Breaking News:
मध्यप्रदेश
1956 से 2025 : मध्यप्रदेश की 69 वर्ष की राजनीतिक यात्रा, मप्र के इतिहास से जुड़ी जानकारियां
मध्यप्रदेश
इस तरह हुआ मध्यप्रदेश राज्य का गठन
भोपाल। सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश सर सैयद फजल अली की अध्यक्षता की अध्यक्षता में 1955 में बने राज्य पुनर्गठन आयोग ने भाषायी आधार पर 16 राज्यों और तीन केन्द्र शासित प्रदेशों की सिफारिश की। छोटे राज्यों को बड़े राज्यों के बचे हिस्से के साथ जोडक़र नया राज्य बनाया गया। इस तरह 1 नवम्बर 1956 को आंध्रप्रदेश, केरल, कर्नाटक, तमिलनाडू जैसे राज्यों और दिल्ली सहित तीन केन्द्र शासित प्रदेशों के साथ ही मध्य प्रांत के महाकौशल, छत्तीसगढ़ क्षेत्र के 14 जिले, विंध्यप्रदेश, मध्यभारत, भोपाल राज्य और राजस्थान की सिरोंज तहसील की मंदसौर के सुनेल टप्पा से अदला-बदली करके भारत के हृदय प्रदेश अर्थात नए मध्यप्रदेश का गठन हुआ। राज्य पुनर्गठन से पूर्व मध्य प्रांत की राजधानी नागपुर थी, लेकिन पुनर्गठन के बाद नवगठित मध्यप्रदेश की राजधानी जबलपुर को बनाए जाने का प्रस्ताव था। लेकिन भौगोलिक स्थिति और राजनीतिक दबाव के चलते जबलपुर के स्थान पर भोपाल को राजधानी बनाया गया।
इस तरह घटी और बढ़ी मप्र में जिलों की संख्या
1 नवम्बर 1956 को गठन के समय मप्र में कुल 43 जिले थे। 1972 में भोपाल (सीहोर से) और राजनांदगांव (दुर्ग) से अलग होकर बढ़े। इसके बाद 1998 में 16 नए जिले बनाए गए और संख्या 61 हो गई। 1 नवम्बर 2000 को छग राज्य गठन के दौरान 16 जिले इस नए राज्य में चले गए। इस तरह फिर से मप्र में जिलों की संख्या 45 रह गई। 2003 में पुन: 3 नए जिले अनूपपुर (शहडोल से), बुरहानपुर (खण्डवा से) और अशोकनगर (गुना से) बनाए गए।
2008 में 2 अलीराजपुर (झाबुआ से) और सिंगरोली (सीधी से), 16 अगस्त 2013 को आगर मालवा (शाजापुर से), 1 अक्टूबर 2018 को निवाड़ी (टीकमगढ़ से), 15 अगस्त 2023 को मऊगंज (रीवा से), 4 सितंबर 2023 को पांढुर्णा (छिंदवाड़ा से) और मैहर (सतना से) नए जिले बनाए गए। इस तरह वर्तमान में मप्र में जिलों की संख्या कुल 55 है। वर्तमान में बीना (सागर से), जुन्नारदेव (छिंदवाड़ा से), पिपरिया (नर्मदापुरम् से), सिरोंज (विदिशा से) एवं चाचौड़ा व नागदा को जिला बनाए जाने की मांग उठ रही है। बीना और जुन्नारदेव के प्रस्ताव शासन स्तर पर लंबित है।
शुक्ल मप्र के पहले मुख्यमंत्री, डॉ. सीतारमैया राज्यपाल
