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परिवहन विभाग का एएचटी सॉफ्टवेयर रोकेगा फर्जी बैंक एनओसी का फर्जीवाड़ा
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बैंक ऋण चुकता होते ही स्वत: मुक्त होगा वाहन पंजीयन प्रमाण पत्र
भोपाल। बैंक से ऋण लेकर खरीदे गए वाहन का बैंक के पास बंधक पंजीयन प्रमाण पत्र (आरसी) न केवल अब स्वत: बंधन मुक्त होगी, बल्कि परिवहन विभाग पुरानी आरसी को जमा कराए बिना, वाहन स्वामी को बैंक बंधक से मुक्ति के बाद नया पंजीयन प्रमाण पत्र जारी करेगा। विभाग इस प्रक्रिया के लिए राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र (एनआईसी) के साथ मिलकर ऑटो हाईपोथिकेशन टर्निनेशन (एएचटी) सॉफ्टवेयर तैयार कर रहा है। इससे न केवल विभागीय अमले के समय की बचत होगी, बल्कि वाहन बंधन मुक्ति की फर्जी बैंक एनओसी दिखाकर विभाग से आरसी जारी कराने के फर्जीवाड़े पर भी विराम लग सकेगा। परिवहन विभाग इस ऑनलाइन व्यवस्था पर तेजी से काम कर रहा है।
दलालों के सौ करोड़ के धंधे पर चोट
मप्र के सभी आरटीओ कार्यालय में वाहन स्वामी को वाहन ऋण मुक्ति के बाद आरसी के लिए बार-बार चक्कर लगाने पड़ते थे। कार्यालयों में बैठे दलाल इस काम के लिए छोटे एवं हैवी वाहनों के लिए एक हजार से 8-10 हजार रुपये तक की रिश्वत वसूलते थे। सूत्रों का कहना है कि पूरे मप्र में हर महीने दलालों और बाबुओं के गठजोड़ इस प्रक्रिया में सौ करोड़ रुपये से अधिक की घूस दी जाती थी, जिस पर पूरी तरह विराम लग जाएगा।
यह है वाहन बंधन मुक्ति की प्रक्रिया
बैंक से ऋण लेकर खरीदा गया वाहन, पूरा बैंक ऋण चुकता होने तक किसी अन्य व्यक्ति को नहीं बेचा जा सकता। बैंक की सूचना पर परिवहन विभाग ऐसे वाहनों का पंजीयन प्रमाण पत्र बंधक वाहन (हाईपोथिकेशन व्हीकल) के रूप में जारी करता है। इस पंजीयन प्रमाणपत्र के आधार पर वाहन किसी अन्य व्यक्ति को नहीं किया जा सकता अर्थात वाहन पंजीयन अंतरित नहीं हो सकता। इसके लिए पूरा बैंक ऋण चुकता होने के बाद बैंक एनओसी (नोड्यूज) जारी करता है। वाहन स्वामी इस बैंक एनओसी और पुराना पंजीयन प्रमाण पत्र जमाकर नए आरसी के लिए आवेदन करता है। इस आवेदन के आधार पर विभाग वाहन स्वामी को नया आरसी जारी करता है। यह प्रक्रिया बैंक के पास बंधक किसी भी संपत्ति के मोर्डिगेशन और डिमोर्डिगेशन प्रक्रिया की तरह ही होता है।
इस तरह होती है धोखाधड़ी की संभावना
कई बार देखने में आया है कि बैंक से बंधक वाहन स्वामी ऋण चुकाए बिना बैंक का फर्जी एनओसी तैयार कर हाईपोथिकेशन के लिए विभाग में आवेदन करता है। विभाग में बैठे कर्मचारी भी बिना पर्याप्त सत्यापन के इस तरह के वाहनों को नया आरसी जारी कर देते थे। बंधन मुक्त वाहन आरसी मिलते ही ऐसे वाहन स्वामी वाहन को किसी अन्य व्यक्ति को बेच देते थे। ऋण की किस्त नहीं पहुंचने की स्थिति में जब बैंक विभाग से संपर्क करती हैं तब पता चलता है कि वाहन स्वामी ने फर्जी बैंक एनओसी के आधार पर धोखाधड़ी कर दी।
इस तरह रुकेगी धोखाधड़ी
परिवहन विभाग द्वारा तैयार किए जा रहे एएचटी सॉफ्टवेयर से वाहन ऋण देने वाली सभी बैंकों को जोड़ा जाएगा। ऋण पूरा जमा होते ही वाहन स्वामी के आवेदन पर बैंक वाहन ऋण मुक्त होने की जानकारी विभाग से जुड़े सेंट्रल सर्वर पर डालेगी, जो स्वत: आरटीओ कार्यालय तक भी पहुंचेगी। वाहन स्वामी को न तो बैंक जाने की जरूरत होगी और न ही आरटीओ कार्यालय पहुंचकर वर्तमान प्रक्रिया में लगने वाली 75 रुपये फीस के साथ पुराना आरसी और बैंक का एनओसी जमा कराना होगा। बिना किसी जायज कारण के आरटीओ ऑनलाइन मिले आवेदन को एक सप्ताह से अधिक नहीं रोक सकेंगे, अन्यथा सात दिन के बाद यह स्वत: सत्यापित हो जाएगा और आरसी ऑनलाइन जारी हो जाएगी, जिसे आवेदन अपलोड कर प्रिंट करा सकेगा। नए सॉफ्टवेयर के साथ विभाग इस प्रक्रिया को नए साल में शुरू करने की तैयारी में है।
विभाग को समय की बचत, वाहन स्वामी को सुविधा और अनवश्यक परेशानी से बचाने के उद्देश्य से मप्र परिवहन विभाग की यह नई व्यवस्था पर तेजी से काम चल रहा है। संभवत: जनवरी तक यह आरंभ हो जाएगी ’
विवेक शर्मा, परिवहन आयुक्त, मप्र
‘वाहन ऋण मुक्ति के बाद नई आरसी के लिए अगर मप्र परिवहन विभाग ऑनलाइन व्यवस्था लागू करने जा रहा है तो स्वागत योग्य है। निश्चित ही इससे वाहन स्वामी की भागदौड़ भी बचेगी और इस काम के लिए दलालों-बाबुओं की रिश्वतखोरी से भी निजात मिलेगी।’
सीएल मुकाती, ट्रांसपोर्टर
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