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Gossip गुगली: किस्से पर्दे के पीछे के, रोचक अंदाज में! Hidden picture news
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300 करोड़ वाले शर्मा की सत्ता में कर्री सेटिंग
छह साल पहले वाली नाथ सरकार में इनकम एजेंसी ने राजा मानसिंह के शहर वाले जिस शर्मा से 300 करोड़ के नोट बरामद किए थे, अब भी उसका लाईजनिंग कारोबार राजधानी में धड़ल्ले से चल रिया है। शर्मा राजधानी में अधिकारियों से बड़ी कुर्सी और स्थान अंतरण के ठेका ले रहा है। शहर में गपशप जारी है कि शर्मा जी के पास हर वह वस्तु उपलब्ध है, भवन के कई बल्लम और सत्ता के धुरंधर जिसके आदी और शौकीन हैं। शर्मा जी हरेक और हर प्रकार का आईटम सेवा के लिए उपलब्ध करा देते है। हालांकि सत्ता की राजधानी से संगीत की राजधानी तक चर्चा है, ‘अपने शर्मा जी की सेटिंग भौत तगड़ी है।
गड़बड़ चल रिया सत्तादल के धुरंधरों का समय
पांच साल और पांच महीना पहले तक सत्ता और सत्तादल में जिन दो धुरंधरों के सितारे गर्दिश में थे, अब उनका समय कुछ गड़बड़ चल रिया है। कछू तो समय को दोष दे रहे हैं, तो कछु एमपी के डॉक्टर के प्रकोप को इसका कारण गिना रहे हैं। सच तो यह है कि सत्ता की चकाचौंध और किस्मत से मिली पावर के प्रभाव में दोनों ने अपनों से दूरियां बना ली थीं। भाईसाहब और दादा के लिए खुद को झौंक देने वाले कार्यकर्ता भविष्य की आस में फेरी तो अबऊ लगा रहे हैं। लेकिन पीठ पीछे चुटकी लेने से भी नहीं चूक रहे हैं। कह रहे हैं-‘सत्तादल के संगठन की कुरसी ने भाईसाहब की बाडी और दिमाग दोनों में ऐंठन ला दी थी। दादा के अपने कह रहे हैं कि दादा तो बहुत अच्छा था, वो तो वर्दी वाले विभाग में आने के बाद दलालों के फेर में फंस गाओ। दोनों के समर्थकों को भरोसा है, दोनों का दिमागी बुखार उतरेगा, और दिन फिरेंगे।चापलूस अभी भलें गायब हो गए हों, लेकिन फिर से बंगले पर जिंदाबाद करने वालों की भीड़ जुटेगी, फिर से मिडिया के कैमरा बंगले पर चमकते नजर आएंगे।
पटरी से खिसकती पटवारी की कुर्सी
एमपी में प्रतिपक्ष दल वाले अध्यक्ष पटवारी जी पार्टी के पूर्व धुरंधरों से परेशान हैं। नाम की अध्यक्षी, काम राजा संभाले है। पहले तो जिलों में अपने आदमी बैठा दिए। अब प्रदेश, फिर प्रदेश में भी अपनी बड़ी टीम बैठा दी। कुर्सी जाने के बाद राजनीति से इंटरेस्ट छोड़ रहे नाथ दादा एक बार फिर से सक्रिय होते नजर आ रहे हैं। सूबे के प्रमुख पदों पर ये दोनों अपने आदमी बैठाते जा रहे हैं। नेता की शह पर अध्यक्ष को ही ठेंगा दिखा रहे सदर अध्यक्षों को डांटने के लिए पटवारी का दिमांग चला और प्रभारी बैठा दिए। लेकिन सदर अध्यक्षों ने अपने नेता को परेशानी सुना दी। आखिर राजा ने अपने पुराने दोस्त सूबे के प्रभारी से कहकर न केवल प्रभारियों की घर वापसी करा दी, बल्कि नियुक्तियों के लिए पटवारी पर बंदिश भी लगा दी। प्रतिपक्ष दल में चर्चा है कि पटवारी की कुर्सी पटरी से खिसक रही है।
एमपी के सदन में संसद वाले साहब की धमक
एमपी वाले माननीयों के सदन में इन दिनों संसद से आए नए साहब की धमक है। पुराने वाले साहब अपनी ऊंची एप्रोच से मानवों का अधिकार संरक्षित कर रहे हैं। हालांकि वे भी राष्ट्रीय राजधानी के रास्ते सूबे के सदन में पहुंचे थे। सदन में चर्चा है कि पुराने साहब तो कुर्सी संभाले थे, असली खेल तो अध्यक्ष जी से चिपके मिसुर जी खेल रहे थे। लेकिन नए वाले साहब ने पुराने साहब की पूरी फील्डिंग तो बदली ही है। मिसुर जी की पत्ती भी काटनी शुरू कर दी है। आखिर नए साहब भी तो अध्यक्ष जी के चहेते हैं और उन्हीं के प्रयासों से सूबे में आए हैं।
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