मध्यप्रदेश के पुनर्गठन के साथ ही कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की तिथि नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली), दिन गुरूवार 1 नवम्बर 1956 को मप्र राज्य के पुनर्गठन के साथ ही प्रदेश के पहले राज्यपाल के रूप में डॉ. पट्टाभि सीतारमैया ने उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एम. हिदायतुल्ला से पद और गोपनीयता की शपथ ली। इसके बाद राज्यपाल के रूप में उन्होंने राज्य के पहले मुख्यमंत्री 80 वर्षीय रविशंकर शुक्ल को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इससे पहले, वे 1937-39 में मध्य प्रांत के प्रीमियर थे और फिर 1946 से 1950 तक मध्य प्रांत के मुख्यमंत्री रहे। शुक्ल भारत की संविधानसभा के सदस्य भी रहे। 31 दिसम्बर 1956 को मप्र के मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए ही 79 वर्ष 4 महीने 29 दिन की आयु में उनका नई दिल्ली में निधन हुआ। विधायक के रूप में उनका निर्वाचन क्षेत्र सरायपाली (वर्तमान छग) रहा।
मप्र के निर्वाचित और नियुक्त मुख्यमंत्री
1. पं. रविशंकर शुक्ल 01/11/1956 से 31/12/1956
2. भगवंतराव मण्डलोई 09/01/1957 से 30/01/1957
12/03/1962 से 29/09/1963
3. कैलाशनाथ काटजू 31/01/1957 से 14/04/1957
15/04/1957 से 11/03/1962
पं. द्वारिका प्रसाद मिश्र 30/09/1963 से 08/03/1967
08/03/1967 से 29/07/1967
6. गोविन्द नारायण सिंह 30/07/1967 से 12/03/1969
7. राजा नरेशचंद्र सिंह 13/03/1969 से 25/03/1969
8. श्यामाचरण शुक्ल 26/03/1969 से 28/01/1972
23/12/1975 से 30/04/1977
9. प्रकाश चन्द्र सेठी 29/01/1972 से 22/03/1972
23/03/1972 से 23/12/1975
10. कैलाश जोशी 24/06/1977 से 17/01/1978
11. वीरेन्द्र कुमार सखलेचा 18/01/1978 से 19/01/1980
12. सुंदरलाल पटवा 20/01/1980 से 17/02/1980
13. अर्जुन सिंह 09/06/1980 से 10/03/1985
14. अर्जुन सिंह 11/03/1985 से 12/03/1985
15. मोतीलाल वोरा 13/03/1985 से 13/02/1988
16. अर्जुन सिंह 14/02/1988 से 23/01/1989
17. मोतीलाल वोरा 25/01/1989 से 09/12/1989
18. श्यामाचरण शुक्ल 09/12/1989 से 01/03/1990
19. सुंदरलाल पटवा 05/03/1990 से 15/12/1992
20. दिग्विजय सिंह 07/12/1993 से 01/12/1998
21. दिग्विजय सिंह 01/12/1998 से 07/12/2003
छत्तीसगढ़ विभाजन के बाद ---
दिग्विजय सिंह ------ 07/12/2003
22.सुश्री उमा भारती 08/12/2003 से 23/08/2004
23. बाबूलाल गौर 23/08/2004 से 29/11/2005
24. शिवराज सिंह चौहान 29/11/2005 से 11/12/2008
25. शिवराज सिंह चौहान 12/12/2008 से 09/12/2013
26.शिवराज सिंह चौहान (14/12/2013 से 12/12/2018)
27.कमलनाथ (17/12/2018 से 20/03/2020)
28.शिवराज सिंह चौहान (23/03/2020 से 11/12/2023)
29. डॉ. मोहन यादव (13/12/2023 से निरंतर)
मप्र को अब तक मिले 25 राज्यपाल
