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मध्यप्रदेश

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नए बजट में बढ़ाई जाएगी सामाजिक सुरक्षा पेंशन, सामाजिक न्याय एवं उद्यानिकी मंत्री कुशवाह ने बताईं दो साल की विभागीय उपलब्धियां

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भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की इच्छा है कि जल्द ही दिव्यांग और बुजुर्गों सहित अन्य सामाजिक सुरक्षा पेंशन को बढ़ाया जाए। इसलिए अगले बजट में यह राशि बढ़ा दी जाएगी। यह बात मप्र के सामाजिक न्याय एवं उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने एक प्रश्न के उत्तर में कही। 

डॉ. मोहन यादव की सरकार में दो साल की विभागीय उपलब्धियों की जानकारी देने हेतु आयोजित पत्रकारवार्ता में मंत्री श्री कुशवाह ने कहा कि वर्ष 2026 को सरकार कृषि वर्ष के रूप में मनाने जा रही है। इसलिए उद्यानिकी विभाग के माध्यम से भी किसानों के हित में कई नवाचार होंगे। 

6.97 लाख दिव्यांगों को हर माह 41.87 करोंड़ लाख पेंशन  

मंत्री श्री कुशवाह ने बताया कि मप्र सरकार 6,97,840 दिव्यांग हितग्राहियों को हर महीने 41 करोड़ 87 लाख, 18 हजार रुपये पेंशन दे रही है। 34649 दिव्यांगजन को 59,893 सहायक उपकरण दिए गए हैं। श्रवण बाधित दिव्यांगजन की संवाद संबंधी कठिनाईयों को दूर करने लईव इंटरप्रिटर की सुविधा क्यूआर कोड के माध्यम से शुरू की गई है। समस्या निराकरण के लिए आरूषि संस्था के माध्यम से हेल्पलाइन नंबर का संचालन भी किया जा रहा है। 

अजा/अजजा कल्याण के लिए कई योजनाएं 

मंत्री श्री कुशवाह ने बताया कि अनुसूचित कल्याण के लिए शिक्षा, छात्रवृत्ति, स्वरोजगार एवं आवास योजनाओं के माध्यम से अजा वर्ग को आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। विभिन्न पेंशन एवं सहायता योजनाओं में विगत दो सालों में लगभग 1326 करोड़, 80 लाख 67 हजार रुपये खर्च हुए हैं। इसी प्रकार अनुसूचित जनजाति कल्याण की दिशा में शिक्षा, आवास, स्वास्थ्य एवं आजीविका योजनाओं से उनके जीवन स्तर में परिवर्तन लाया जा रहा है। अजजा सशक्तिकरण से जुड़ी विभिन्न योजनाओं पर दो सालों में 1605 करोड़, 92 लाख 90 हजार रुपये राशि खर्च हुई है। इसी प्रकार विमुक्त, घुमंतु एवं अर्ध घुमंतु जातियों की पहचान, आवास, शिक्षा एवं आजीविका योजनाओं के लिए भी विभाग की कई योजनाएं संचालित हैं। समाज की नशामुक्ति के लिए भी कई अभियान चल रहे हैं। मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाल सहायता योजना में साल में तीन अवसरों पर सामूहिक विभाग समारोह आयोजित किए जाते हैं। 13 दिसम्बर 2023 से 31 अक्टूबर 2025 तक कुल 152353 हितग्राहियों को 838 करोड़, 44 लाख 39 हजार रुपये की सहायता राशि दी गई है। छात्रवृत्ति एवं उच्च शिक्षा सहयोग भी दिया जा रहा है। 

मसाला उत्पादन में शीर्ष पर मप्र, पुष्प में द्वितीय 

मंत्री श्री कुशवाह ने बताया कि विभाग के गठन वर्ष 2005 में मप्र में उद्यानिकी का रकबा 4.70 लाख हेक्टेयर एवं उत्पादन 42.98 लाख मीट्रिक टन था। वर्तमान में उद्यानिकी फसलों का रकवा 28.39 लाख हेक्टेयर एवं उत्पादन 425.68 लाख मी.टन है। उन्होंने बताया कि मप्र देश में मसाला उत्पादन में पहले स्थान पर, पुष्प उत्पादन में द्वितीय, सब्जी उत्पादन में तृतीय तथा फल उत्पादन में चौथे स्थान पर है।  

