआईआर को सार्वजनिक रूप से देख पाना संभव नहीं है। वहीं प्रकोष्ठ की वेबसाइट खुलना भी बंद हो गई है, जिस पर आसानी से कोई भी व्यक्ति एफआईआर देख सकता था। 

लोकायुक्त में 47, ईओडब्ल्यू में 94 अधिकारियों पर एफआईआर  

विधायक परमार के प्रश्न के उत्तर में बताया गया है कि 2014 से अब तक विशेष पुलिस स्थापना (लोकायुक्त) मप्र द्वारा 3940 प्रकरणों में से कुल 2978 प्रकरणों में विवेचना पूरी की गई है। 47 प्रकरणों में विभिन्न स्तर के प्रशासनिक सेवा के अधिकारी आरोपित हैं। गोपनीयता और विवेचना प्रभावित होने का हवाला देकर उत्तर के साथ अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।वहीं ईओडब्ल्यू में इस अवधि में कुल 887 प्रकरण दर्ज किए जाने की जानकारी के साथ 94 अधिकारियों की प्रकरण वार स्थिति व अभियोजन स्वीकृति की जानकारी दी है।ईओडब्ल्यू की ओर से बताया गया है कि 2014 से 2016 तक सार्वजनिक पोर्टल पर कुल 194 प्रकरण प्रदर्शित नहीं किए गए हैं एवं 2017 से प्रकरण सार्वजनिक पोर्टल पर प्रदर्शित किए जाते हैं। 


‘न्यायालय का आदेश एफआईआर को वेबसाइट पर अपलोड किए जाने को लेकर है।एफआईआर प्रतिदिन पुलिस वेबसाइट ‘सीसीपीएनएस’ पर अपलोड हो रही है। प्रकोष्ठ की वेबसाइट बंद होने की जानकारी नहीं है, मैं दिखवाता हूँ।

उपेन्द्र जैन, महानिदेशक ईओडब्ल्यू मप्र