नाम कार्यकाल
- डॉ. पट्टाभि सीतारामैया एक नवम्बर 1956 से 13 जून 1957
- हरिविनायक पाटस्कर 14 जून 1957 से 10 फरवरी 1965
- क्यासम्बिल चेंगलराव रेडडी 11 फरवरी 1965 से 7 मार्च 1971
- पी.वी.दीक्षित (कार्यवाहक) 3 फरवरी 1966 से 9 फरवरी 1966
- सत्यनारायण सिंह 8 मार्च 1971 से 13 अक्टूबर 1977
- निरंजन नाथ वांचू 14 अक्टूबर 1977 से16 अगस्त 1978
- चेप्पुदिरा मुथाना पुनाचा 17 अगस्त 1978 से 29 अप्रैल 1980
- भगवत दयाल शर्मा 30 अप्रैल 1980 से 14 मई 1984
- गुरूप्रसन्न सिंह (कार्यवाहक) 25 मई 1981 से 9 जुलाई 1981
- प्रो. के.एम. चांडी 15 मई 1984 से 30 मार्च 1989
- श्रीमती सरला ग्रेवाल 31 मार्च 1989 से 6 फरवरी 1990
- कुंवर महमूद अली खाँ 6 फरवरी 1990 से 23 जून 1993
- मोहम्मद शफी कुरैशी 24 जून 1993 से 21 अप्रैल 1998
- डॉ. भाई महावीर 22 अप्रैल 1998 से 6 मई 2003
- रामप्रकाश गुप्त 7 मई 2003 से 1 मई 2004
- ले.ज.श्रीकृष्ण मोहन सेठ 2 मई 2004 से 29 जून 2004
- डॉ. बलराम जाखड़ 30 जून 2004 से 29 जून 2009
- रामेश्वर ठाकुर 30 जून 2009 से 7 सितम्बर 2011
- रामनरेश यादव 8 सितम्बर 2011 से 7 सितम्बर 2016
- ओ. पी. कोहली 8 सितम्बर 2016 से 23 जनवरी 2018
- ओ. पी. कोहली (कार्यवाहक) 16 मई 2018 से 2 जून 2018
- श्रीमती आनंदीबेन पटेल 23 जनवरी 2018 से 29 जुलाई 2019
- लाल जी टंडन 29 जुलाई 2019 से 21 जुलाई 2020 (निधन)
- श्रीमती आनंदीबेन पटेल 24 जुलाई 2020 से 8 जुलाई 2021
- मंगुभाई पटेल 8 जुलाई 2021 से .. निरंतर
मप्र विधानसभा के वर्तमान और पूर्व अध्यक्ष
नाम कार्यकाल
- पं. कुंजीलाल दुबे 01/11/1956 से 17/12/1956
18/12/1956 से 01/07/1957
- पं. कुंजीलाल दुबे 02/07/1957 से 26/03/1962
- पं. कुंजीलाल दुबे 27/03/1962 से 07/03/1967
- काशीप्रसाद पाण्डे 24/03/1967 से 24/03/1972
- तेजलाल टेंभरे 25/03/1972 से 10/08/1972
- गुलशेर अहमद 14/08/1972 से 14/07/1977
- मुकुन्द सखाराम नेवालकर 15/07/1977 से 02/07/1980
- यज्ञदत्त शर्मा 03/07/1980 से 19/07/1983
- रामकिशोर शुक्ला 05/03/1984 से 13/03/1985
- राजेन्द्र प्रसाद शुक्ल 25/03/1985 से 19/03/1990
- बृजमोहन मिश्रा 20/03/1990 से 22/12/1993
- श्रीनिवास तिवारी 24/12/1993 से 01/02/1999
- श्रीनिवास तिवारी 02/02/1999 से 11/12/2003
- ईश्वरदास रोहाणी 16/12/2003 से 04/01/2009
- ईश्वरदास रोहाणी 07/01/2009 से 05/11/2013
- डॉ. सीतासरन शर्मा 09/01/2014 से 01/01/2019
- नर्मदा प्रसाद प्रजापति 08/01/2019 से 23/03/2020
- गिरीश गौतम 22/02/2021 से 14/12/2023
- नरेन्द्र सिंह तोमर 20/12/2023 से निरंतर
