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तीन सालों में सौ लाख हेक्टेयर होगा मप्र का सिंचाई रकबा:सिलावट
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जल संसाधन मंत्री का दावा वृहद परियोजनाओं के पूरा होने से तेजी से बढ़ेगा सिंचित क्षेत्र
भोपाल। मध्यप्रदेश जल संसाधन विभाग का लक्ष्य अगले तीन सालों में सिंचाई के रकबे को 54.06 लाख हेक्टेयर से बढ़ाकर सौ लाख हेक्टेयर तक पहुंचाना है। विभाग ने वृहद परियोजनाओं को अगले तीन सालों में वर्षवार पूरा करने का लक्ष्य भी तय किया है। 14 परियोजनाएं 2026 तक पूरी की जाएंगी, जिनसे 6 लाख 22 हजार 095 हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी। 96000 हेक्टेयर सैंच्य क्षेत्र वाली चार परियोजनाएं 2027 तक एवं एक लाख 37 हजार 275 हेक्टेयर सैंच्य क्षेत्र वाली तीन परियोजनाओं को वर्ष 2028 तक पूरा किया जाएगा। यह बात मप्र के जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने मंगलवार को विभाग की दो वर्ष की उपलब्धियों एवं आगामी तीन साल की कार्योजना साझा करने के लिए आयोजित पत्रकारवार्ता में कही।
मंत्री श्री सिलावट ने बताया कि राज्य में 66 मध्यम, 345 लघु सिंचाई परियोजनाओं के पूरा होने से भी 6.50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता का सृजन होगा। प्रदेश में अभी 32 वृहद, 114 मध्यम, 5841 लघु मिलाकर कुल 5987 सिंचाई परियोजनाएं निर्मित हैं, जबकि 42 वृहद, 66 मध्यम, 345 लघु मिलाकर कुल 453 सिंचाई परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं। इन परियोजनाओं से लगभग 25 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षमता में वृद्धि होगी।
सात अतर्राज्यीय नदी लिंक परियोजनाएं प्रस्तावित
मंत्री श्री सिलावट ने बताया कि राज्य की नदियों में बाढ़, जल प्रबंधन एवं जल के समुचित उपयोग तथा पानी की कमी वाले नदी/कछारों में पर्याप्त जल की उपलब्धता के लिए अंतर्राज्यीय नदियों को आपस में जोडऩे की छह योजनाएं प्रस्तावित हैं। इनमें केन-मंदकिनी परियोजनाका सर्वेक्षण पूरा हो चुका है, वहीं कालीसिंध-चंबल, शक्कर-पेंच, कान्ह-गंभीर, दूधी-ताकिया, नेवल-बीना और जामनेर-नेवन परियोजनाओं का सर्वेक्षण होना प्रस्तावित है।
2027 तक पूरे होंगे सिंहस्थ के सभी काम
मंत्री सिलावट ने बताया कि सिंहस्थ 2028 से संबंधित सभी स्वीकृत कार्य दिसम्बर 2027 तक पूरे किया जाना लक्षित है। सिंहस्थ के आयोजन के लिए क्षिप्रा नदी को निर्मल अविरल एवं निरंतर प्रवाहमान बनाकर विभिन्न धार्मिक पर्वों पर अनुष्ठान हेतु पर्याप्त स्वच्छ जल उपलब्ध कराए जाने हेतु विभाग के चार निर्माण कार्य चल रहे हैं। इन चारों कामों के लिए राशि 2396 करोड़ की स्वीकृति हुई है।
क्षिप्रा शुद्धिकरण 42 और शुद्धजल का काम 48 प्रतिशत पूरा
क्षिप्रा शुद्धीकरण के लिए कान्ह डायवर्सन क्लोज डस्ट परियोजना: इस परियोजना की लागत 919.94 करोड़ रुपये है। इसमें कट एण्ड कवर की लम्बाई 18.15 किमी, टनल की लम्बाई 18.15 किमी है। वर्तमान में 42 प्रतिशत काम पूरा हुआ।
सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी मध्यम सिंचाई परियोजना: 614 करोड़ की इस परियोजना में उज्जैन जिले के ग्राम सेवरखेड़ी में क्षिप्रा नदी पर बैराज का निर्माण कर पम्पिंग के माध्यम से प्रस्तावित सिलारखेड़ी जलाशय में जल एकत्रित कर आवश्यकता अनुसार क्षिप्रा नदी में प्रवाहित किया जाएगा। परियोजना से उज्जैन शहर को पेयजल एवं धार्मिक पर्वों पर श्रद्धालुओं को अविरल जल उपलब्ध कराया जाएगा। परियोजना का 48 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है।
क्षिप्रा के दोनों किनारों पर घाट निर्माण: 778.91 करोड़ की इस परियोजना में घाट की कुल लम्बाई 29.21 किमी है। घाट निर्माण के बाद सिंहस्थ पर्व पर 24 घंटे में लगभग 5 करोड़ श्रद्धालु स्नान कर सकेंगे। वर्तमान में परियोजना का 6 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है।
नदियों पर 21 बैराजों का निर्माण: उज्जैन जिले में विभिन्न नदियों पर 21 बैराजों का निर्माण कार्य किया जा रहा है, जिनकी लागत 84.78 करोड़ है। इससे 2019 हेक्टेयर भूमि पर सिंचाई हो सकेगी। वर्तमान में सभी बैराज विभिन्न चरणों में प्रगति प्रगतिरत होकर निर्माणाधीन हैं।
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