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मध्यप्रदेश

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उच्च शिक्षा में कुल 16.50 लाख विद्यार्थिर्यी में 55 प्रतिशत छात्राएं, मप्र में आजादी के बाद से अब तक 19 शासकीय, 15 सालों में खुले 54 निजी विश्वविद्यालय

मध्यप्रदेश

भोपाल। मध्यप्रदेश के शासकीय एवं निजी महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में कुल 16.50 लाख विद्यार्थी शिक्षारत हैं। इनमें 54-55 प्रतिशत छात्राएं हैं। अर्थात छात्रों की संख्या कुल 45-46 प्रतिशत ही है। यह जानकारी सोमवार को मप्र के उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इंदर सिंह परमार ने दी। 

विभाग की दो वर्ष की उपलब्धियों की जानकारी साझा करने के लिए आयोजित पत्रकारवार्ता में मंत्री श्री परमार ने बताया कि मध्यप्रदेश में 571 शासकीय एवं 788 अशासकीय महाविद्यालय हैं। इसी प्रकार 19 शासकीय एवं 54 निजी विश्वविद्यालय हैं। शासकीय विश्वविद्यालयों की यह संख्या आजादी के बाद से अब तक की है, जबकि निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना 2010 के बाद कुल 15 सालों में हुई है। मंत्री श्री परमार ने कहा कि शिक्षा सहित हर क्षेत्र में सरकार के साथ-साथ समाज की सहभागिता को महत्व दिया जा रहा है। गुणवत्ता युक्त शिक्षा के लिए आगे आने वाले लोगों को सरकार अनुमति देती है। 

प्रकोष्ठ करेगा भारतीय ज्ञान परंपरा का संरक्षण 

मंत्री श्री परमार ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण के लिए भरतीय परंपरा प्रकोष्ठ की स्थापना कर पाठ्यक्रमों में भारतीय ज्ञान का समावेश किया गया है। विश्वविद्यालयों को उनकी विशेषता के अनुरूप विभिन्न पाठ्यक्रमों में भारतीय ज्ञान परंपरा को समावेशित करने हेतु दायित्व सौंपे गए हैं। महाविद्यालयों में प्रशिक्षण शिविर, औद्योगिक भ्रमण, उद्यामिता शिविर आयोजित किए गए। 16099 विद्यार्थियों को करियर काउंसलिंग कराकर 1655 का प्लेसमेंट हो सका। 

मंत्री ने इन उपलब्धियों का किया उल्लेख 

मंत्री श्री परमार ने शैक्षणिक सत्र 2021-22 से चार वर्षीय पाठ्यक्रम लागू किए जाने, बहु-प्रवेश एवं बहु-निकास प्रणाली अपनाने एवं वर्तमान सत्र से एक वर्षीय स्नात्कोत्तर पाठ्यक्रम प्रारंभ किए जाने की जानकारी दी। साथ ही कहा कि स्नातक के 83 विषयों के पाठ्यक्रम को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप तैयार किया गया है। स्नात्कोत्तर स्तर के 50 विषयों का एकीकृत मानक पाठ्यक्रम तैयार किए गए हैं। प्रदेश के हर जिले में एक महाविद्यालय का चयन कर 55 महाविद्यालयों को प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस में उन्नयन कर शैक्षिणिक एवं गैर शैक्षणिक के 1845 पद सृजित तथा अधोसंरचना विकास के लिए 336 करोड़ से अधिक की राशि स्वीकृत की गई है। 

पॉलिटेक्निक महाविद्यालयों में 21.38 प्रतिशत बढ़े नामांकन 

तकनीकी शिक्षा विभाग की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए मंत्री श्री परमार ने बताया कि सत्र 2025-26 में शासकीय पॉलिटेक्निक महाविद्यालयों में प्रवेश हेतु विशेष जागरुकता अभियान चलाकर सकल नामांकन में 21.38 प्रतिशत की वृद्धि की है। सत्र के दौान ऑनलाइन काउंसलिंग के माध्यम से विभिन्न पाठ्यक्रमों में 25.99 प्रतिशत प्रवेश बढ़े हैं। अगले तीन सालों में उद्योगों एवं स्थानीय मूलभूत आवश्यकताओं के अनुरूप पाठ्यक्रम का विकास एवं वर्तमान में चल रहे पाठ्यक्रमों का युक्तियुक्तकरण किया जाएगा। यूआईटी, आरजीपीव्ही तथा राज्य शासन के अधीन सभी इंजीनियरिंग महाविद्यालयों को बहु-विषयक संस्थान के रूप में विकसित किया जाएगा। विद्यार्थियों की उपस्थिति सार्थक ऐप से होगी। सभी पॉलिटेक्निक महाविद्यालयों की रैंकिंग कराई जाएगी। सभी महाविद्यालयों में एआईसीटीई मानकों के अनुरूप भवन, प्रयोगशालाएं, मशीनरी एवं उपकरणों की उपलब्धता कराई जाएगी। प्रदेश में एआई और ड्रॉन जैसे नवीनतम तकनीकी आधारित पाठ्यक्रम, इंजीनियरिंग एवं पॉलिटेक्टिनक महाविद्यालयों में कोडिंग लैब की सथापना की जाएगी। 

उज्जैन में बनेगा अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान 

मंत्री श्री परमार ने बताया कि उज्जैन में अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआईआईए) की स्थापना होगी। प्रदेश में 12 नवीन 50 बिस्तरीय एवं एक नवीन 30 बिस्तरीय आयुष चिकित्सालय संचालित किए जाएंगे। प्रदेश में आयुष वेलनेस टूरिज्म केन्द्र निर्मित होंगे, जिनका संचालन आवश्यक पद-सृजन, पूर्ति के साथ किया जाएगा।  सभी जिलों में आवश्यकता अनुसार आयुष चिकित्सालयों की स्थापना होगी। 108 आयुष औषधालयों के लिए नवीन भवनों का निर्माण होगा, 50 नवीन आयुष औषधालयों को चरणबद्ध स्वीकृति दी जाएगी। चार नवगठित जिलों, निवाड़ी, मऊगंज, पांढुर्णा और मैहर में पृथक जिला आयुष कार्यालयों की स्थापना की जाएगी। 

आयुष शैक्षणिक संस्थाओं में होंगे शोध 

मंत्री श्री परमार ने बताया कि सभी 9 आयुष महाविद्यालयों में छात्रावास एवं फार्मेसी का संचालन होगा। सभी शासकीय महाविद्यालयों में स्नातक की सौ सीटों तक उन्नयन किया जाएगा। सभी को प्रथम संदर्भ इकाई के रूप में विकसित किया जाएगा। यूनानी पाठ्यक्रम हिन्दी में संचालित होंगे। प्रदेश में 8 नए आयुर्वेद महाविद्यालय भी संचालित करने की योजना है। आयुष महाविद्यालयों में अनुसंधान गतिविधियों को सुदृढ़ करने के लिए अत्याधुनिक शोध प्रयोगशाला का निर्माण होगा। बालाघाट में शोध केन्द्र संचालित होगा। मंत्री श्री परमार ने आयुष विभाग की दो साल की अन्य उपलब्धियों एवं कार्योजना को भी बताया।