कब कौन रहा मप्र विधानसभा का सामयिक अध्यक्ष
नाम अवधि
- काशीप्रसाद पाण्डे 29 नवम्बर 1956 से 18 दिसम्बर 1956
- काशीप्रसाद पाण्डे 29 जून 1957 से 2 जुलाई 1957
- काशीप्रसाद पाण्डे 13 मार्च 1962 से 27 मार्च 1962
- रत्नाकर झा 11 मार्च 1967 से 24 मार्च 1967
- अर्जुन सिंह 24 मार्च 1972 से 25 मार्च 1972
- रघुनाथ सिंह 14 जुलाई 1977 से 15 जुलाई 1977
- मथुरा प्रसाद दुबे 2 जुलाई 1980 से 3 जुलाई 1980
- चित्रकांत जायसवाल 3 मार्च 1984 से 5 मार्च 1984
- शिवभानु सोलंकी 14 मार्च 1985 से 22 मार्च 1985
- प्यारेलाल कंवर 22 मार्च 1985 से 27 मार्च 1985
- अर्जुन सिंह 19 मार्च 1990 से 20 मार्च 1990
- रामकिशोर शुक्ला 23 दिसम्बर से 24 दिसम्बर 1993
- श्रीनिवास तिवारी 1 फरवरी 1999 से 2 फरवरी 1999
- श्रीमती जमुना देवी 4 जनवरी 2009 से 7 जनवरी 2009
- ज्ञान सिंह 5 नवम्बर 2013 से 21 दिसम्बर 2023
- केडी देशमुख 21 दिसम्बर 2013 से 9 जनवरी 2014
- दीपक सक्सेना 1 जनवरी 2019 से 8 जनवरी 2019
- जगदीश देवड़ा 24 मार्च 2020 से 2 जुलाई 2020
- रामेश्वर शर्मा 2 जुलाई 2020 से 22 फरवरी 2021
- गोपाल भार्गव 4 दिसम्बर 2023 से 20 दिसम्बर 2023
मप्र विधानसभा के वर्तमान और पूर्व नेता प्रतिपक्ष
- विश्वनाथ तामस्कर 17 दिसम्बर 1956 से 5 मार्च 1957
- चन्द्र प्रताप तिवारी 1 जुलाई 1957 से 7 मार्च 1962
- वीरेन्द्र कुमार सखलेचा 28 मार्च 1962 से 1 मार्च 1967
- वीरेन्द्र कुमार सखलेचा 1 मार्च 1967 से 18 जुलाई 1967
- श्यामाचरण शुक्ल 31 जुलाई 1967 से 8 सितम्बर 1968
- पं. द्वारिका प्रसाद मिश्र 9 सितम्बर 1968 से 16 फरवरी1969
- श्यामाचरण शुक्ल 17 फरवरी 1969 से 12 मार्च 1969
- वीरेन्द्र कुमार सखलेचा 20 मार्च 1969 से 6 जनवरी 1970
- वसंत सदाशिव प्रधान 7 जनवरी 1970 से 17 मार्च 1972
- कैलाश जोशी 28 मार्च 1972 से 30 अप्रैल 1977
- अर्जुन सिंह 15 जुलाई1977 से 17 फरवरी 1980
- सुंदरलाल पटवा 4 जुलाई 1980 से 10 मार्च 1985
- कैलाश जोशी 23 मार्च 1985 से 3 मार्च 1990
- श्यामाचरण शुक्ल 20 मार्च 1990 से 15 दिसम्बर 1992
- विक्रम वर्मा 24 दिसम्बर 1993 से 1 दिसम्बर 1998
- डॉ. गौरीशंकर शेजवार 2 फरवरी 1999 से 1 सितम्बर 2002
- बाबूलाल गौर 4 सितम्बर 2002 से 5 दिसम्बर 2003
- श्रीमती जमुना देवी 16 दिसम्बर 2003 से 11 दिसम्बर 2008
- श्रीमती जमुना देवी 7 जनवरी2009 से 24 सितम्बर 2010
- अजय सिंह 15 अप्रैल2011 से 10 दिसम्बर 2013
- सत्यदेव कटारे 9 जनवरी 2014 से 20 अक्टूबर 2016
- अजय सिंह 27 फरवरी 2017 से 13 दिसम्बर 2018
- गोपाल भार्गव 8 जनवरी 2019 से 23 मार्च 2020
- कमल नाथ 19 अगस्त 2020 से 29 अप्रैल 2022
