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मध्यप्रदेश

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बिना प्राधिकार के डीलर नहीं खरीद-बेच सकेंगे पुराने वाहन, भारत सरकार की अधिसूचना से तीन साल पहले लगी रोक, अब मप्र परिवहन विभाग करेगा सख्ती

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भोपाल। मध्यप्रदेश में कई स्थानों पर निजी व्यवसायी बिना विभागीय अनुमति एवं प्राधिकार के अवैध रूप से पुराने वाहनों की खरीद-बिक्री करते रहे हैं। वर्ष 2022 में सडक़ परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के माध्यम से पुराने वाहनों की खरीद-बिक्री करने वाले डीलरों को भी प्राधिकार पत्र प्राप्त करना अनिवार्य किया गया है। मप्र में अब बिना प्राधिकार पत्र के अवैधानिक रूप से पुराने वाहन खरीदने-बेचने वालों पर परिवहन विभाग द्वारा सख्ती से कार्रवाई की जाएगी। 

मध्यप्रदेश परिवहन विभाग ने मप्र में पुराने वाहनों की खरीद-बिक्री करने वाले सभी वाहन चालकों को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि ऐसे डीलर विभाग से प्राधिकार पत्र प्राप्त करें, इसके बाद ही वाहनों की खरीद-बिक्री करें। इसी प्रकार कोई भी वाहन स्वामी अगर अधिकृत डीलर के माध्यम से वाहन बेचेगा तो उसे केन्द्र सरकार द्वारा निर्धारित फार्म 29सी में उसकी पूर्व सूचना संबंधित आरटीओ को देनी होगी। इसके बाद संबंधित अधिकृत डीलर उस वाहन का डीम्ड ऑनर बन जाएगा और वह उस वाहन को आगे नए ग्राहक को बेच सकेगा। डीम्ड ऑनर वाहन के सभी आवश्यक दस्तावेजों को आद्यतन रखने और वाहन से संबंधित किसी भी घटना के लिए स्वयं जिम्मेदार होगा। वह उस वाहन का पंजीयन प्रमाण पत्र/फिटनेस प्रमाण पत्र के नवीनीकरण, डुप्लीकेट पंजीयन प्रमाण पत्र, एनओसी तथा वाहन स्वामित्व अंतरण का आवेदन करने का अधिकारी होगा। 

डीम्ड डीलर इस स्थिति में ही चला सकेगा वाहन 

अधिकृत डीलर ‘डीम्ड ऑनर’ रहते हुए वाहनों का सामान्य परिवहन के लिए उपयोग नहीं कर सकेगा। वह उस वाहन को सिर्फ संभवित खरीदार को वाहन का परीक्षण कराने, उस वाहन का प्रदर्शन करने अथवा पेंटिंग या मरम्मत के लिए सर्विस सेंटर ले जाने एवं लाने, पंजीयन सर्टिफिकेट या फिटेनेस प्रमाण पत्र या पॉलूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट के नवीनीकरण के उद्देश्य से केवल संबंधित स्थानों तक जाने एवं वापस आने के लिए ही कर सकेगा। 

प्राधिकार पत्र का शुल्क 25 हजार 

पुराने वाहनों की खरीद-बिक्री के लिए प्राधिकार पत्र की फीस 25 हजार रुपये है। जबकि वाहन स्वामी को इन डीलरों के माध्यम से अपने वाहन को बेचने पर कोई अतिरिक्त शुल्क का भुगतान नहीं करना पड़ता। ‘डीम्ड ऑनर’ बनने के बाद डीलर वाहन का दुरुपयोग भी नहीं होगा और वाहन स्वामी वाहन के अवैधानिक उपयोग तथा वाहन संबंधी दस्तावेजी वैधता की कानूनी परेशानी से भी बच सकते हैं। परिवहन आयुक्त विवेक शर्मा की ओर से इस संबंध में सभी क्षेत्रीय एवं जिला परिवहन अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।