उद्यानिकी फसलों में भी शिखर पर प्रदेश 

मंत्री श्री कुशवाह ने बताया कि संतरा, टमाटर, धनिया एवं लहसुन में पहले, सीताफल, बंदगोभी, प्याज और हरी टमाटर में दूसरे तथा नीबू, पत्तागोभी, लाल मिर्च एवं खरबूजा उत्पादन में मप्र तीसरे स्थान पर है। देश की उद्यानिकी फसलों में उत्पादकता 12.91 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर मप्र की उद्यानिकी फसलों में उत्पादकता 15.08 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर है। 

यह रहीं दो साल की उपलब्धियां 

मंत्री श्री कुशवाह ने बताया कि विगत दो वर्षों में उद्यानिकी फसलों का क्षेत्र विस्तार 25.12 लाख हेक्टयर से बढक़र 28.39 लाख हेक्टेयर हुआ है। उद्यानिकी फसलों का उत्पादन भी 389.10 लाख मी.टन से बढक़र 425.68 लाख मी.टन हुआ है। पॉली हाऊस/शेडनेट हाऊस एवं प्लास्टिक मल्चिंग में कुल 1573 हेक्टेयर क्षेत्र विस्तार हुआ है।  इजराइल की तकनीकी समन्वय से मुरैना में उच्च मूल्य वाली सब्जी हेतु सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, छिंदवाड़ा में नीबू वर्गीय फसलों एवं हरदा में निर्यात उन्मुख आम एवं सब्जी सीओई स्थापित किया गया है। प्रशिक्षण और रोजगार के लिए सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाईयों की स्थाना की गई है।   मप्र की फसलों को अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए दो उत्पादों रीवा का सुंदरजा आम एवं रतलाम का रियावन लहसुन का जी आई टैग प्राप्त किया है। इसके अलावा 15 उद्यानिकी फसलों का जीआई पंजीयन प्रस्तावित है। 

उद्यानिकी में हो रहे नवाचार 

उद्यानिकी फसलों में सिंचाई जल एवं उर्वरक के बेहतर प्रबंधन को ध्यान में रखकर सेंसर आधारित ऑटोमेशन फर्जीगेशन सिस्टम की स्थापना के उपयोग से पौधों को संतुलित मात्रा में पानी एवं उर्वरक दिए जा सकेंगे।प्रदेश में मखाना उत्पादन के लिए अनुकूल जलवायु होने के कारण प्रथम बार मखाना क्षेत्र विस्तार की परियोजना पायलेट प्रोजक्ट के रूप में चार जिलों में ली गई है। इससे कृषकों को प्रति एकड़ अधिक आय मिल सकेगी। परंपरागत सब्जियों के स्थान पर एग्जोटिक सब्जियां जिनका बाजार मूल्य अधिक है, की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। कृषकों के प्रक्षेत्र पर कम लागत के शेडनेट हाउस का निर्माण कर संरक्षित खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। उद्यानिकी फसलों को बढ़ाने, स्मार्ट बीज फार्म विकास, ज्ञान प्रसार केन्द्र, बीज परीक्षण प्रयोगशाला टिश्यू कल्चर लैब, हाईटेक नर्सरी, इंक्यूबेशन सेंटर की स्थापना जैसी कई पहल हुई हैं। 

अगले तीन साल में विभाग की योजना 

आगामी तीन सालों में उद्यानिकी फसलों में विस्तार, क्लस्टर आधारित संरक्षित खेती, ओपन फील्ड क्षेत्र विस्तार, धार्मिक क्षेत्रों के आसपास उद्यानिकी फसल क्षेत्र विस्तार, सूक्ष्म सिंचाई, गुणवत्ता युक्त बीज उत्पादन यंत्रीकरण को बढ़ावा, सूक्ष्म संवर्धन, उद्यानिकी फसल एवं उत्पादों को जीआई टैग, सेंटर फॉर एक्सीलेंस की स्थापना जैसी पहल की जाएंगी। विभाग में समृद्ध मप्र वर्ष 2047 का लक्ष्य भी तय किया है। साथ ही वर्ष 2026 को कृषि वर्ष मनाए जाने का निर्णय भी लिया है।