- डॉ. गोविन्द सिंह 29 अप्रैल 2022 से 4 दिसम्बर 2023
- उमंग सिंघार 18 दिसम्बर 2023 से निरंतर
मप्र विधानसभा में नियुक्त (इंग्लो-इंडियन) सदस्य
- मेजर पी. बर्नार्ड फ्लायरो-1 नवम्बर 1956 से 5 मार्च 1957)
- मेजर पी. बर्नार्ड फ्लायरो- 1 अप्रैल 1957- से 7 मार्च 1962
- एफ.ए. लेमस-7 मार्च 1962 से एक मार्च 1967
- एफ.ए. लेमस एक मार्च 1967- 17 मार्च 1972
- कुमारी फ्लोरेंस सेंट क्लेयर वाटकिन्स-17 मार्च 1972 से 30 अप्रैल 1977
- बी.ए. ग्रेगोरी- 23 जून 1977 से 17 फरवरी 1980)
- कुमारी फ्लोरेंस सेंट क्लेयर वाटकिन्स-9 जून 1980 से 10 मार्च 1985
- मेजर एच.डी. वाइस- 10 मार्च 1985 से 3 मार्च 1990
- श्रीमती ई. लेमोस- 5 मार्च 1990 से 15 दिसम्बर 1992
- श्रीमती जून चौधरी- 7 दिसम्बर 1993 से एक दिसम्बर 1998
- श्रीमती जून चौधरी- एक दिसम्बर 1998 से 5 दिसम्बर 2003
- श्रीमती लोरेन बी. लोबो- 5 दिसम्बर 2003 से 11 दिसम्बर 2008
- श्रीमती लोरेन बी. लोबो-11 दिसम्बर 2008 से 10 दिसम्बर 2013
- श्रीमती लोरेन बी. लोबो-10 दिसम्बर 2013-)
कौन-कौन रहे मप्र के मुख्य सचिव
- एच. एस. कामत: 1 नवम्बर 1956 से 24 नवम्बर 1963 (मप्र के पहले सीएस)
- आर.पी. नरोन्हा: 25 नवम्बर 1963 से अगस्त 1968
- एम.पी. श्रीवास्तव: 2 सितम्बर 1968 से 17 नवम्बर 1969
- आर.पी. नायक: 18 नवम्बर 1969 से 6 सितम्बर 1972
्र- आर.पी. नरोन्हा: 6 सितम्बर 1972 से 14 मई 1974
- एम.एस. चौधरी: 14 मई 1974 से 30 अप्रैल 1975
- एस.सी. वर्मा: 26 जून 1975 से 11 सितम्बर 1977
- के.एल. पसरीचा: 20 सितम्बर 1977 से 29 फरवरी 1980
- बी.के. दुबे: 6 मार्च 1980 से 29 अक्टूबर 1980
- जी. जगतपति एक नवम्बर 1980 से 31 नवम्बर 1982
- बीरबल: एक अगस्त 1982 से 27 मई 1983
- ब्रम्हस्वरूप: 28 मई 1983 से 15 नवम्बर 1985
- के.सी.एस. आचार्य: 15 नवम्बर 1985 से 9 मार्च 1988
-एम.एस. सिंह देव: 9 मार्च 1988 से 30 जून 1988
- आर.एन. चोपड़ा: एक जुलाई 1988 से 30 सितम्बर 1989
-आर.एस. खन्ना: 30 सितम्बर 1989 से 31 मार्च 1990
- आर.पी. कपूर: 31 मार्च 1990 से 22 सितम्बर 1991
- श्रीमती निर्मला बुच: 22 सितम्बर 1991 से एक जनवरी 1993 (पहली महिला सीएस)
- एन.एस. सेठी: एक जनवरी 1993 से 30 नवम्बर 1995
- एस.सी. बेहार: 30 नवम्बर 1995 से 31 जनवरी 1997
- के.एस. शर्मा: 31 जनवरी 1997 से 31 जुलाई 2001
- पी.के. मल्होत्रा: एक अगस्त 2001 से 28 फरवरी 2002
- ए.वी. सिंह: एक मार्च 2002 से 5 जनवरी 2004
- बी.के. साहा: 5 जनवरी 2004 से 30 सितम्बर 2004
- विजय सिंह: एक अक्टूबर 2004 से 27 जनवरी 2006
- आर.सी. साहनी: 28 जनवरी 2006 से 31 जनवरी 2010
