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सर्दी में शहरों की सांसें थमा रहा प्रदूषण, बढ़ रही बीमारियां
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राजधानी सहित प्रमुख शहरों में खराब के स्तर तक पहुंचा वायु प्रदूषण
भोपाल। राजधानी भोपाल सहित मप्र के प्रमुख शहरों में वायु प्रदूषण का मानक स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। सरकार और स्थानीय प्रशासन के लगातार प्रयासों के बावजूद सर्दी के मौसम में वायु गुणवत्ता सूचकांक 200 के ऊपर तक पहुंचकर वायु गुणवत्ता की खराब श्रेणी तक पहुंच रहा है। नवम्बर माह में ग्वालियर 200 एआईक्यू से अधिक के साथ ‘खराब’ श्रेणी के उच्चतम स्तर तक पहुंच गया है। जबकि भोपाल और इंदौर में भी सूचकांक ने ‘मध्यम’ से ‘खराब’ के स्तर को छुआ।जबकि जबलपुर में प्रदूषण सूचकांक ‘मध्यम’ श्रेणी तक पहुंच गया। सितम्बर और अक्टूबर में भी एआईक्यू मध्यम से संतोषजनक के बीच रहा।
मप्र के शहरों में बढ़ते प्रदूषण का कारण सरकार खेतों में पराली जलाने, तंदूर, भट्टियों के अलावा शहरों की सडक़ों पर वाहनों से लगने वाले जाम तथा सडक़ों पर नियमित सफाई नहीं होने और सडक़ों के गड्ढों को भी बता रही है। विधानसभा में जबलपुर उत्तर से भाजपा विधायक डॉ. अभिलाष पाण्डेय के प्रश्न के उत्तर में राज्यमंत्री वन एवं पर्यावरण दिलीप अहिरवार ने वर्ष 2025 के सितम्बर और अक्टूबर माह में भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एआईक्यू) के जो आंकड़े दिए हैं, वे संतोषजनक और मध्यम श्रेणी स्तर के ही हैं। जबकि नवम्बर में इन शहरों के वायु गुणवत्ता सूचकांक ने खतरनाक स्तर को छू लिया है।
प्रमुख नगरों में सितम्बर से नवम्बर तक का एआईक्यू सूचकांक
शहर सितम्बर श्रेणी अक्टूबर श्रेणी नवम्बर श्रेणी
भोपाल 53.00 संतोषजनक 109.00 मध्यम 203 खराब
इंदौर 76.00 संतोषजनक 131.00 मध्यम 261 खराब
ग्वालियर 67.00 संतोषजनक 130.00 मध्यम 210+ खराब
जबलपुर 64.00 संतोषजनक 99.00 संतोषजनक 150 मध्यम
कितना खतरनाक है एआईक्यू का गिरता स्तर
00-50(अच्छा)- न्यूनतम प्रभाव
51-100 (संतोषजनक)-संवेदनशील लोगों को सांस लेने में तकलीफ
101-200(मध्यम)-फेंफड़ों की बीमारी, अस्थमा एवं हृदय रोग से पीडि़त लोगों को सांस लेने में तकलीफ
201-300 (खराब)-लंबे समय तक एक्सपोजर की स्थिति में अधिकतर लोगों को सांस लेने में तकलीफ
301-400 (बहुत खराब)-लम्बे समय तक एक्सपेजर से श्वांस संबंधी बीमारी
401-500 (गंभीर)-स्वस्थ्य लोगों पर भी प्रभाव तथा बीमारियों से पीडि़त व्यक्तियों पर गंभीर प्रभाव।
सरकार ने गिनाए प्रदूषण बढऩे के कारण
- वायुमंडलीय स्थितियां : शीत ऋतु में तापमान का उलटाव होने और ठंडी हवा की डिस्पर्सन दर कम होने से वायु प्रदूषण ऊपर नहीं उठ पाता, वायु मंडल में गैसों का डिस्पर्सन भी कम हो जाता है।
- पराली जलाना: सर्दियों में धान की फसल की कटाई के बाद फसल अवशेष (पराली) जलाने से वायु गुणवत्ता प्रभावित होती है।
- खुले में कचरा, अलाव तथा लकड़ी/कोयला जलाने से।
- कोयला आधारित तंदूर एवं भट्टियों के उपयोग से।
- निर्माण-विध्वंस अपशिष्ट का उचित तरीके से पूर्णत: संग्रहण एवं प्रबंधन नहीं होने से।
- प्रमुख शहरों पर यातायात जाम की स्थिति होने से।
- औद्योगिक एवं कॉमर्शियल क्षेत्रों में सडक़ों की नियमित सफाई न होने तथा उनमें गड्ढों के कारण।
प्रदूषण नियंत्रण के लिए सरकार ने अब तक क्या किया
- नगरीय निकाय मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीन से सडक़ों में जमी धूल को नियमित साफ किया जा रहा है। मिस्ट/फॉगर मशीन से डिवाईडर और सडक़ों के पास लगातार फॉगिंग, सुबह और रात में पानी के छिडक़ाव, सडक़ों की सफाई सहित अन्य उपाय, जांच व निगरानी एवं पानी के फव्वारों का संचालन किया जा रहा है। इसके अलावा शहर की कच्ची सडक़ों का पक्कीकरण, वृक्षारोपण एवं हरित पट्टियों का विकास, होटल रेस्टोरेंट आदि में तंदूर-भट्टियों पर रोक, निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट निर्माण स्थलों से धूल को रोकने के लिए हरे जाल का उपयोग, ई-व्हीकल के उपयोग को प्रोत्साहन, पराली जलाने से रोकने के लिए उचित कार्रवाई, सडक़ पर ठोस अपशिष्ट की धूल निकले पर स्थल अर्थदण्ड जैसी कार्रवाई एवं जागरुकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।
यह भी हो रहे प्रयास
कचरे से ऊर्जा, सौर और पवन ऊर्जा को बढ़ावा के अलावा जागरुकता और जलवायु परिवर्तन की दिशा में प्रयास किएजा रहे हैं। राज्य सरकार ने व्यापक पर्यावरण नीति तैयार की है। जलवायु परिवर्तन, ज्ञान प्रबंधन केन्द्र स्थापित किया गया है। स्कूलों में ईको क्लब सहित अन्य प्रयासों से जनता और छात्रों में जनजागरुकता के कार्यक्रम एवं नई शिक्षा नीति के तहत भी पर्यावरण संरक्षण और वृक्षों के बचाव से संबंधित विषयों को स्किूलों में शामिल किया गया।
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