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मध्यप्रदेश

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क्या वैधानिक है राज्य मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष पद पर अवधेश प्रताप सिंह यादव की नियुक्ति?

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भोपाल । मध्य प्रदेश विधानसभा के सेवा निवृत्त प्रमुख सचिव एवं वर्तमान में मप्र मानव अधिकार आयोग के सदस्य एपी सिंह को मानव अधिकार आयोग के  अध्यक्ष के पद की जिम्मेदारी अतिरिक्त रूप से सौंप दी गई हैं। हालांकि उन्हें स्थाई रूप से अध्यक्ष पद नहीं सौंपा गया है, फिर भी योग्यता नहीं रखने वाले व्यक्ति को उच्च न्यायिक पद पर बैठाने का रास्ता तो निकाला ही गया है। सवाल तो किया ही जा सकता है क्या एपी सिंह इस पद के लिए पात्रता रखते है।

जानकारी के अनुसार विधानसभा के सेवानिवृत्त प्रमुख सचिव या समकक्ष उच्च पदस्थ अधिकारी राज्य मानवाधिकार आयोग (SHRC) के सदस्य तो नियुक्त किए जा सकते हैं अध्यक्ष नहीं। अध्यक्ष पद के लिए मुख्य रूप से सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश या उच्च न्यायालय के न्यायाधीश पद की योग्यता जरूरी है। हालाँकि, वर्ष 2019 के संशोधन के बाद कुछ विशिष्ट श्रेणियों के सेवानिवृत्त अधिकारियों को अध्यक्ष पद के लिए विचार किया जा सकता है, लेकिन पारंपरिक रूप से यह न्यायिक व्यक्ति ही होता है। 

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के अध्यक्ष के लिए पात्रता भारत के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश (CJI) या सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त/सेवारत न्यायाधीश एवं राज्य मानवाधिकार आयोग (SHRC) के अध्यक्ष के लिए (2019 संशोधन के बाद) पात्रता: उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश या उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त/सेवारत न्यायाधीश होना चाहिए।राज्य मानवाधिकार आयोग (SHRC) के सदस्य के लिए सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीश, या जिला न्यायाधीश (कम से कम 7 साल के अनुभव के साथ), या मानवाधिकारों से संबंधित ज्ञान या व्यावहारिक अनुभव वाला कोई व्यक्ति पात्रता रखता है।  कहा जा सकता है कि सेवानिवृत्त मुख्य सचिव सीधे अध्यक्ष पद के लिए मुख्य योग्य व्यक्ति नहीं हैं, क्योंकि यह पद न्यायिक अनुभव (CJI या HC के न्यायाधीश) पर केंद्रित है। 

अध्यक्ष पद के लिए न्यायिक पृष्ठभूमि आवश्यक 

 मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के तहत संशोधन (2019) ने अध्यक्ष और सदस्यों की पात्रता में कुछ लचीलापन लाया है, लेकिन प्राथमिकता अभी भी उच्च न्यायिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति को ही है। यदि वे उपयुक्त न्यायिक अनुभव रखते हैं या अधिनियम के तहत अन्य विशिष्ट योग्यताओं को पूरा करते हैं, तो मुख्य सचिव स्तर के उच्च प्रशासनिक अधिकारी को सदस्य के रूप में नियुक्त किया जा सकता है, लेकिन अध्यक्ष पद के लिए न्यायिक पृष्ठभूमि होना जरूरी हैं  

नेताओं के चहेते रहे हैं अवधेश प्रताप 

पूर्व मंत्री और जनता दल, कांग्रेस, बीजेपी, आम आदमी पार्टी सहित अन्य दलों की सवारी करने वाले बुंदेलखंड के कद्दावर नेता अखंड प्रताप सिंह यादव के सुपुत्र अखिलेश प्रताप सिंह (एपी) संसद की सेवाओं से मप्र विधानसभा तक की सेवा यात्रा से मानव अधिकार आयोग में सदस्य फिर अध्यक्ष पद तक सभी दलों के नेताओं के कृपा पात्र रहे है। संसदीय सेवाओं में प्रमुख सचिव पद पर नियुक्ति में कांग्रेस का सहयोग रहा तो इसी पद पर दो बार (तीसरी बार की नहीं जा सकती थी) भाजपा ने सेववृद्धि और अनुकंपा के माध्यम से उपकृत किया। विधानसभा से सेवामुक्त होकर घर पहुंचते उससे पहले उन्हें राज्य मानव अधिकार आयोग का सदस्य बनाकर नई जिम्मेदारी सौंप दी और दो महीने बाद ही उन्हें आयोग में अध्यक्ष नियुक्त कर दिया। अब देखना यह है, कि मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष सहित अन्य प्रमुख जनप्रतिनिधियों की संयुक्त चयन समिति की अनुशंसा पर इस संवैधानिक पद पर गैर न्यायिक पृष्ठभूमि वाले एपी सिंह की नियुक्ति की गई है तो किस नियम प्रक्रिया के तहत?