- अवनि वैश्य: एक फरवरी 2010 से 30 अप्रैल 2012
- आर. परशुराम: एक मई 2012 से 30 सितम्बर 2013
- अन्टोनी जे.सी. डिसा: एक अक्टूबर 2013 से 31 अक्टूबर 2016
- बसंत प्रताप सिंह: एक नवम्बर 2016 से 31 दिसम्बर 2018
- सुधि रंजन मोहन्ती: एक जनवरी 2019 से 16 मार्च 2020
- एम. गोपाल रेड्डी: 16 मार्च 2020 से 24 मार्च 2020
- इकबाल सिंह बैंस: 24 मार्च 2020 से 30 सितम्बर 2024 (नौकरी छोड़ी)
- बीरा राणा 30 नवम्बर 2023 से 30 सितम्बर 2024
- अनुराग जैन: 30 सितम्बर 2024 से अब तक (अगस्त 2026 तक सेवा विस्तार)
मप्र के अब तक पुलिस महानिरीक्षक/ महानिदेकशक
पुलिस महानिरीक्षक
1. बी.जी. घाटे आईपीएस 1-11-1956 31-5-1958
2. के.एफ. रूस्तम जी आई.पी.एस. 1-6-1958 19-7-1965
3. बी.एम.शुक्ल आई.पी.एस. 20-7-1965 15-21968
4. बी.ए.शर्मा आई.पी.एस. 16-21968 14-4-1969
5. बी.एम.शुक्ल आई.पी.एस. 15-41969 31-12-1972
6. आर.एन.नागू आई.पी.एस. 1-1-1973 4-5-1974
7. के.एल.दीवान आई.पी.एस. 5-5-1974 2-1-1975
8. एच.एम.जोशी आई.पी.एस. 4-1-1975 21-4-1977
9. जे.एस.कुकरेजा आई.पी.एस. 22-4-1977 6-5-1977
10. एच.एम.जोशी आई.पी.एस. 7-5-1977 1-8-1977
11. के.के.दबे आई.पी.एस. 2-8-1977 2-12-1978
12. बी.पी.दुबे आई.पी.एस. 3-12-1+978 20-2-1979
13. पी.आर.खुराना आई.पी.एस. 21-2-1979 6-3-1980
14. जे.एस.कुकरेजा आई.पी.एस. 7-3-1980 14-4-1981
15. बी.पी.दुबे आई.पी.एस. 15-4-1981 23-3-1982
पुलिस महानिदेशक
16. बी.पी.दुबे आई.पी.एस. 23-3-1982 28-5-1983
17.एच.एम.जोशी आई.पी.एस. 28-51983 31-3-1984
18. बी.के.मुखर्जी आई.पी.एस. 27-4-1984 6-12-1986
19. एम.नटराजन आई.पी.एस. 6-12-1986 23-2-1988
20.बी.के.मुखर्जी आई.पी.एस. 24-2-1988 27-1-1989
21.एम.नटराजन आई.पी.एस. 27-1-1989 31-10-1989
22.पी.डी.मालवीय आई.पी.एस. 31-10-1989 5-6-1990
23.एस.व्ही. सिंह आई.पी.एस. 5-6-1990 31-12-1990
24.आर.पी.शर्मा आई.पी.एस. 1-1-1991- 10-5-1992
25. के.एस.राठौर आई.पी.एस. 10-5-1992 30-11-1992
26. दया किशोर आर्य आई.पी.एस. 30-11-1992 1-1-1993
27. आर.पी.शर्मा आई.पी.एस. 1-1-1993 31-12-1993
28. जे.एन.सक्सैना आई.पी.एस. 1-1-1994 30-06-1994
29. प्रताप सिंह आई.पी.एस. 30-6-1994 30-04-1995
30. शरद चन्द्र आई.पी.एस. 1-5-1995 30-6-1996
32. डी.पी. खन्ना आई.पी.एस. 1-7-1997 31-12-1996
31. अयोध्यानाथ पाठक आई.पी.एस. 1-1-1996 31-12-1997
33. वी..पी. सिंह आई.पी.एस. 1-1-1998 20-2-1999
34. एस.सी.त्रिपाठी आई.पी.एस. 20-2-1999 31-12-2001
35. ए.एन. सिंह आई.पी.एस. 01-01-2002 31-07-2002
36. दिनेश चंद्र जुगरान आई.पी.एस. 01.08.2002 12.12.2003
37. एस.के. दास आई.पी.एस. 12.12.2003 31.03.2005
38. स्वराज पुरी आई.पी.एस. 01.04.2005 23.09.2006
39. ए.आर. पवार आई.पी.एस. 23.09.2006 19.05.2008
40. एस.के.राउत आई.पी.एस. 19.05.2008 29.02.2012
41. नंदन दुबे आई.पी.एस. 01.03.2012 30.09.2014
42. सुरेन्?द्र सिंह आई.पी.एस. 01.10.2014 30.06.2016
43. ऋषि कुमार शुक्?ला आई.पी.एस. 01.07.2016 30.01.2019
44. विजय सिंह गुर्जर आई.पी.एस. 30.01.2019 05.03.2020
45. विवेक जौहरी आई.पी.एस. 06.03.2020 04.03.2022
46. सुधीर सक्सेना आई.पी.एस. 04.03.2022 से 30 नवम्बर 2024
47. कैलाश मकवाना आईपीएस 01 दिसम्बर 2024 से अब तक
69 वर्षों में मप्र को मिले 107 पद्म सम्मान
1 नवम्बर 1956 में स्थापना के बाद से मध्यप्रदेश की प्रतिभाओं को कुल 107 पद्म सम्मान मिले हैं। इनमें 79 पद्मश्री, 22 पद्म विभूषण और 6 पद्म विभूषण शामिल हैं। हालांकि मप्र को पहले भारत रत्न सम्मान का इंतजार है। शिक्षा, समाजसेवा, कला, चिकित्सा, खेल, समाजसेवा, उद्योग-व्यापार,साहित्य एवं शिक्षा, लोकसेवा सहित अन्य श्रेणियों में उत्कृष्ट प्रतिभाओं को भारत के सर्वश्रेष्ठ पद्म सम्मान दिए जाते हैं। उल्लेखनीय है कि भारत के चारों श्रेणियों के पद्म सम्मानों की शुरूआत वर्ष 1954 से हुई। देशभर में अब तक कुल 3644 पद्मश्री, 1339 पद्मभूषण, 343 पद्म विभूषण और 53 भारत रत्न दिए जा चुके हैं।
छत्तीसगढ़ विभाजन के बाद छोटा हो गया मप्र
छत्तीसगढ़ के गठन से पूर्व मप्र क्षेत्रफल के मामले में देश का सबसे बड़ा राज्य था। लेकिन 1 नवम्बर 2000 को छत्तीसगढ़ के विभाजन के बाद क्षेत्रफल के मामले में मप्र दूसरे स्थान पर आ गया। मप्र के दक्षिण-पश्चिमी सीमा के एक तिहाई (30.47 प्रतिशत) क्षेत्रफल अर्थात कुल 1,35,913 वर्ग किमी भूमि एवं 41.42 प्रतिशत वन क्षेत्र भी नए छग में चला गया। जनसंख्या एवं संशाधनों को विभाजित कर देश के 26वें छत्तीसगढ़ राज्य का गठन किया गया। इस राज्य विभाजन में मप्र के कर्मचारियों, वित्तीय संसाधनों और संपत्ति का भी बंटवारा हुआ। संयुक्त मप्र की 26.62 प्रतिशत जनसंख्या छत्तीसगढ़ राज्य की निवासी हो गई।
मप्र में थीं 320 विधानसभा, 40 लोकसभा सीटें
1 नवम्बर 2000 से पहले तक संयुक्त मध्यप्रदेश में कुल 320 विधानसभा और 40 लोकसभा सीटें थीं। राज्य विभाजन में 90 विधानसभा और 11 लोकसभा सीटें छत्तीसगढ़ के हिस्से में चली गईं। इस तरह मप्र में कुल 230 विधानसभा और 29 लोकसभा सीटें ही बची हैं।
विभाजन में अधिकारी-कर्मचारी भी बंटे
मध्यप्रदेश से छत्तीसगढ़ राज्य के अलग होने पर मध्यप्रदेश संवर्ग के भारतीय प्रशासनिक सेवा के आईएएस एवं आईपीएस सहित कुल 7 हजार से अधिक अधिकारी-कर्मचारी, पुलिसकर्मी और अन्य वित्तीय और भौतिक संपत्तियां छत्तीसगढ़ के हिस्से में चली गईं। 31 अक्टूबर 2000 की स्थिति में मध्य प्रदेश में 496 आईएएस और 278 आईपीएस और 385 आईएफएस अधिकारी थे। जिनमें से 111 आईएएस, 73 आईपीएस 99 आईएएस अधिकारियों को नवगठित राज्य छत्तीसगढ़ को दे दिया गया। वहीं मध्य प्रदेश के लगभग 96,000 पुलिसकर्मियों में से एक चौथाई पुलिस बल छत्तीसगढ़ चला गया।
टेबिल-कुर्सी तक का हुआ बंटवारा
1 नवंबर 2000 को मप्र और नवगठित छत्तीसगढ़ राज्य के बीच केवल कर्मचारियों, जमीन, जंगल, वित्तीय संसाधनों का ही बंटवारा नहीं हुआ, बल्कि टेबल, कुर्सियों, अलमारी आदि भी बांटे गए। इस बंटवारे में 36 वीआईपी टेबल, 40 वीआईपी कुर्सियां, 345 ऑफिस टेबल, 985 ऑफिस चेयर, 12 बड़ी सेंट्रल टेबल, 466 स्टील की अलमारियां छत्तीसगढ़ राज्य को सौंपी गईं।
मप्र के खजाने से छग को दिए 3 हजार करोड़
विभाजन के समय मप्र सरकार का स्वीकृत बजट 23 हजार करोड़ रुपये था। एक नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ राज्य बना तो रिजर्व बैंक ने 31 अक्टूबर को क्लोजिंग बैलेंस के आधार पर दोनों राज्यों के बीच धनराशि का बंटवारा किया। उस समय मप्र के बजट में से छत्तीसगढ़ को शुरुआती 5 माह के खर्चे के लिए 3,000 करोड़ रुपये दिए गए। इसके अलावा मप्र की जमा राशि की 26.3 प्रतिशत राशि दी गई।
छत्तीसगढ़ को सौंपा था इकलौता हेलीकॉप्टर
जब मध्यप्रदेश का विभाजन हुआ, तब राज्य सरकार के पास एक हेलिकॉप्टर और एक हवाई जहाज था। छत्तीसगढ़ नया राज्य बना था तो वहां के मुख्यमंत्री को भी हवाई प्रवासों के लिए किसी विमान या हेलिकॉप्टर की जरूरत थी। इसलिए मध्यप्रदेश सरकार ने अपना हेलिकॉप्टर छत्तीसगढ़ को दे दिया। हालांकि बाद में छत्तीसगढ़ सरकार ने नया हेलिकॉप्टर खरीद लिया, और पुराना हेलिकॉप्टर मप्र को लौटा दिया गया।
अन्य खबर
ट्रेंडिंग खबरें
मध्यप्रदेश
रोटेशन नहीं ट्रांसफर हैं ये: चेकपोस्ट व्यवस्था के बाद ही जारी होगी परिवहन विभाग की...
05-05-26
राजनीति
मोदी की झोली में बंगाल की ममता, भगवा हो गया ‘झालमुई’ का रंग, प्रधानमंत्री बोले...
04-05-26
राजधानी
कौशल शर्मा ने ग्रहण किया महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान के अध्यक्ष का पदभार
04-05-26
राजनीति
पश्चिम बंगाल विजय पर भाजपा कार्यालय में मना उत्सव, ढोल-नगाड़ों के बीच झूमे कार्यकर्ता, प्रदेश...
04-05-26
राजधानी
‘एक्टिव मोड’ में कार्य करें अधिकारी, लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई, समय सीमा बैठक में...
04-05-26